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लोकतंत्र और सुशासन के लिए मजबूत विपक्ष का होना बेहद जरूरी : फारूक
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि सुशासन और प्रभावी प्रशासन के लिए एक मजबूत, सक्रिय और सशक्त विपक्ष का होना अनिवार्य है जो जनता की शिकायतों को उजागर कर सके और सरकार को जवाबदेह बना सके।
श्रीनगर में दिए गए अपने बयान में डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल आलोचना तक सीमित नहीं होती। इसमें जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करना, सरकारी नीतियों की समीक्षा करना और सांविधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाना, असहमति को सहन न करना और लोगों को उनकी जायज मांगें उठाने से रोकना लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर करता है और सुशासन के दावों को अर्थहीन बना देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अलग-अलग विचारों के सम्मान और संस्थागत जवाबदेही पर टिकी होती है।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए डॉ. फारूक ने कहा कि आज देश की राजधानी में जनता की आवाज को दबाने के लिए जिस तरह के दबाव और दमनकारी तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह कश्मीर के लोगों द्वारा वर्षों से झेले गए रवैये की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि आवाजें दबाने और असहमति को रोकने से समस्याएं हल नहीं होतीं, बल्कि जनता और सत्ता में बैठे लोगों के बीच की खाई और चौड़ी होती है।
लोकतंत्र की मजबूती पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वोट जनता द्वारा दिया गया एक अनमोल भरोसा है और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने दोहराया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर के लोगों के सांविधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कभी समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी लोगों के वैध अधिकारों की रक्षा करने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली के लिए अपने प्रयास लगातार जारी रखेगी।
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श्रीनगर में दिए गए अपने बयान में डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल आलोचना तक सीमित नहीं होती। इसमें जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करना, सरकारी नीतियों की समीक्षा करना और सांविधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना भी शामिल है।
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उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाना, असहमति को सहन न करना और लोगों को उनकी जायज मांगें उठाने से रोकना लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर करता है और सुशासन के दावों को अर्थहीन बना देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अलग-अलग विचारों के सम्मान और संस्थागत जवाबदेही पर टिकी होती है।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए डॉ. फारूक ने कहा कि आज देश की राजधानी में जनता की आवाज को दबाने के लिए जिस तरह के दबाव और दमनकारी तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह कश्मीर के लोगों द्वारा वर्षों से झेले गए रवैये की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि आवाजें दबाने और असहमति को रोकने से समस्याएं हल नहीं होतीं, बल्कि जनता और सत्ता में बैठे लोगों के बीच की खाई और चौड़ी होती है।
लोकतंत्र की मजबूती पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वोट जनता द्वारा दिया गया एक अनमोल भरोसा है और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने दोहराया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर के लोगों के सांविधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कभी समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी लोगों के वैध अधिकारों की रक्षा करने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली के लिए अपने प्रयास लगातार जारी रखेगी।