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Srinagar News: कैंसर से लड़ाई के बीच खुद की पढ़ाई, 10वीं में पाए 97% अंक
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पुलवामा का आकाश अशरफ। संवाद
जज्बा-कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के बीच उसने अपने वार्ड को ही कक्षा बना लिया
डेढ़ साल से अस्पताल में भर्ती है रक्त कैंसर से लड़ रहा त्राल का आकाश अशरफ
यूनिस खालिक
पुलवामा। पढ़ाई का जज्बा हो तो हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है। डेढ़ साल से अस्पताल में भर्ती 16 साल के आकाश अशरफ को रक्त कैंसर भी रोक नहीं पाया। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के बीच उसने अपने वार्ड को ही कक्षा बना लिया। बिना ट्यूशन सेल्फ स्टडी की और 10वीं की जेके बोर्ड परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक हासिल किए। उसकी यह उपलब्धि उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी परेशानियों के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं।
पुलवामा के त्राल स्थित गांव डाडसरा के रहने वाले मोहम्मद अशरफ मीर ने बताया कि पहली बार जून 2024 में उनके बेटे आकाश में रक्त कैंसर की बीमारी का पता लगा था। तब से उसका इलाज चल रहा है। आकाश ने बताया कि वह डाडसरा के स्कूल में कक्षा नौ के बीच सत्र में था तब जून 2024 में आखिरी बार स्कूल में अपनी रेगुलर कक्षा ली थी। उसके बाद मुझे अपनी बीमारी के बारे में पता लगा।
पिछले डेढ़ साल से मैं लगभग बिस्तर पर ही था, इन महीनों में मैंने कभी अपना क्लासरूम अटेंड नहीं किया बल्कि खुद को हमेशा कीमोथेरेपी से रेडियोथेरेपी वार्ड में घूमता हुआ पाया। वह इस जानलेवा बीमारी से घबराया नहीं बल्कि उसने अपने सपने को सच कर दिखाया। पहले नौवीं और फिर अब 10वीं की परीक्षा में 500 में से 485 अंक हासिल किए हैं।
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आकाश ने बताया कि मैं हमेशा बोर्ड परीक्षा में टॉप करना चाहता था लेकिन मेरी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। सभी मुश्किलों के बावजूद, ज्यादातर समय मेरे पास खड़े होने की भी शक्ति नहीं होती थी लेकिन जब भी मुझे थोड़ा समय मिलता तो मैं पढ़ाई करता था और बिना किसी रेगुलर क्लास या किसी प्राइवेट ट्यूशन के परीक्षा दी।
बीमारी की वजह से काफी कमजोर हूं, मैं किसी भी रेगुलर क्लास में जाने की शक्ति नहीं है लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा। मैं मेडिकल सब्जेक्ट्स के साथ अपनी पढ़ाई ऑफलाइन या डिस्टेंस मोड से जारी रखूंगा। डॉक्टरों ने उसे बताया है कि आने वाले 2-3 महीनों में उसे स्टेम सेल बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाना होगा। उससे पहले वह 11वीं क्लास में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, इंग्लिश और फिजिकल एजुकेशन सब्जेक्ट्स पढ़ने के लिए एडमिशन लेना चाहता है। संवाद
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बारामुला के दृष्टिबाधित छात्र ने हासिल किए 468 अंक
बारामुला। शारीरिक सीमाओं को चुनौती देते हुए असाधारण दृढ़ संकल्प के बल पर उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के चंदीकूट गांव के दृष्टिबाधित छात्र मुसैब यूसुफ ने जेके बोर्ड की कक्षा 10 की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 500 में से 468 अंक हासिल किए हैं। मुसैब की यह उल्लेखनीय उपलब्धि पूरे जिले में सराहना प्राप्त कर रही है। यह एक शक्तिशाली संदेश देती है कि आंखों की रोशनी का अभाव दिमाग की चमक को कभी कम नहीं कर सकता।
परिणाम घोषित होने के बाद बातचीत में मुसैब ने विनम्रता से अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के अटूट समर्थन और शिक्षकों के निरंतर मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि उनके प्रोत्साहन ने ही उन्हें चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने और प्रेरित रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों और स्थानीय निवासियों ने मुसैब को मेहनती, अनुशासित और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला बताया। संवाद
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डेढ़ साल से अस्पताल में भर्ती है रक्त कैंसर से लड़ रहा त्राल का आकाश अशरफ
यूनिस खालिक
पुलवामा। पढ़ाई का जज्बा हो तो हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है। डेढ़ साल से अस्पताल में भर्ती 16 साल के आकाश अशरफ को रक्त कैंसर भी रोक नहीं पाया। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के बीच उसने अपने वार्ड को ही कक्षा बना लिया। बिना ट्यूशन सेल्फ स्टडी की और 10वीं की जेके बोर्ड परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक हासिल किए। उसकी यह उपलब्धि उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी परेशानियों के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं।
पुलवामा के त्राल स्थित गांव डाडसरा के रहने वाले मोहम्मद अशरफ मीर ने बताया कि पहली बार जून 2024 में उनके बेटे आकाश में रक्त कैंसर की बीमारी का पता लगा था। तब से उसका इलाज चल रहा है। आकाश ने बताया कि वह डाडसरा के स्कूल में कक्षा नौ के बीच सत्र में था तब जून 2024 में आखिरी बार स्कूल में अपनी रेगुलर कक्षा ली थी। उसके बाद मुझे अपनी बीमारी के बारे में पता लगा।
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पिछले डेढ़ साल से मैं लगभग बिस्तर पर ही था, इन महीनों में मैंने कभी अपना क्लासरूम अटेंड नहीं किया बल्कि खुद को हमेशा कीमोथेरेपी से रेडियोथेरेपी वार्ड में घूमता हुआ पाया। वह इस जानलेवा बीमारी से घबराया नहीं बल्कि उसने अपने सपने को सच कर दिखाया। पहले नौवीं और फिर अब 10वीं की परीक्षा में 500 में से 485 अंक हासिल किए हैं।
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आकाश ने बताया कि मैं हमेशा बोर्ड परीक्षा में टॉप करना चाहता था लेकिन मेरी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। सभी मुश्किलों के बावजूद, ज्यादातर समय मेरे पास खड़े होने की भी शक्ति नहीं होती थी लेकिन जब भी मुझे थोड़ा समय मिलता तो मैं पढ़ाई करता था और बिना किसी रेगुलर क्लास या किसी प्राइवेट ट्यूशन के परीक्षा दी।
बीमारी की वजह से काफी कमजोर हूं, मैं किसी भी रेगुलर क्लास में जाने की शक्ति नहीं है लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा। मैं मेडिकल सब्जेक्ट्स के साथ अपनी पढ़ाई ऑफलाइन या डिस्टेंस मोड से जारी रखूंगा। डॉक्टरों ने उसे बताया है कि आने वाले 2-3 महीनों में उसे स्टेम सेल बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाना होगा। उससे पहले वह 11वीं क्लास में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, इंग्लिश और फिजिकल एजुकेशन सब्जेक्ट्स पढ़ने के लिए एडमिशन लेना चाहता है। संवाद
बारामुला के दृष्टिबाधित छात्र ने हासिल किए 468 अंक
बारामुला। शारीरिक सीमाओं को चुनौती देते हुए असाधारण दृढ़ संकल्प के बल पर उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के चंदीकूट गांव के दृष्टिबाधित छात्र मुसैब यूसुफ ने जेके बोर्ड की कक्षा 10 की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 500 में से 468 अंक हासिल किए हैं। मुसैब की यह उल्लेखनीय उपलब्धि पूरे जिले में सराहना प्राप्त कर रही है। यह एक शक्तिशाली संदेश देती है कि आंखों की रोशनी का अभाव दिमाग की चमक को कभी कम नहीं कर सकता।
परिणाम घोषित होने के बाद बातचीत में मुसैब ने विनम्रता से अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के अटूट समर्थन और शिक्षकों के निरंतर मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि उनके प्रोत्साहन ने ही उन्हें चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने और प्रेरित रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों और स्थानीय निवासियों ने मुसैब को मेहनती, अनुशासित और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला बताया। संवाद