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हिल काउंसिल चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी : आरपी सिंह
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आर.पी. सिंह लेह में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए।स्रोत - संवाद।
- भाजपा प्रवक्ता ने महिला आरक्षण विधेयक रोकने का विपक्ष पर लगाया आरोप, बोले-2029 तक 33% कोटा लागू करने के लक्ष्य पर पार्टी कायम
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। भाजपा के प्रवक्ता आरपी सिंह ने रविवार को विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण विधेयक में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने 2029 तक महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हिल काउंसिल चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने की तैयारियां जारी हैं।
लेह में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान सिंह ने कहा कि नारी वंदन अधिनियम के नाम से प्रसिद्ध यह कानून वर्ष 2023 में पारित किया गया था जिसने लद्दाख की हिल काउंसिल में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि आगामी परिषद चुनावों से पहले परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने राजनीतिक कारणों से इसका विरोध किया।
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सांविधानिक प्रावधानों की व्याख्या करते हुए सिंह ने कहा कि अधिनियम की धारा 334ए के तहत परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू किया जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकेत दिया है कि राज्यों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय चिंताओं को दूर करने के लिए संसदीय सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने धर्म आधारित आरक्षण की मांगों को भी खारिज करते हुए कहा कि संविधान इसकी अनुमति नहीं देता।
लद्दाख का उल्लेख करते हुए सिंह ने संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए पंचायत चुनावों से पहले परिसीमन पूरा करने पर जोर दिया। विपक्षी दलों पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई बड़े सुधारों का विरोध किया है। उन्होंने दोहराया कि सरकार विधेयक के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने के प्रयास जारी रखेगी।
अपने संबोधन के समापन पर सिंह ने कहा कि केंद्र महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और विश्वास जताया कि यह कानून वर्ष 2029 तक पूरी तरह लागू हो जाएगा। उन्होंने इसे समावेशी शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। भाजपा के प्रवक्ता आरपी सिंह ने रविवार को विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण विधेयक में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने 2029 तक महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हिल काउंसिल चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने की तैयारियां जारी हैं।
लेह में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान सिंह ने कहा कि नारी वंदन अधिनियम के नाम से प्रसिद्ध यह कानून वर्ष 2023 में पारित किया गया था जिसने लद्दाख की हिल काउंसिल में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि आगामी परिषद चुनावों से पहले परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
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सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने राजनीतिक कारणों से इसका विरोध किया।
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सांविधानिक प्रावधानों की व्याख्या करते हुए सिंह ने कहा कि अधिनियम की धारा 334ए के तहत परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू किया जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकेत दिया है कि राज्यों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय चिंताओं को दूर करने के लिए संसदीय सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने धर्म आधारित आरक्षण की मांगों को भी खारिज करते हुए कहा कि संविधान इसकी अनुमति नहीं देता।
लद्दाख का उल्लेख करते हुए सिंह ने संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए पंचायत चुनावों से पहले परिसीमन पूरा करने पर जोर दिया। विपक्षी दलों पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई बड़े सुधारों का विरोध किया है। उन्होंने दोहराया कि सरकार विधेयक के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने के प्रयास जारी रखेगी।
अपने संबोधन के समापन पर सिंह ने कहा कि केंद्र महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और विश्वास जताया कि यह कानून वर्ष 2029 तक पूरी तरह लागू हो जाएगा। उन्होंने इसे समावेशी शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।