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Srinagar News: फीस रेगुलेशन के पालन के लिए फाइनल नोटिस जारी
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- एफएफआरसी ने कश्मीर के 660 निजी स्कूलों को जरूरी दस्तावेज जमा न करने पर भेजा नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। निजी स्कूलों की फीस तय करने और रेगुलेशन के लिए जम्मू और कश्मीर कमेटी (एफएफआरसी) ने कश्मीर संभाग के 660 प्राइवेट स्कूलों को उनके फीस स्ट्रक्चर के रेगुलेशन और तय करने से जुड़े जरूरी दस्तावेज जमा न करने पर फाइनल नोटिस जारी किया है।
जस्टिस सुनील हाली (रिटायर्ड) की अगुवाई वाली कमेटी की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक अधिकारियों से पहले की बातचीत के बावजूद कई प्राइवेट स्कूल लगातार जरूरी फाइलें और दस्तावेज जमा करने में नाकाम रहे हैं। कमेटी ने कहा कि यह गैर-पालन गंभीर चिंता पैदा करता है और प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में फीस रेगुलेशन को कंट्रोल करने वाले कानूनी नियमों का उल्लंघन करता है।
नोटिस में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर स्कूल एजुकेशन एक्ट 2002 के सेक्शन 20-सी (3) के तहत कमेटी को किसी भी प्राइवेट स्कूल को स्टूडेंट्स से फीस लेने से रोकने का अधिकार है जब तक कि उसके फीस स्ट्रक्चर को फॉर्मल मंजूरी नहीं मिल जाती। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर प्राइवेट स्कूल रूल्स, 2022 के रूल 8(2) के मुताबिक कोई भी प्राइवेट स्कूल कमेटी से पहले से मंजूरी लिए बिना फीस नहीं बदलेगा या इकट्ठा नहीं करेगा।
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फाइलें जमा करने के लिए 15 दिन का आखिरी समय दिया
दस्तावेज जमा न करने को जानबूझकर किया गया उल्लंघन बताते हुए एफएफआरसी ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस तरह की हरकतें शिक्षा के कमर्शियलाइजेशन को रोकने के लिए बनाई गई रेगुलेटरी निगरानी को बायपास करती हैं। कमेटी ने इन स्कूलों के मैनेजमेंट को एफएफआरसी कार्यालय में पूरी फीस रेगुलेशन फाइलें जमा करने के लिए 15 दिनों का आखिरी समय दिया है। इसने चेतावनी दी है कि तय समय के अंदर पालन न करने पर अगले आदेश तक ट्यूशन, सालाना और ट्रांसपोर्ट चार्ज सहित किसी भी तरह की फीस के कलेक्शन पर तुरंत रोक लगा दी जाएगी।
बार-बार नियम तोड़ने पर 50,000 से 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना
माता-पिता और गार्जियन को यह भी सलाह दी गई है कि 15 दिन की डेडलाइन के बाद कोई भी पेमेंट करने से पहले स्कूल के फीस स्ट्रक्चर का अप्रूवल स्टेटस वेरिफाई कर लें। नोटिस में आगे कहा गया है कि लगातार नियम न मानने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है जिसमें संस्था की मान्यता सस्पेंड करना और कानून के संबंधित नियमों के तहत बार-बार नियम तोड़ने पर 50,000 से 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना लगाना शामिल है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। निजी स्कूलों की फीस तय करने और रेगुलेशन के लिए जम्मू और कश्मीर कमेटी (एफएफआरसी) ने कश्मीर संभाग के 660 प्राइवेट स्कूलों को उनके फीस स्ट्रक्चर के रेगुलेशन और तय करने से जुड़े जरूरी दस्तावेज जमा न करने पर फाइनल नोटिस जारी किया है।
जस्टिस सुनील हाली (रिटायर्ड) की अगुवाई वाली कमेटी की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक अधिकारियों से पहले की बातचीत के बावजूद कई प्राइवेट स्कूल लगातार जरूरी फाइलें और दस्तावेज जमा करने में नाकाम रहे हैं। कमेटी ने कहा कि यह गैर-पालन गंभीर चिंता पैदा करता है और प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में फीस रेगुलेशन को कंट्रोल करने वाले कानूनी नियमों का उल्लंघन करता है।
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नोटिस में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर स्कूल एजुकेशन एक्ट 2002 के सेक्शन 20-सी (3) के तहत कमेटी को किसी भी प्राइवेट स्कूल को स्टूडेंट्स से फीस लेने से रोकने का अधिकार है जब तक कि उसके फीस स्ट्रक्चर को फॉर्मल मंजूरी नहीं मिल जाती। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर प्राइवेट स्कूल रूल्स, 2022 के रूल 8(2) के मुताबिक कोई भी प्राइवेट स्कूल कमेटी से पहले से मंजूरी लिए बिना फीस नहीं बदलेगा या इकट्ठा नहीं करेगा।
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फाइलें जमा करने के लिए 15 दिन का आखिरी समय दिया
दस्तावेज जमा न करने को जानबूझकर किया गया उल्लंघन बताते हुए एफएफआरसी ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस तरह की हरकतें शिक्षा के कमर्शियलाइजेशन को रोकने के लिए बनाई गई रेगुलेटरी निगरानी को बायपास करती हैं। कमेटी ने इन स्कूलों के मैनेजमेंट को एफएफआरसी कार्यालय में पूरी फीस रेगुलेशन फाइलें जमा करने के लिए 15 दिनों का आखिरी समय दिया है। इसने चेतावनी दी है कि तय समय के अंदर पालन न करने पर अगले आदेश तक ट्यूशन, सालाना और ट्रांसपोर्ट चार्ज सहित किसी भी तरह की फीस के कलेक्शन पर तुरंत रोक लगा दी जाएगी।
बार-बार नियम तोड़ने पर 50,000 से 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना
माता-पिता और गार्जियन को यह भी सलाह दी गई है कि 15 दिन की डेडलाइन के बाद कोई भी पेमेंट करने से पहले स्कूल के फीस स्ट्रक्चर का अप्रूवल स्टेटस वेरिफाई कर लें। नोटिस में आगे कहा गया है कि लगातार नियम न मानने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है जिसमें संस्था की मान्यता सस्पेंड करना और कानून के संबंधित नियमों के तहत बार-बार नियम तोड़ने पर 50,000 से 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना लगाना शामिल है।