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Srinagar News: लद्दाख की प्रमुख प्राथमिकताओं पर केंद्रीय गृह मंत्री के साथ की चर्चा
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लद्दाख की प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा के लिए अधिवक्ता ताशी ग्यालसन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता ताशी ग्यालसन ने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से जुड़े कई महत्वपूर्ण विकासात्मक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के दौरान उन्होंने लद्दाख के उपराज्यपाल को वित्तीय शक्तियों के विस्तार संबंधी गृह मंत्रालय के हालिया निर्णय के लिए सराहना की। उन्होंने इसे प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और केंद्र शासित प्रदेश में शासन व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस दौरान लद्दाख के दीर्घकालिक विकास और प्रभावी प्रशासन से जुड़े कई अहम मुद्दों को उठाया गया। उन्होंने उच्चस्तरीय समिति की अगली बैठक की शीघ्र अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया।
प्रशासनिक पुनर्गठन के संदर्भ में उन्होंने जांस्कर, नुब्रा, चांगथांग, शाम और द्रास जैसे नवगठित जिलों की औपचारिक अधिसूचना जारी कर उन्हें शीघ्र क्रियाशील बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन जिलों के संचालन से दूर-दराज क्षेत्रों में स्थानीय शासन और सेवाओं की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार होगा।
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ग्यालसन ने विशेष विकास पैकेज के साथ-साथ राज्य क्षेत्र एवं जिला कैपेक्स निधि को लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह और कारगिल के लिए तत्काल जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि समय पर वित्तीय सहायता से लंबित देनदारियों का निपटान होगा और चल रही विकास परियोजनाओं में बाधा नहीं आएगी।
पर्यावरण और आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ताशी ग्यालसन ने चांगथांग और नुब्रा वन्यजीव अभयारण्यों की सीमाओं के युक्तिकरण पर शीघ्र समाधान की मांग की, ताकि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
श्रमिक कल्याण के मुद्दे पर उन्होंने दैनिक वेतनभोगियों की मजदूरी में वृद्धि और विभिन्न विभागों में कार्यरत पहले से वंचित दैनिक वेतन कर्मियों को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के लाभ प्रदान करने की मांग रखी।
शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में ताशी ग्यालसन ने कृषि विज्ञान केंद्रों को शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय-कश्मीर से लद्दाख विश्वविद्यालय में शीघ्र हस्तांतरित करने तथा केवीके में रिक्त पदों का विज्ञापन कर उन्हें लद्दाख आरक्षण नियमों के अनुसार भरने की पैरवी की।
उन्होंने सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े विषय भी उठाए और लद्दाखी कलाकृतियों, कला और अभिलेखों को जम्मू-कश्मीर से लद्दाख वापस लाने में गृह मंत्रालय से सहायता का अनुरोध किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि उठाए गए मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाएगा।
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लेह। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता ताशी ग्यालसन ने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से जुड़े कई महत्वपूर्ण विकासात्मक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के दौरान उन्होंने लद्दाख के उपराज्यपाल को वित्तीय शक्तियों के विस्तार संबंधी गृह मंत्रालय के हालिया निर्णय के लिए सराहना की। उन्होंने इसे प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और केंद्र शासित प्रदेश में शासन व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस दौरान लद्दाख के दीर्घकालिक विकास और प्रभावी प्रशासन से जुड़े कई अहम मुद्दों को उठाया गया। उन्होंने उच्चस्तरीय समिति की अगली बैठक की शीघ्र अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया।
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प्रशासनिक पुनर्गठन के संदर्भ में उन्होंने जांस्कर, नुब्रा, चांगथांग, शाम और द्रास जैसे नवगठित जिलों की औपचारिक अधिसूचना जारी कर उन्हें शीघ्र क्रियाशील बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन जिलों के संचालन से दूर-दराज क्षेत्रों में स्थानीय शासन और सेवाओं की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार होगा।
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ग्यालसन ने विशेष विकास पैकेज के साथ-साथ राज्य क्षेत्र एवं जिला कैपेक्स निधि को लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह और कारगिल के लिए तत्काल जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि समय पर वित्तीय सहायता से लंबित देनदारियों का निपटान होगा और चल रही विकास परियोजनाओं में बाधा नहीं आएगी।
पर्यावरण और आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ताशी ग्यालसन ने चांगथांग और नुब्रा वन्यजीव अभयारण्यों की सीमाओं के युक्तिकरण पर शीघ्र समाधान की मांग की, ताकि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
श्रमिक कल्याण के मुद्दे पर उन्होंने दैनिक वेतनभोगियों की मजदूरी में वृद्धि और विभिन्न विभागों में कार्यरत पहले से वंचित दैनिक वेतन कर्मियों को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के लाभ प्रदान करने की मांग रखी।
शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में ताशी ग्यालसन ने कृषि विज्ञान केंद्रों को शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय-कश्मीर से लद्दाख विश्वविद्यालय में शीघ्र हस्तांतरित करने तथा केवीके में रिक्त पदों का विज्ञापन कर उन्हें लद्दाख आरक्षण नियमों के अनुसार भरने की पैरवी की।
उन्होंने सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े विषय भी उठाए और लद्दाखी कलाकृतियों, कला और अभिलेखों को जम्मू-कश्मीर से लद्दाख वापस लाने में गृह मंत्रालय से सहायता का अनुरोध किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि उठाए गए मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाएगा।