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शोधार्थियों को पांच हार्ड कॉपी तैयार करने की बाध्यता समाप्त

Thu, 15 Oct 2020 09:39 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2020 09:39 PM IST
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Researchers are obliged to produce five hard copies
गढ़वाल विवि की विद्या परिषद ने शोध मूल्यांकन के लिए शोध ग्रंथ (थीसिस) की पांच हार्ड कॉपी तैयार करने की बाध्यता भी समाप्त कर दी है। अब शोधार्थियों की थीसिस की सॉफ्ट कॉपी ई मेल के माध्यम से विषय विशेषज्ञ को भेजी जाएगी। शोधार्थी को विवि में सिर्फ एक हार्ड कॉपी जमा करनी होगी, जो पुस्तकालय में संदर्भ के लिए संग्रहित की जाएगी। साथ ही मौखिक परीक्षा भी अब ऑनलाइन होगी।
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गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल की अध्यक्षता में विगत दस अक्तूबर को विद्या परिषद की हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण लिए गए। बृहस्पतिवार को विवि की ओर से संबंध में नोटिफिकेशन जारी किए गए। विवि के पीआरओ आशुतोष बहुगुणा ने बताया कि विद्या परिषद ने शोध मूल्यांकन हेतु शोध ग्रंथ (थीसिस) की 5 हार्ड कॉपी तैयार करने की बाध्यता भी समाप्त कर दी है। बताया कि विवि के इस निर्णय से धन और समय की बचत होगी। इसके अलावा उन्होंने बताया कि विद्या परिषद ने सहयोजित शैक्षिक उन्नयन एवं विकास में विशिष्ट ज्ञान रखने वाली पांच लोगों को सदस्य नामित किया है। इसमें उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विवि के कुलपति डा. हेमचंद्र पंत, सीएसआइआर-आईएचबीटी पालमपरु (हिमाचल प्रदेश) के निदेशक डा. संजय कुमार, स्वामी राम हिमालयन विवि जॉलीग्रांट (देहरादून ) के कुलपति डा. विजय धस्माना, कुमाऊं विवि नैनीताल में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. जेएस रावत और इंडिया काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च नई दिल्ली के सीनियर एकेडमिक फेलो डा. रविंद्र कोरिस्टर शामिल हैं।
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