कश्मीर: एलओसी से सटे टीटवाल में भी गूंजे श्रीराम के जयघोष, रंग-बिरंगी रोशनी में जगमग हुआ मां शारदा मंदिर
कुपवाड़ा के टीटवाल में भारत-पाकिस्तान निंयत्रण रेखा के पास स्थित शारदा मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अवसर पर विशेष पूजा की गई। इस अवसर पर दीये और मोमबत्तियां जलाई गईं।
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उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा के टीटवाल में भारत-पाकिस्तान निंयत्रण रेखा के पास स्थित शारदा मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अवसर पर विशेष पूजा की गई। इस अवसर पर दीये और मोमबत्तियां जलाई गईं और पूरे मंदिर को रंगबिरंगी रोशनी से सजाया गया। बच्चों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने दीपोत्सव में भाग लिया। साथ ही मिठाइयां बांटीं गई।
सेव शारदा कमेटी कश्मीर के संस्थापक रविंदर पंडिता ने कहा कि राम मंदिर आजादी के बाद दूसरे ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा का प्रतीक है। इससे पहले हमने पिछले साल जून में टीटवाल में नए माता शारदा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह किया गया। बीते साल मार्च के अंतिम सप्ताह में कुपवाड़ा जिले के टीटवाल गांव में किशनगंगा नदी के तट पर नवनिर्मित शारदा मंदिर को जनता के लिए खोल गया था।
इसका शुभारंभ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऑनलाइन किया था। गृहमंत्री ने उस दौरान ये भी कहा था कि केंद्र सरकार करतारपुर कॉरिडोर की तर्ज पर शारदा पीठ को खोलने की दिशा में काम करेगी।
पीओजेके के नजदीक स्थित इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पांच जून 2023 को श्रृंगेरी के दक्षिणमनाय श्री शारदा पीठम के 37वें प्रमुख जगद्गुरु श्रीश्री विधुशेखर भारती महास्वामी ने की थी। मंदिर खुलने के साथ ही क्षेत्र में रौनक बढ़ गई। पीओके के पास मंदिर में घंटियों की आवाज से दिनभर गूंजती है।
इस मंदिर की वास्तुकला और निर्माण शारदा पीठ के तत्वाधान में पौराणिक शास्त्रों के अनुसार किया गया है। कुपवाड़ा में मां शारदा के मंदिर का पुनर्निर्माण होना शारदा-सभ्यता की खोज व शारदा-लिपि के संवर्धन की दिशा में एक आवश्यक एवं महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
कब हुआ मंदिर का निर्माण
इस मंदिर का निर्माण कार्य पिछले साल ही शारदा यात्रा मंदिर समिति ने शुरू कराया था। इससे पहले समिति ने लगभग एक कनाल के भूखंड के सीमांकन के बाद 2 दिसंबर 2021 को भूमि पूजन किया था। जिस भूमि पर यह मंदिर बनाया गया है, उसे स्थानीय लोगों के सहयोग से वापस लिया गया था। इसमें धर्मशाला और एक गुरुद्वारा हुआ करता था।
इन्हें 1947 में कबायलियों ने जला दिया गया था और विभाजन के बाद 1948 में शारदा पीठ की तीर्थ यात्रा बंद कर दी गई थी। पिछले साल स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने धर्मशाला की जमीन कश्मीरी पंडितों को लौटाई थी और सेव शारदा सीमिति कश्मीर के सदस्यों ने जिला प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से यहां एक गुरुद्वारा, शारदा मंदिर और एक मस्जिद का निर्माण किया।