श्रीनगर: गुलमर्ग के साथ पटनीटॉप को भी ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने का प्रस्ताव, मास्टर प्लान हो रहा तैयार
पटनीटॉप को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने ग्लोबली कॉम्पिटिटिव टूरिज्म डेस्टिनेशन योजना के तहत प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।
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पटनीटॉप को वैश्विक पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने कदम बढ़ाया है। पर्यटन मंत्रालय की ग्लोबली कंपेटिटिव टूरिज्म डेस्टिनेशन योजना के तहत पटनीटॉप को शामिल करने का प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए नया मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक सर्वे, भूमि की पहचान और हितधारकों के साथ परामर्श पूरा किया जा चुका है।
सदन में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दाैरान चिनैनी के विधायक बलवंत मनकोटिया के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आश्वस्त किया कि सरकार पटनीटॉप को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार के समक्ष इसका पक्ष मजबूती से रखा गया है। उमर ने कहा कि केंद्र सरकार और नीति आयोग की ओर से हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से केवल एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल का प्रस्ताव मांगा गया था। हालांकि जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक की जगह दो प्रस्ताव भेजे। सरकार ने कश्मीर से गुलमर्ग और जम्मू संभाग से पटनीटॉप को ग्लोबली कॉम्पिटिटिव टूरिज्म डेस्टिनेशन योजना के तहत विचार के लिए केंद्र को प्रस्तावित किया है। इस परियोजना के लिए केंद्र से अभी कोई राशि स्वीकृत या जारी नहीं हुई है। पर्यटन विभाग ने पटनीटॉप डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीडीए) समेत विभिन्न विकास प्राधिकरणों के मास्टर प्लान की समीक्षा और व्यापक संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है।
भवनों की अनुमतियां खारिज होने का मुद्दा भी उठा
मनकोटिया ने पीडीए क्षेत्र में आवासीय व व्यावसायिक भवनों की अनुमतियों के खारिज होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि 80 प्रतिशत आवेदनों को खारिज या लंबित रखा जा रहा है। सीएम ने भरोसा दिलाया कि बीओसीए प्रक्रियाओं और एकीकृत भवन उपनियम 2021 के नियमों की समीक्षा की जाएगी। अमरनाथ यात्रा ड्यूटी के कारण अधिकारियों की व्यस्तता से कुछ बैठकें समय पर नहीं हो सकी थीं, लेकिन अब लंबित मामलों का त्वरित निपटारा किया जाएगा ।
जम्मू के 496 गांवों में सेटलमेंट अधूरा
जम्मू जिले में 915 गांवों में से 496 में अभी सेटलमेंट पूरा नहीं हुआ है। सिर्फ 419 गांवों में सेटलमेंट पूरा हो सका है। पीडीपी विधायक वहीद उर रहमान पारा के सवाल के जवाब में सरकार ने विधानसभा में यह जानकारी दी। बताया कि पारंपरिक सेटलमेंट ऑपरेशन वर्ष 2014 में बंद कर दिया गया था और अब राजस्व रिकॉर्ड के रखरखाव, अद्यतन और डिजिटाइजेशन पर काम किया जा रहा है।
जम्मू संभाग में उधमपुर के 396 में से 174 और रामबन के 173 में से 80 गांवों में सेटलमेंट पूरा हुआ है। सांबा में 36, कठुआ में 30, रियासी में 26, राजोरी में 19 और डोडा में तीन गांवों में काम पूरा बताया गया है। किश्तवाड़ और पुंछ में एक भी गांव का सेटलमेंट पूरा नहीं हुआ। राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ी शिकायतों में भी जम्मू सबसे आगे है। जिले में मिली 962 शिकायतों में 778 का निपटारा हो चुका है, जबकि 184 मामले लंबित हैं। पूरे जम्मू-कश्मीर में 2601 शिकायतों में 1441 का निपटारा हुआ है। शेष मामलों को छह से आठ महीने में निपटाने की अनुमानित समयसीमा बताई गई है।
वर्तमान में सिर्फ बारामुला के तुज्जर पहलनू गांव में फ्रेश सेटलमेंट चल रहा है। सरकार के अनुसार इसे 2027 तक पूरा किया जाएगा। गलत राजस्व रिकॉर्ड को लैंड रेवेन्यू एक्ट की धारा 27 के तहत सक्षम अधिकारी केस-टू-केस आधार पर दुरुस्त करते हैं।