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Srinagar News: शान और पहचान की प्रतीक कराकुली टोपी की कला को सहेज रहे फाजिल

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Srinagar, Faazil Riaz, Karakulli Topi, Trend in Youth
फाजिल रियाज। स्रोत स्वयं - फोटो : 1
- पुश्तैनी काम को संभाला, परंपरा को आधुनिक स्टाइल का रूप देकर किया प्रसिद्ध
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर में शान और पहचान की प्रतीक कराकुली टोपी के पुश्तैनी काम को संभाल रहे 20 साल के फाजिल रियाज ने परंपरा को आधुनिक स्टाइल से मिश्रित किया है। उनके इस अंदाज से यह टोपी फिर से ट्रेंड में आ गई है। उनकी लगन से की गई कोशिशों से कराकुली टोपी पूरी घाटी के युवाओं के बीच फिर से लोकप्रिय हो रही है।

फाजिल ने बताया कि उनकी दुकान वर्ष 1920 से चल रही है। पहले यह काम उनके परदादा करते थे। बाद में दादाजी ने इसे आगे बढ़ाया। अब, मैं चौथी पीढ़ी हूं जो यह काम कर रहा हूं। सोशल मीडिया कैंपेन और इनोवेटिव डिजाइन ने इसे कॉलेजों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शादियों में लोकप्रिय बना दिया है। वह कच्चा कराकुल भेड़ की ऊन अफगानिस्तान से मंगवाते हैं। हर टोपी हाथ से बनाते हैं जिसे पूरा करने में 5-6 घंटे लगते हैं। उन्होंने अपने कलेक्शन में पारंपरिक पैटर्न के साथ-साथ पकोल और ईरानी स्टाइल जैसे आधुनिक डिजाइन भी शामिल किए हैं।
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फाजिल ने बताया, कच्चा कराकुल भेड़ की ऊन अफगानिस्तान से आती है। इसे हाथ से काटते और आकार देते हैं। हर पीस को अपने ग्राहकों की खास पसंद के हिसाब से कस्टमाइज करते हैं। हर टोपी प्यार से बनाई जाती है इसमें बारीकी से हाथ की कारीगरी लगती है।
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कलेक्शन में कई नए पैटर्न शामिल किए
परंपरागत रूप से पहले लोग मुख्य रूप से जिन्ना टोपी पहनते थे। नई पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए मैंने अपने कलेक्शन में कई नए पैटर्न शामिल किए हैं जैसे पकोल, ईरानी स्टाइल, पीक्ड कैप, और गोल कराकुली के छह वेरिएशन। मैंने अलग-अलग तरह के स्टाइल और मॉडर्न डिजाइन बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है।

अपने उत्पाद दुनिया भर में भेज रहा हूं
जब मेरे दादाजी उस समय दुकान पर होते थेतो जब भी मैं स्कूल से आता था और देखता था कि वे टोपी कैसे बनाते हैं। मैंने उनसे सीखने की कोशिश की। मेरे दादाजी की मौत के बाद मुझे मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन अब मैंने सुधार किया है और हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट दे रहा हूं। अब मैं अपने उत्पाद दुनिया भर में भेज रहा हूं।
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