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कश्मीरी केसर उद्योग को मिलेगी नई उड़ान: केसरबॉट से बदलेगी कश्मीरी केसर की खेती, संवरेगी रंगत

Fri, 06 Nov 2026 09:27 AM IST
Akash Dubey अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: Akash Dubey Updated Fri, 06 Nov 2026 09:27 AM IST
सार

कश्मीरी केसर की खेती को समृद्ध करने के लिए स्कॉस्ट-के ने पांपोर में केसरबॉट का सफल परीक्षण किया है। यह रोबोटिक तकनीक फूलों की कटाई और रेशे अलग करने में श्रमिकों की कमी दूर करेगी। केसर का उत्पादन और खेती का रकबा घट रहा है।

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KesarBot to transform Kashmiri saffron cultivation
केसर (फाइल फोटो) - फोटो : @lg_ladakh

विस्तार

दुनियाभर में अपनी खुशबू और रंग के लिए मशहूर कश्मीरी केसर की खेती को समृद्ध करने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। केसर की खेती के लिए प्रसिद्ध पांपोर में किसानों की श्रम संबंधी दिक्कतों और घटते उत्पादन के बीच शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्कॉस्ट-के) ने आधुनिक केसरबॉट (एग्रीबॉट) का सफल परीक्षण किया है।

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स्कॉस्ट ने किया एग्रीबॉट का सफल परीक्षण
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से विकसित इस रोबोटिक तकनीक से केसर के फूलों की कटाई से लेकर रेशे अलग करने तक का काम आसान होगा। केसर की खेती में सबसे बड़ी चुनौती फूलों की सीमित अवधि में कटाई है। फूल खिलने के महज 15 दिनों के भीतर उनकी तुड़ाई करनी होती है। इस दौरान कुशल श्रमिकों की उपलब्धता बड़ी समस्या बन जाती है। ऐसे में एग्रीबॉट वरदान साबित होगा।

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घटते उत्पादन और रकबे ने बढ़ाई चिंता
आंकड़ों के मुताबिक कश्मीरी केसर उद्योग चुनौतियों का सामना कर रहा है। वर्ष 2021 में केसर का उत्पादन 17.33 मीट्रिक टन था, जो 2022 में घटकर 14.87 मीट्रिक टन रह गया। 2023 में यह 14.94 मीट्रिक टन दर्ज किया गया। वहीं, खेती का रकबा भी पहले के 5,700 हेक्टेयर से अधिक के स्तर से घटकर करीब 3,700 हेक्टेयर रह गया है।

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वैश्विक स्तर पर पहली बार ऐसा नवाचार
परियोजना से जुड़ीं वरिष्ठ वैज्ञानिक सुनीता वर्मा कहती हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, स्कॉस्ट और सी-डैक कोलकाता मिलकर केसर की स्वचालित और रोबोटिक कटाई की तकनीक विकसित कर रहे हैं। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला नवाचार है। इस तकनीक से श्रमिकों की कमी दूर हो सकेगी।

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