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जम्मू कश्मीर: घाटी में दम तोड़ रही पेपर माशी, 700 साल पुरानी शिल्पकला ऐसे पहुंची थी कश्मीर

Wed, 16 Aug 2023 11:33 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 16 Aug 2023 11:33 AM IST
सार

कश्मीर में इस कला को चैटिकाएम के नाम से जाना जाता है। इस कला से सैकड़ों कारिगर जुड़े हुए थे। लेकिन नकली कलाकृतियों के बढ़ते इस्तेमाल के चलते ज्यादातर ने इस कला को छोड़ दिया है।

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paper mache in Kashmir: 700 year old art of craft needs attention and wellwishers
Paper Mache in Kashmir - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

अनदेखी और नकली चीजों के बढ़ते इस्तेमाल से हजरत शाह-ए-हमदान (आरए) द्वारा कश्मीर (जन्नत) में लाई गई 700 साल पुरानी कला दम तोड़ने लगी है। पेपर माशी शिल्पकला के प्रति लोगों की कम समझ और खरीदार नहीं मिलने से कारिगर मायूस हैं। अधिकतर ने इस ऐतिहासिक शिल्पकला से दूरी बना ली है। लेकिन अभी भी कुछ हैं, जो बदलते कश्मीर और पर्यटकों की संख्या बढ़ने से शिल्पकला की दशा में बदलाव का इंतजार कर रहे हैं।

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श्रीनगर के नौपोरा इलाके के पेपर माशी कलाकार मोहम्मद यूनिस शाह (42) के अनुसार कश्मीर में इस कला को चैटिकाएम के नाम से जाना जाता है। इस कला से सैकड़ों कारिगर जुड़े हुए थे। लेकिन नकली कलाकृतियों के बढ़ते इस्तेमाल के चलते ज्यादातर ने इस कला को छोड़ दिया है। मौजूदा समय में पेपर माशी शिल्पकला के 13 कारिगर शामिल हैं। 
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हालांकि, पिछले कुछ महीनों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है। उम्मीद है कि आने वाले समय में बाजार बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि पर्यावरण अनुकूल होने के कारण विदेशी इसे बहुत पसंद करते हैं। फिलहाल, कुछ लोगों को प्रशिक्षण दे रहा हूं और इसे जारी रखूंगा।

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paper mache in Kashmir: 700 year old art of craft needs attention and wellwishers
Paper Mache in Kashmir - फोटो : बासित जरगर

यह है पेपर माशी और ऐसे बनाई जाती हैं कलाकृतियां

पेपर माशी एक प्राचीन शिल्प है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न रूपों के मुखौटे, खिलौने और कलाकृतियां आदि तैयार करने के लिए किया जाता है। यह पेपर लुगदी से बनी एक निर्माण सामग्री है, जिसमें अखबार या अपशिष्ट पेपर, मुल्तानी मिट्टी, मेथी पाउडर (सुगंध और कीड़ों से सुरक्षा के लिए), गोंद और पानी का इस्तेमाल किया जाता है। 

सबसे पहले, कागज मुख्यतः पेपर को लगभग एक हफ्ते के लिए पानी में भिगोया जाता है। पानी में गलने एवं विघटित होने के बाद इसका पेस्ट में बनाया जाता है। 24 घंटे के लिए पानी में भिगोई मुतानी मिट्टी में गोंद को मिला कागज की लुग्दी के मिलाकर कई आकृतियां बनाई जाती हैं। पूरी प्रक्रिया हाथ से की जाती है और अंत में इस आकृतियों को धूप में सुखाया जाता है। इसके बाद इसे पूर्ण रूप देने के लिए चित्रकारी की जाती है।

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