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प्रदेश के विभाजन और और चुनाव की घोषणा की अफवाहें
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में अर्धसैनिक बलों के करीब 6000 जवानों की वापसी के बाद बड़े पैमाने पर अफवाहों का दौर शुरू हो गया है। पिछले करीब तीन दिनों से प्रदेश के विभाजन से लेकर जिलों के पुनर्गठन के बाद चुनाव की घोषणा तक की अफवाहें सुनने को मिल रही हैं। पीपुल्स कांफ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन ने ट्वीट करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सभी अफवाहें अफवाह हैं।
अफवाहों का दौर तब शुरू हुआ जब लगभग 60 कंपनियां वापस लौटाना शुरू हुई। ये कंपनियां केंद्र शासित प्रदेश में 5 अगस्त 2019 से तैनात थीं, जिस दिन जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्ज को रद्द कर दिया गया और राज्य को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि ये अर्धसैनिक बलों की कंपनियां पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने स्टेशनों की ओर लौट रही हैं। हालांकि सैनिकों की आवाजाही और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की गृह मंत्री अमित शाह और शनिवार से दिल्ली में अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श ने अफवाहों को हवा दी।
इस बीच वर्तमान में जम्मू क्षेत्र का प्रभार संभाल रहे एडीजी मुकेश सिंह ने ट्विटर पर किसी भी तरह के बलों की नए सिरे से तैनाती से इंकार किया है, लेकिन उनके दावे को सोशल मीडिया पर कोई अहमियत नहीं मिली। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने जम्मू और कश्मीर के और बंटवारे की बात कही। यहां तक कह दिया गया कि जम्मू को राज्य का दर्जा दिया जाएगा और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रूप में रहेगा।
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वहीं इन सब अफवाहों के बीच कश्मीर के लोग लगातार फोन और इंटरनेट सेवाओं के बंद होने की संभावनाओं के बारे में पूछताछ करते हुए दिखे, क्योंकि जब 35 ए और अनुच्छेद 370 को लेकर बिल संसद में रखा गया था तब भी इस तरह के कदम उठाए गए थे। इस बीच अपनी पार्टी के चीफ अल्ताफ बुखारी और पीसी के सज्जाद गनी लोन के अचानक से दिल्ली जाने से इन अफवाहों में और तेजी आ गई। लोन शुक्रवार शाम दिल्ली से लौट आए और शनिवार को उन्होंने ट्वीट किया कि श्रीनगर में एक प्यारी सी सुबह उठा तो ट्विटर पर पता चला कि मैं दिल्ली में हूं और इन अटकलों को खारिज करने का प्रयास किया। कुछ राजनेता यह भी पूछते दिखे कि दोबारा से गिरफ्तारियों को लेकर एमएलए हॉस्टल की सफाई की रिपोर्ट क्या सही हैं।
इस बीच नेकां के नेता तनवीर सादिक ने भी ट्वीट कर लिखा, अफवाहों का दौर काफी तेज है, क्या हम दूसरे सेमेस्टर के लिए तैयार रहें। एमएलए हॉस्टल 2.0। बता दें कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र के बड़े फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर के लगभग सभी राजनेताओं को इस एमएलए हॉस्टल में बंद रखा गया था जोकि एक सब जेल बनाई गई थी।
इतना ही नहीं अर्धसैनिक बलों की वापसी को अमरनाथ जी यात्रा के साथ भी जोड़ा जा रहा है जोकि 28 जून से निर्धारित है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यात्रा कराई जाएगी या स्थगित की जाएगी।
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अफवाहों का दौर तब शुरू हुआ जब लगभग 60 कंपनियां वापस लौटाना शुरू हुई। ये कंपनियां केंद्र शासित प्रदेश में 5 अगस्त 2019 से तैनात थीं, जिस दिन जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्ज को रद्द कर दिया गया और राज्य को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि ये अर्धसैनिक बलों की कंपनियां पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने स्टेशनों की ओर लौट रही हैं। हालांकि सैनिकों की आवाजाही और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की गृह मंत्री अमित शाह और शनिवार से दिल्ली में अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श ने अफवाहों को हवा दी।
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इस बीच वर्तमान में जम्मू क्षेत्र का प्रभार संभाल रहे एडीजी मुकेश सिंह ने ट्विटर पर किसी भी तरह के बलों की नए सिरे से तैनाती से इंकार किया है, लेकिन उनके दावे को सोशल मीडिया पर कोई अहमियत नहीं मिली। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने जम्मू और कश्मीर के और बंटवारे की बात कही। यहां तक कह दिया गया कि जम्मू को राज्य का दर्जा दिया जाएगा और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रूप में रहेगा।
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वहीं इन सब अफवाहों के बीच कश्मीर के लोग लगातार फोन और इंटरनेट सेवाओं के बंद होने की संभावनाओं के बारे में पूछताछ करते हुए दिखे, क्योंकि जब 35 ए और अनुच्छेद 370 को लेकर बिल संसद में रखा गया था तब भी इस तरह के कदम उठाए गए थे। इस बीच अपनी पार्टी के चीफ अल्ताफ बुखारी और पीसी के सज्जाद गनी लोन के अचानक से दिल्ली जाने से इन अफवाहों में और तेजी आ गई। लोन शुक्रवार शाम दिल्ली से लौट आए और शनिवार को उन्होंने ट्वीट किया कि श्रीनगर में एक प्यारी सी सुबह उठा तो ट्विटर पर पता चला कि मैं दिल्ली में हूं और इन अटकलों को खारिज करने का प्रयास किया। कुछ राजनेता यह भी पूछते दिखे कि दोबारा से गिरफ्तारियों को लेकर एमएलए हॉस्टल की सफाई की रिपोर्ट क्या सही हैं।
इस बीच नेकां के नेता तनवीर सादिक ने भी ट्वीट कर लिखा, अफवाहों का दौर काफी तेज है, क्या हम दूसरे सेमेस्टर के लिए तैयार रहें। एमएलए हॉस्टल 2.0। बता दें कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र के बड़े फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर के लगभग सभी राजनेताओं को इस एमएलए हॉस्टल में बंद रखा गया था जोकि एक सब जेल बनाई गई थी।
इतना ही नहीं अर्धसैनिक बलों की वापसी को अमरनाथ जी यात्रा के साथ भी जोड़ा जा रहा है जोकि 28 जून से निर्धारित है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यात्रा कराई जाएगी या स्थगित की जाएगी।