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Srinagar News: सीएम ने हजरतबल दरगाह में नमाज अदा की, अमन व शांति के लिए की दुआ
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National conference President Farooq Abdullah and his Son Cheif Minister Omar Abdullah offering
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- ईद की नमाज के लिए जामिया मस्जिद का बंद रहना दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद : उमर
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को आसार-ए-शरीफ दरगाह हजरतबल में ईद की नमाज अदा की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ देश दुनिया में अमन-शांति और इस्लामिक देशों पर थोपी गई जंग के तुरंत रुकने को लेकर भी दुआ मांगी। उन्होंने ईद की नमाज के लिए ऐतिहासिक जामिया मस्जिद के बंद रहना को दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताया।
नमाज अदा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ईद ऐसे मौके पर मनाई जा रही है जब पूरी उम्मत परेशान है। गम के बादल छाए हुए हैं। शायद कोई ऐसा इस्लामिक मुल्क नहीं जहां कहीं न कहीं जंग के बादल छाए न हों। आज मेरी तरफ से सिर्फ एक ही दुआ की गई है कि यह नाजायज जंग जो अमेरिका और इस्राइल की ओर से लोगों के ऊपर थोपी गई है वो तुरंत बंद हो जाए। अमन दोबारा बहाल हो और इस तरह के हालात फिर से न बनें।
ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में ईद की नमाज की अनुमति न दिए जाने पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहर की सबसे बड़ी मस्जिद पर लगाई गई पाबंदियां सुरक्षा एजेंसियों की ओर से सामान्य स्थिति होने के दावों पर सवाल खड़े करती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें दुख है कि शहर के बीचोबीच स्थित सदियों पुरानी इस मस्जिद में नमाजियों को नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी गई।
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सीएम उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से कहा कि पूरे जम्मू-कश्मीर में ईद की नमाज शांतिपूर्वक अदा की गई है। दुर्भाग्य से एक बार फिर श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में ईद की नमाज की अनुमति नहीं दी गई है। मुझे इससे बहुत अफसोस हुआ है। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के आकलन के बीच एक तालमेल की कमी है। सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी रखने वाली एजेंसियों के कहने और करने में फर्क दिखता है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के प्रभारी सुरक्षा और कानून प्रवर्तन अधिकारी बार-बार कहते हैं कि स्थिति सामान्य है लेकिन यह किस तरह की सामान्य स्थिति है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि ऐसे फैसले बदले जाएंगे और लोगों को आजादी से अपनी नमाज अदा करने की अनुमति दी जाएगी।
उमर ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों के असर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसका आर्थिक बोझ पूरे देश के घरों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में एलपीजी और तेल की कीमतों के असर को देख रहे हैं। कल कीमतें और बढ़ेंगी। इसका देश पर कितना बुरा असर पड़ेगा। इसका निश्चित रूप से असर पड़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे के दो पहलू हैं। एक आर्थिक और दूसरा भावनात्मक। सबसे पहले इसका मुस्लिम समुदाय की भावनाओं पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही इसका पूरे देश पर असर पड़ेगा। हमारी भावनाएं आहत हुई हैं लेकिन जिन लोगों के लिए एलपीजी और डीजल की वजह से घर चलाना मुश्किल हो रहा है उन पर भी इसका असर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि संघर्ष को खत्म करने की जरूरत है। हमारी ओर से केवल एक ही दुआ होनी चाहिए कि यह अन्यायपूर्ण युद्ध जल्द से जल्द समाप्त हो जाए और शांति फिर से स्थापित हो।
अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढ़ियों ने एक साथ हजरतबल दरगाह में पढ़ी नमाज
जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस से संबंधित अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढ़ियों में शामिल संरक्षक और अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके दोनों बेटों जामिर और जाहिर ने एक ही सफेह में आसार-ए-शरीफ दरगाह हजरतबल में ईद की नमाज अदा की। उमर अब्दुल्ला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा, मैंने अपने पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ मिलकर हजारों श्रद्धालुओं के साथ हजरतबल दरगाह में नमाज अदा की। इस अवसर पर मेरे साथ मेरे बेटे जामिर अब्दुल्ला और जाहिर अब्दुल्ला भी मौजूद थे। सीएम ने बताया कि उन्होंने शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और मादर-ए-मेहरबान के मजार-ए-अनवर पर फातिहा पढ़ी। उनकी विरासत को नमन किया और उनका आशीर्वाद मांगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को आसार-ए-शरीफ दरगाह हजरतबल में ईद की नमाज अदा की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ देश दुनिया में अमन-शांति और इस्लामिक देशों पर थोपी गई जंग के तुरंत रुकने को लेकर भी दुआ मांगी। उन्होंने ईद की नमाज के लिए ऐतिहासिक जामिया मस्जिद के बंद रहना को दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताया।
नमाज अदा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ईद ऐसे मौके पर मनाई जा रही है जब पूरी उम्मत परेशान है। गम के बादल छाए हुए हैं। शायद कोई ऐसा इस्लामिक मुल्क नहीं जहां कहीं न कहीं जंग के बादल छाए न हों। आज मेरी तरफ से सिर्फ एक ही दुआ की गई है कि यह नाजायज जंग जो अमेरिका और इस्राइल की ओर से लोगों के ऊपर थोपी गई है वो तुरंत बंद हो जाए। अमन दोबारा बहाल हो और इस तरह के हालात फिर से न बनें।
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ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में ईद की नमाज की अनुमति न दिए जाने पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहर की सबसे बड़ी मस्जिद पर लगाई गई पाबंदियां सुरक्षा एजेंसियों की ओर से सामान्य स्थिति होने के दावों पर सवाल खड़े करती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें दुख है कि शहर के बीचोबीच स्थित सदियों पुरानी इस मस्जिद में नमाजियों को नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी गई।
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सीएम उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से कहा कि पूरे जम्मू-कश्मीर में ईद की नमाज शांतिपूर्वक अदा की गई है। दुर्भाग्य से एक बार फिर श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में ईद की नमाज की अनुमति नहीं दी गई है। मुझे इससे बहुत अफसोस हुआ है। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के आकलन के बीच एक तालमेल की कमी है। सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी रखने वाली एजेंसियों के कहने और करने में फर्क दिखता है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के प्रभारी सुरक्षा और कानून प्रवर्तन अधिकारी बार-बार कहते हैं कि स्थिति सामान्य है लेकिन यह किस तरह की सामान्य स्थिति है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि ऐसे फैसले बदले जाएंगे और लोगों को आजादी से अपनी नमाज अदा करने की अनुमति दी जाएगी।
उमर ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों के असर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसका आर्थिक बोझ पूरे देश के घरों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में एलपीजी और तेल की कीमतों के असर को देख रहे हैं। कल कीमतें और बढ़ेंगी। इसका देश पर कितना बुरा असर पड़ेगा। इसका निश्चित रूप से असर पड़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे के दो पहलू हैं। एक आर्थिक और दूसरा भावनात्मक। सबसे पहले इसका मुस्लिम समुदाय की भावनाओं पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही इसका पूरे देश पर असर पड़ेगा। हमारी भावनाएं आहत हुई हैं लेकिन जिन लोगों के लिए एलपीजी और डीजल की वजह से घर चलाना मुश्किल हो रहा है उन पर भी इसका असर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि संघर्ष को खत्म करने की जरूरत है। हमारी ओर से केवल एक ही दुआ होनी चाहिए कि यह अन्यायपूर्ण युद्ध जल्द से जल्द समाप्त हो जाए और शांति फिर से स्थापित हो।
अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढ़ियों ने एक साथ हजरतबल दरगाह में पढ़ी नमाज
जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस से संबंधित अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढ़ियों में शामिल संरक्षक और अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके दोनों बेटों जामिर और जाहिर ने एक ही सफेह में आसार-ए-शरीफ दरगाह हजरतबल में ईद की नमाज अदा की। उमर अब्दुल्ला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा, मैंने अपने पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ मिलकर हजारों श्रद्धालुओं के साथ हजरतबल दरगाह में नमाज अदा की। इस अवसर पर मेरे साथ मेरे बेटे जामिर अब्दुल्ला और जाहिर अब्दुल्ला भी मौजूद थे। सीएम ने बताया कि उन्होंने शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और मादर-ए-मेहरबान के मजार-ए-अनवर पर फातिहा पढ़ी। उनकी विरासत को नमन किया और उनका आशीर्वाद मांगा।