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अमरनाथ यात्रा भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों का जीवंत प्रतीक : एलजी
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- अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में बोले उपराज्यपाल - आपसी सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और विविधता में एकता की अनूठी मिसाल है पवित्र यात्रा
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने वीरवार को श्री अमरनाथ यात्रा पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों का जीवंत प्रतीक है।
गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज फॉर वूमेन, अनंतनाग द्वारा जिला प्रशासन अनंतनाग के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में उपराज्यपाल ने पवित्र यात्रा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्री अमरनाथ जी यात्रा भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों का एक जीवंत प्रतीक है। हमें इस महान परंपरा को सहेजने, समृद्ध करने और आने वाली पीढ़ियों को सौंपने के लिए निरंतर काम करना चाहिए।
उपराज्यपाल ने कहा कि यह पवित्र यात्रा सामाजिक एकता और गहरे आंतरिक चिंतन का संदेश देती है। धैर्य, प्रार्थना और परमात्मा से जुड़ाव का यह सफर हमें याद दिलाता है कि सच्ची आध्यात्मिकता हमारे भीतर के प्रकाश को तलाशने के बारे में है। उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि कैसे कश्मीर की कई पीढ़ियां और समुदाय सालों से इन तीर्थयात्रियों की सेवा में लगे हुए हैं। विभिन्न धर्मों और मान्यताओं के लोगों ने इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो यह साबित करता है कि एक साझा मानवीय चेतना धर्म, भाषा और समुदाय की सीमाओं से कहीं ऊपर उठकर काम करती है।
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वैश्विक परिप्रेक्ष्य में इस यात्रा की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्सों में विभाजन बढ़ता दिख रहा है, तब श्री अमरनाथ जी यात्रा सह-अस्तित्व का एक अनूठा मॉडल पेश करती है। यह यात्रा संदेश देती है कि आस्था का असली उद्देश्य लोगों को करीब लाना है। देशभर से आने वाले श्रद्धालु अपनी भाषाएं और परंपराएं साथ लाते हैं, जिससे यह मार्ग आपसी सम्मान और गर्मजोशी का माध्यम बन जाता है। बाबा बर्फानी की यह यात्रा हमारे देश की विविधता में एकता के आदर्श को साकार करती है और सिखाती है कि राष्ट्रीय एकता आपसी सम्मान और साझा उद्देश्यों पर टिकी होती है।
आर्थिक और ढांचागत विकास के पहलू पर बात करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि अमरनाथ यात्रा स्थानीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टट्टू चालक, दुकानदार, शिल्पकार, होटल व्यवसायी और परिवहन प्रदाता सहित हजारों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस यात्रा से जुड़े हैं, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है। इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना हमारा कर्तव्य है। सरकार जीरो-वेस्ट अमरनाथ यात्रा के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत 100 प्रतिशत कचरा रीसाइक्लिंग और प्लास्टिक लाओ, थैला ले जाओ जैसी मुहिम चलाई जा रही हैं।
उन्होंने बुनियादी ढांचे में सुधार का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में बालटाल और चंदनवाड़ी दोनों ट्रैक को 12 फीट तक चौड़ा किया गया है और रात के समय वहां रोशनी की पूरी व्यवस्था की गई है। यात्रा के दौरान हर रात इन रास्तों की मरम्मत की जाती है और आपातकालीन चिकित्सा के लिए जगह-जगह एम्बुलेंस तैनात रहती हैं। उन्होंने भविष्य की योजना साझा करते हुए कहा कि आने वाले समय में यह यात्रा वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बनेगी, जिससे विदेशी पर्यटकों को भारत के योग, ध्यान और दर्शन को समझने का मौका मिलेगा। पिछले पांच वर्षों में ऑनलाइन पंजीकरण, आरएफआईडी, जीपीएस निगरानी और सीसीटीवी सर्विलांस जैसे डिजिटल उपकरणों के जरिए यात्रा को और अधिक सुरक्षित, सुलभ और पारदर्शी बनाया गया है।
इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उपराज्यपाल के प्रधान सचिव और श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के सीईओ डॉ. मनदीप के. भंडारी, युवा सेवा और खेल विभाग के आयुक्त सचिव व पहलगाम मार्ग के नोडल अधिकारी डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी, कश्मीर के मंडल आयुक्त अंशुल गर्ग, आईजीपी कश्मीर वी.के. बिरदी, डीआईजी दक्षिण कश्मीर जावेद इकबाल मट्टू, अनंतनाग के उपायुक्त डॉ. बिलाल मोहिउद्दीन भट, अनंतनाग के एसएसपी अमोद नागपुरे, कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. खालिदा हसन, आयोजन सचिव प्रो. फारूक अहमद मलिक सहित कॉलेज का स्टाफ, छात्र और नागरिक समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने वीरवार को श्री अमरनाथ यात्रा पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों का जीवंत प्रतीक है।
गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज फॉर वूमेन, अनंतनाग द्वारा जिला प्रशासन अनंतनाग के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में उपराज्यपाल ने पवित्र यात्रा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्री अमरनाथ जी यात्रा भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों का एक जीवंत प्रतीक है। हमें इस महान परंपरा को सहेजने, समृद्ध करने और आने वाली पीढ़ियों को सौंपने के लिए निरंतर काम करना चाहिए।
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उपराज्यपाल ने कहा कि यह पवित्र यात्रा सामाजिक एकता और गहरे आंतरिक चिंतन का संदेश देती है। धैर्य, प्रार्थना और परमात्मा से जुड़ाव का यह सफर हमें याद दिलाता है कि सच्ची आध्यात्मिकता हमारे भीतर के प्रकाश को तलाशने के बारे में है। उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि कैसे कश्मीर की कई पीढ़ियां और समुदाय सालों से इन तीर्थयात्रियों की सेवा में लगे हुए हैं। विभिन्न धर्मों और मान्यताओं के लोगों ने इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो यह साबित करता है कि एक साझा मानवीय चेतना धर्म, भाषा और समुदाय की सीमाओं से कहीं ऊपर उठकर काम करती है।
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वैश्विक परिप्रेक्ष्य में इस यात्रा की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्सों में विभाजन बढ़ता दिख रहा है, तब श्री अमरनाथ जी यात्रा सह-अस्तित्व का एक अनूठा मॉडल पेश करती है। यह यात्रा संदेश देती है कि आस्था का असली उद्देश्य लोगों को करीब लाना है। देशभर से आने वाले श्रद्धालु अपनी भाषाएं और परंपराएं साथ लाते हैं, जिससे यह मार्ग आपसी सम्मान और गर्मजोशी का माध्यम बन जाता है। बाबा बर्फानी की यह यात्रा हमारे देश की विविधता में एकता के आदर्श को साकार करती है और सिखाती है कि राष्ट्रीय एकता आपसी सम्मान और साझा उद्देश्यों पर टिकी होती है।
आर्थिक और ढांचागत विकास के पहलू पर बात करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि अमरनाथ यात्रा स्थानीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टट्टू चालक, दुकानदार, शिल्पकार, होटल व्यवसायी और परिवहन प्रदाता सहित हजारों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस यात्रा से जुड़े हैं, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है। इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना हमारा कर्तव्य है। सरकार जीरो-वेस्ट अमरनाथ यात्रा के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत 100 प्रतिशत कचरा रीसाइक्लिंग और प्लास्टिक लाओ, थैला ले जाओ जैसी मुहिम चलाई जा रही हैं।
उन्होंने बुनियादी ढांचे में सुधार का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में बालटाल और चंदनवाड़ी दोनों ट्रैक को 12 फीट तक चौड़ा किया गया है और रात के समय वहां रोशनी की पूरी व्यवस्था की गई है। यात्रा के दौरान हर रात इन रास्तों की मरम्मत की जाती है और आपातकालीन चिकित्सा के लिए जगह-जगह एम्बुलेंस तैनात रहती हैं। उन्होंने भविष्य की योजना साझा करते हुए कहा कि आने वाले समय में यह यात्रा वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बनेगी, जिससे विदेशी पर्यटकों को भारत के योग, ध्यान और दर्शन को समझने का मौका मिलेगा। पिछले पांच वर्षों में ऑनलाइन पंजीकरण, आरएफआईडी, जीपीएस निगरानी और सीसीटीवी सर्विलांस जैसे डिजिटल उपकरणों के जरिए यात्रा को और अधिक सुरक्षित, सुलभ और पारदर्शी बनाया गया है।
इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उपराज्यपाल के प्रधान सचिव और श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के सीईओ डॉ. मनदीप के. भंडारी, युवा सेवा और खेल विभाग के आयुक्त सचिव व पहलगाम मार्ग के नोडल अधिकारी डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी, कश्मीर के मंडल आयुक्त अंशुल गर्ग, आईजीपी कश्मीर वी.के. बिरदी, डीआईजी दक्षिण कश्मीर जावेद इकबाल मट्टू, अनंतनाग के उपायुक्त डॉ. बिलाल मोहिउद्दीन भट, अनंतनाग के एसएसपी अमोद नागपुरे, कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. खालिदा हसन, आयोजन सचिव प्रो. फारूक अहमद मलिक सहित कॉलेज का स्टाफ, छात्र और नागरिक समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।