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Srinagar News: मजिस्ट्रेटी जांच में कुछ सामने न आने के विरोध में लोगों ने किया प्रदर्शन
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गांदरबल में प्रदर्शन। वीडिया ग्रैब
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संवाद न्यूज एजेंसी
गांदरबल। मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के चूंटवलीवार में हुई कथित मुठभेड़ में एलजी मनोज सिन्हा की ओर से दिए गए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश के करीब दो सप्ताह बाद भी जांच में कुछ ठोस न निकलकर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि जांच तेजी से की जाए, दोषियों को सजा दी जाए और मृतक के शव को वापस दिया जाए।
बता दें कि जिले के चूंटवलीवार में 31 मार्च को सेना ने ऑपरेशन अरहामा में एक आतंकवादी को मारने का दावा किया गया था जिसकी शिनाख्त बाद में स्थानीय राशिद मुगल के तौर पर हुई थी जिसके परिवार ने आरोप लगाया था कि उसका आतंकवाद के साथ कोई लेना देना नहीं था।
चश्मदीदों ने बताया कि चूंटवलीवार के स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को अपने गांव से तेज बारिश के बावजूद भी एक प्रदर्शन रैली निकाली। सैंकड़ों लोगों ने इस मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए नारेबाजी की और आरोप लगाया कि जांच में देरी शक पैदा कर रही है। उनहोंने कहा कि एलजी की ओर से जांच के लिए सात दिन का समय दिया गया था लेकिन एक सप्ताह अधिक हो गया लेकिन कुछ ठोस निकलकर सामने नहीं आया।
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एक प्रदर्शनकारी नासिर अहमद खान ने कहा कि जो सात दिन की मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए गए थे उससे अधिक समय हो चुका है लेकिन अभी तक गांदरबल मुठभेड़ में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसलिए हमने आज शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का फैसला लिया। हम चाहते हैं कि राशिद मुगल का शव वापस दिया जाए। जो भी कातिल हैं उन्हें सजा दी जाए।
एक अन्य प्रदर्शनकारी इरफान अहमद ने कहा कि रशीद का फेक एनकाउंटर हुआ था। सात दिन की मजिस्ट्रेट जांच का समय पूरा हो चुका है। हम एलजी प्रशासन से अपील करते हैं कि हमें बॉडी वापस दी जाए। बता दें कि प्रदर्शनकारी करीब पांच किलोमीटर दूर लार पुलिस स्टेशन तक पहुंचे जिनमें महिलाएं भी शामिल थी लेकिन पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया जिसके बाद प्रदर्शनकारी लौट गए।
इस दौरान हालात की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। गौरतलब है कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 3 अप्रैल को जिले में हुई मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई नेताओं ने इस मुठभेड़ पर सवाल उठाए थे।
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गांदरबल। मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के चूंटवलीवार में हुई कथित मुठभेड़ में एलजी मनोज सिन्हा की ओर से दिए गए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश के करीब दो सप्ताह बाद भी जांच में कुछ ठोस न निकलकर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि जांच तेजी से की जाए, दोषियों को सजा दी जाए और मृतक के शव को वापस दिया जाए।
बता दें कि जिले के चूंटवलीवार में 31 मार्च को सेना ने ऑपरेशन अरहामा में एक आतंकवादी को मारने का दावा किया गया था जिसकी शिनाख्त बाद में स्थानीय राशिद मुगल के तौर पर हुई थी जिसके परिवार ने आरोप लगाया था कि उसका आतंकवाद के साथ कोई लेना देना नहीं था।
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चश्मदीदों ने बताया कि चूंटवलीवार के स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को अपने गांव से तेज बारिश के बावजूद भी एक प्रदर्शन रैली निकाली। सैंकड़ों लोगों ने इस मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए नारेबाजी की और आरोप लगाया कि जांच में देरी शक पैदा कर रही है। उनहोंने कहा कि एलजी की ओर से जांच के लिए सात दिन का समय दिया गया था लेकिन एक सप्ताह अधिक हो गया लेकिन कुछ ठोस निकलकर सामने नहीं आया।
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एक प्रदर्शनकारी नासिर अहमद खान ने कहा कि जो सात दिन की मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए गए थे उससे अधिक समय हो चुका है लेकिन अभी तक गांदरबल मुठभेड़ में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसलिए हमने आज शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का फैसला लिया। हम चाहते हैं कि राशिद मुगल का शव वापस दिया जाए। जो भी कातिल हैं उन्हें सजा दी जाए।
एक अन्य प्रदर्शनकारी इरफान अहमद ने कहा कि रशीद का फेक एनकाउंटर हुआ था। सात दिन की मजिस्ट्रेट जांच का समय पूरा हो चुका है। हम एलजी प्रशासन से अपील करते हैं कि हमें बॉडी वापस दी जाए। बता दें कि प्रदर्शनकारी करीब पांच किलोमीटर दूर लार पुलिस स्टेशन तक पहुंचे जिनमें महिलाएं भी शामिल थी लेकिन पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया जिसके बाद प्रदर्शनकारी लौट गए।
इस दौरान हालात की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। गौरतलब है कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 3 अप्रैल को जिले में हुई मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सहित कई नेताओं ने इस मुठभेड़ पर सवाल उठाए थे।