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Srinagar News: राशिद के गांव में पसरा मातम, परिवार शव की कर रहा है मांग
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परिवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
गांदरबल। मध्य कश्मीर के गांदरबल में बुधवार को ऑपरेशन अरहामा में मारे गए लार चक मोहल्ला निवासी राशिद की मौत के बाद इलाके में खामोशी पसरी हुई है। परिवार के लोग शव और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
राशिद के बड़े भाई एजाज अहमद मुगल ने आरोप लगाया है कि उसके भाई को मुठभेड़ में मारा गया है। उन्होंने कहा कि राशिद 31 मार्च को सुबह घर से निकला। शाम को वह लौटा नहीं, उसका फोन भी बंद था। एजाज ने कहा कि हम एफआईआर दर्ज करने के लिए गए थे, लेकिन पुलिस ने हमारी बात नहीं मानी।
उसने कहा, वीरवार की सुबह मैं काम के लिए निकला था। नाले सिंध के पास मैं काम कर रहा था, वहां पुलिस आई और कहा कि भाई का एक्सीडेंट हो गया है उसकी शिनाख्त करनी है। वे मुझे गाड़ी में लेकर श्रीनगर चले गए और एक जगह एम्बुलेंस में उसकी शिनाख्त करने को बोला। मैंने देखा उसका चेहरा पूरी तरह से बिगड़ा था। चेहरे और जिस्म पर गोलियों के निशान थे। पूछे जाने पर किसी ने भी कुछ नहीं बताया। एजाज ने कहा कि राशिद के कपड़े-जूते भी बदले हुए थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया और उसे हंदवाड़ा में दफनाया गया। हमारे साथ नाइंसाफी हुई है।
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एजाज ने कहा कि राशिद को आतंकवादी बताया जा रहा है। जो लोग ऐसा कह रहे हैं वे जम्मू कश्मीर बैंक, ऑफिस, लार ब्लॉक ऑफिस और खिदमत सेंटर जाकर पूछताछ करें उन्हें सब पता चल जाएगा। राशिद की बहन नसीमा बानो ने कहा कि वह बेगुनाह था। उसका शव तो मिलना चाहिए।
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित कश्मीर के नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत कश्मीर केंद्रित नेताओं ने वीरवार को राशिद की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि परिवार के दावे को सीधे-सीधे खारिज नहीं किया जाना चाहिए। कम से कम इस मुठभेड़ की एक निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच होनी चाहिए और इसके तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए। जांच की घोषणा में किसी भी तरह की लीपापोती या देरी से केवल विश्वसनीयता को ही नुकसान पहुंचेगा और यह किसी के भी हित में नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वीरवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ऐसे आरोप हैं कि यह एक फर्जी मुठभेड़ थी। उन्होंने कहा कि सेना ने पहले कहा था कि वह एक विदेशी आतंकवादी था, फिर उन्होंने कहा कि वह एक स्थानीय व्यक्ति था जो आतंकवाद से जुड़ा हुआ था। वह युवक अनाथ था और एक एनजीओ चलाता था। उन्होंने आगे कहा कि उसका शव उसके परिवार को भी नहीं सौंपा गया और उसे दफना दिया गया।
वहीं सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने भी राशिद के परिवार का पक्ष लिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी आरोप परिवार लगा रहा है समय-सीमा के भीतर और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार ने जो आरोप लगाया है वह गंभीर है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गांदरबल। मध्य कश्मीर के गांदरबल में बुधवार को ऑपरेशन अरहामा में मारे गए लार चक मोहल्ला निवासी राशिद की मौत के बाद इलाके में खामोशी पसरी हुई है। परिवार के लोग शव और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
राशिद के बड़े भाई एजाज अहमद मुगल ने आरोप लगाया है कि उसके भाई को मुठभेड़ में मारा गया है। उन्होंने कहा कि राशिद 31 मार्च को सुबह घर से निकला। शाम को वह लौटा नहीं, उसका फोन भी बंद था। एजाज ने कहा कि हम एफआईआर दर्ज करने के लिए गए थे, लेकिन पुलिस ने हमारी बात नहीं मानी।
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उसने कहा, वीरवार की सुबह मैं काम के लिए निकला था। नाले सिंध के पास मैं काम कर रहा था, वहां पुलिस आई और कहा कि भाई का एक्सीडेंट हो गया है उसकी शिनाख्त करनी है। वे मुझे गाड़ी में लेकर श्रीनगर चले गए और एक जगह एम्बुलेंस में उसकी शिनाख्त करने को बोला। मैंने देखा उसका चेहरा पूरी तरह से बिगड़ा था। चेहरे और जिस्म पर गोलियों के निशान थे। पूछे जाने पर किसी ने भी कुछ नहीं बताया। एजाज ने कहा कि राशिद के कपड़े-जूते भी बदले हुए थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया और उसे हंदवाड़ा में दफनाया गया। हमारे साथ नाइंसाफी हुई है।
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एजाज ने कहा कि राशिद को आतंकवादी बताया जा रहा है। जो लोग ऐसा कह रहे हैं वे जम्मू कश्मीर बैंक, ऑफिस, लार ब्लॉक ऑफिस और खिदमत सेंटर जाकर पूछताछ करें उन्हें सब पता चल जाएगा। राशिद की बहन नसीमा बानो ने कहा कि वह बेगुनाह था। उसका शव तो मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित कश्मीर के नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत कश्मीर केंद्रित नेताओं ने वीरवार को राशिद की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि परिवार के दावे को सीधे-सीधे खारिज नहीं किया जाना चाहिए। कम से कम इस मुठभेड़ की एक निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच होनी चाहिए और इसके तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए। जांच की घोषणा में किसी भी तरह की लीपापोती या देरी से केवल विश्वसनीयता को ही नुकसान पहुंचेगा और यह किसी के भी हित में नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वीरवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ऐसे आरोप हैं कि यह एक फर्जी मुठभेड़ थी। उन्होंने कहा कि सेना ने पहले कहा था कि वह एक विदेशी आतंकवादी था, फिर उन्होंने कहा कि वह एक स्थानीय व्यक्ति था जो आतंकवाद से जुड़ा हुआ था। वह युवक अनाथ था और एक एनजीओ चलाता था। उन्होंने आगे कहा कि उसका शव उसके परिवार को भी नहीं सौंपा गया और उसे दफना दिया गया।
वहीं सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने भी राशिद के परिवार का पक्ष लिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी आरोप परिवार लगा रहा है समय-सीमा के भीतर और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार ने जो आरोप लगाया है वह गंभीर है।