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Srinagar News: पांपोर के केसर खेतों पर साही का हमला, किसानों ने जताई फसल खत्म होने की आशंका
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पांपोर में केसर चुनता किसान।
- फोटो : pulwama news
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पुलवामा। दक्षिण कश्मीर के पांपोर क्षेत्र में केसर की खेती करने वाले किसान इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। किसानों का कहना है कि साही के लगातार हमलों से केसर के खेतों को भारी नुकसान हो रहा है। इससे उनकी आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है।
किसानों के अनुसार यह समस्या पातलबाग, चंदहारा, खोनिबल और लेथपोरा जैसे कई केसर उत्पादक इलाकों में फैल चुकी है। रात के समय साही खेतों में घुसकर जमीन खोदते हैं और केसर के बीज खा जाते हैं। इससे फसल बर्बाद हो रही है और आने वाले मौसम की पैदावार पर भी असर पड़ रहा है।
किसानों ने बताया कि साही खेतों में खुदाई करके केसर के बीज खा जाते हैं जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान होता है और भविष्य की पैदावार पर बुरा असर पड़ता है। हमने सब कुछ आजमा लिया है - खेतों में पुतले लगाए, प्लास्टिक की बाड़ लगाई लेकिन वे फिर भी रात में आते हैं और खेतों को बर्बाद कर देते हैं। बागवानी विभाग द्वारा दिए गए कीटनाशकों से केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिली है। साही कुछ ही दिनों में वापस आ जाते हैं और नुकसान पहुंचाना जारी रखते हैं।
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एक किसान ने कहा, रसायनों का इस्तेमाल करने के बाद वे कुछ समय के लिए तो गायब हो जाते हैं, लेकिन फिर वापस आ जाते हैं। इसका कोई स्थायी समाधान नहीं है। किसानों ने चेतावनी दी है कि केसर की खेती वाली जमीन का एक बड़ा हिस्सा अब इस समस्या से प्रभावित है। लगातार हो रहे नुकसान के कारण इस इलाके में केसर की खेती के लंबे समय तक टिके रहने पर भी आशंकाएं पैदा हो गई हैं।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह इस वन्यजीव खतरे को नियंत्रित करने और फसल को बचाने के लिए कोई स्थायी समाधान करे। अगर यही चलता रहा तो पांपोर के केसर के खेत पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे।
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किसानों के अनुसार यह समस्या पातलबाग, चंदहारा, खोनिबल और लेथपोरा जैसे कई केसर उत्पादक इलाकों में फैल चुकी है। रात के समय साही खेतों में घुसकर जमीन खोदते हैं और केसर के बीज खा जाते हैं। इससे फसल बर्बाद हो रही है और आने वाले मौसम की पैदावार पर भी असर पड़ रहा है।
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किसानों ने बताया कि साही खेतों में खुदाई करके केसर के बीज खा जाते हैं जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान होता है और भविष्य की पैदावार पर बुरा असर पड़ता है। हमने सब कुछ आजमा लिया है - खेतों में पुतले लगाए, प्लास्टिक की बाड़ लगाई लेकिन वे फिर भी रात में आते हैं और खेतों को बर्बाद कर देते हैं। बागवानी विभाग द्वारा दिए गए कीटनाशकों से केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिली है। साही कुछ ही दिनों में वापस आ जाते हैं और नुकसान पहुंचाना जारी रखते हैं।
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एक किसान ने कहा, रसायनों का इस्तेमाल करने के बाद वे कुछ समय के लिए तो गायब हो जाते हैं, लेकिन फिर वापस आ जाते हैं। इसका कोई स्थायी समाधान नहीं है। किसानों ने चेतावनी दी है कि केसर की खेती वाली जमीन का एक बड़ा हिस्सा अब इस समस्या से प्रभावित है। लगातार हो रहे नुकसान के कारण इस इलाके में केसर की खेती के लंबे समय तक टिके रहने पर भी आशंकाएं पैदा हो गई हैं।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह इस वन्यजीव खतरे को नियंत्रित करने और फसल को बचाने के लिए कोई स्थायी समाधान करे। अगर यही चलता रहा तो पांपोर के केसर के खेत पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे।