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सीएम उमर अब्दुल्ला की पहल रंग लाई: कश्मीर में मटन संकट खत्म, पंजाब सरकार ने पशुधन वाहनों से हटाया टैक्स

Sat, 04 Jul 2026 12:45 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर
अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Sat, 04 Jul 2026 12:45 PM IST
सार

पंजाब सरकार ने कश्मीर जाने वाले पशुधन वाहनों पर लगाया गया विवादित टैक्स वापस ले लिया है, जिससे घाटी में मटन संकट समाप्त हो गया और आपूर्ति सामान्य होने का रास्ता साफ हो गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की दखल और मटन कारोबारियों के लगातार प्रयासों के बाद यह फैसला लिया गया।

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Mutton crisis in Kashmir ends Punjab government waives tax on vehicles.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला - फोटो : एजेंसी

विस्तार

पंजाब सरकार की ओर से कश्मीर जाने वाले पशुधन वाहनों पर लगाया गया टैक्स हटाए जाने के बाद कश्मीर में मटन संकट खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की दखल के बाद पंजाब सरकार ने यह टैक्स वापस लिया है।

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ऑल कश्मीर होलसेल एंड रिटेल मटन डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष खजीर मोहम्मद रेगू ने शुक्रवार को बताया कि पंजाब में कश्मीरी मटन कारोबारियों के वाहनों पर लगाए गए टैक्स का विवाद सुलझ गया है। रेगू ने कहा पंजाब प्रशासन ने लेवी वापस ले ली है जिससे मामला सुलझ गया। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन ने एक समन्वय समिति बनाई थी जो पिछले 10 दिनों से पंजाब में डेरा डाले हुए थी और वहां की सरकार के साथ मुद्दा उठा रही थी। रेगू ने कहा समन्वय समिति के सदस्य 10 दिन से पंजाब में थे। उन्होंने वहां सरकार के कई लोगों से मुलाकात की। आखिरकार, शुक्र है कि वहां की सरकार ने समझा कि यह अवैध टैक्स था और उन्होंने इसे रद्द कर दिया। उन्होंने इस मुद्दे पर समर्थन के लिए नेताओं, लोगों और मीडिया का आभार जताया। 

उमर ने पंजाब के सीएम से की थी बातकारोबारियों ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और घाटी के अन्य नेताओं के सामने भी उठाया था। मुख्यमंत्री ने सोमवार को बताया था कि उन्होंने मटन डीलरों की चिंताओं को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने रखा और पड़ोसी राज्य से पशुधन वाहनों की सुचारु आवाजाही के लिए दखल मांगा था। अब्दुल्ला ने मान को बताया था कि जम्मू-कश्मीर जाने वाले पशुधन से लदे वाहनों को कथित तौर पर पशु मेलों से जुड़े कुछ ठेकेदार समूह रोक रहे थे और सभी वैध परमिट और दस्तावेज होने के बावजूद अवैध वसूली कर रहे थे। अब्दुल्ला ने कहा था मैंने यह मुद्दा पंजाब सरकार के साथ उठाया है और पंजाब से पशुधन वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही के लिए तत्काल दखल मांगा है। उन्होंने कहा वे सिर्फ हाईवे का इस्तेमाल कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के मटन डीलरों पर अनधिकृत लेवी लगाने का कोई औचित्य नहीं है।

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पत्र लिखकर जताई थी चिंता
मुख्यमंत्री ने पिछले हफ्ते मान को लिखे पत्र को सोशल मीडिया पर भी साझा किया था। पत्र में उन्होंने लिखा कि ऐसी रुकावटों से न सिर्फ देरी होती है, बल्कि ट्रांसपोर्टरों को वित्तीय नुकसान और परेशानी भी होती है, जिससे पशु कल्याण पर भी असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि कश्मीर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग एक आंतरिक समिति के जरिए मामले की जांच कर रहा था। निष्कर्ष बताते हैं कि ट्रांसपोर्टरों को कथित तौर पर पारगमन के दौरान बिना किसी कानूनी मंजूरी के प्रति वाहन भारी भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

अब्दुल्ला ने लिखा समिति ने आगे पाया कि पशुधन आवाजाही जीएसटी से मुक्त है और ऐसे शुल्कों का लगातार लगाया जाना पशुधन व्यापार पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है, जिसका जम्मू-कश्मीर में मांस की कीमतों और उपभोक्ताओं पर असर पड़ रहा है। उन्होंने मान को याद दिलाया कि पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच दोस्ती, सहयोग और आर्थिक परस्पर निर्भरता के लंबे समय से संबंध हैं। उन्होंने लिखा ऐसी कोई भी प्रथा अगर हो रही है, तो हमारे बीच पारंपरिक रूप से रहे सहयोग की भावना के विपरीत है और इसने व्यापारिक समुदाय में समझदारी से चिंता पैदा की है।

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