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श्रीनगर: 1987 के चुनावों में धांधली का दंश आज भी झेल रहा कश्मीर, वहीद पर्रा ने उठाई जवाबदेही की मांग

Mon, 12 Oct 2026 11:51 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर
अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर Published by: Nikita Gupta Updated Mon, 12 Oct 2026 11:51 AM IST
सार

पीडीपी नेता वहीद पर्रा ने 1987 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में धांधली को कश्मीर में उग्रवाद के उभार का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि यहां के लोग आज भी इसके दुष्परिणाम झेल रहे हैं।

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Kashmir still bears the scars of the rigged 1987 elections.
पीडीपी नेता वहीद पर्रा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार
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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता वहीद पर्रा ने लोकतंत्र और निष्पक्षता के लिए आवाज उठा रहे युवाओं का समर्थन करते हुए कहा है कि भारतीय युवा आज नफरत की राजनीति को नकार कर लोकतंत्र की आत्मा को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कश्मीर ने चुनावी धांधली का दर्द सबसे पहले झेला है और आज पूरा देश जिस चुनावी पारदर्शिता की बात कर रहा है, उसे कश्मीर 1987 से भुगतता आ रहा है।

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पर्रा ने कहा कि 1987 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में हुई भारी धांधली की वजह से राज्य में उग्रवाद का दौर शुरू हुआ, जिसमें अब तक लगभग एक लाख लोगों ने अपनी जानें गंवाई हैं। उस दौर की युवा पीढ़ी, जिसमें यासीन मलिक और बडगाम से उम्मीदवार रहे मोहम्मद यूसुफ शाह शामिल थे, ने निष्पक्ष चुनाव और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए थे, लेकिन जब लोकतांत्रिक रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए और असंतोष को दबाया गया, तो उसके गंभीर परिणाम के रूप में आतंकवाद पनपा और उम्मीदवारों को सलाहुद्दीन जैसी राह पर धकेल दिया गया।

उन्होंने कहा कि कश्मीरी अवाम से बेहतर लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की अहमियत कोई नहीं समझ सकता क्योंकि यहां के लोगों ने लोकतांत्रिक अधिकारों के छिनने की भारी कीमत चुकाई है। 1987 से लेकर अब तक जब भी यहां के युवाओं ने निष्पक्ष चुनाव और अपने अधिकारों की मांग की, उन्हें देशद्रोही करार देकर दबाने की कोशिश की गई।

वहीद पर्रा ने केंद्र सरकार से ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने और 1987 के चुनाव में हुई वोट चोरी के लिए माफी मांगने की बात दोहराते हुए कहा कि कश्मीर के लोगों को लोकतांत्रिक आजादी और सहानुभूति मिलनी चाहिए।

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