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Srinagar News: जीएमसी में हर दिन पहुंच रहे औसतन 4-5 कैंसर रोगी
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में कैंसर का बढ़ता बोझ एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन गया है। वर्ष 2017 से गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) श्रीनगर के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट में लगभग 10,000 मरीज पंजीकृत हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अस्पताल में 1558 मामले पंजीकृत हुए थे। इससे पता चलता है कि यह ट्रेंड बढ़ता ही जा रहा है।
आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि पिछले नौ सालों में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017 में 491 मामले पंजीकृत हुए, उसके बाद 2018 में 1032, 2019 में 801, 2020 में 650, 2021 में 1010, 2022 में 1,169, 2023 में 1,640, 2024 में 1,659 और 2025 में 1,558 मामले पंजीकृत हुए। अधिकारियों ने कहा कि अस्पताल में हर दिन औसतन चार से पांच नए कैंसर मरीज़ पंजीकृत हो रहे हैं जो ऑन्कोलॉजी सर्विसेज पर बढ़ते दबाव को दिखाता है। श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह (एसएमएचएस) अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के एक ऑन्कोलॉजिस्ट ने स्थिति को बहुत चिंताजनक बताया।
उन्होंने कहा कि पूरे जम्मू-कश्मीर में कैंसर के नए मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। पुरुषों में सबसे आम ट्यूमर लंग कैंसर है जबकि महिलाओं में यह ब्रेस्ट कैंसर है।
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डॉक्टर ने चेतावनी दी कि लंग कैंसर के ज्यादा मामले सीधे तौर पर तंबाकू के इस्तेमाल से जुड़े हैं। हमें इसके खतरों के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने की कितनी जरूरत है। ब्रेस्ट कैंसर पर डॉक्टर ने जीवन शैली से जुड़े कारणों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता मोटापा इसके मुख्य कारणों में से हैं।
डॉक्टरों ने लोगों को शुरुआती चेतावनी के संकेतों और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी देने की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को कैंसर के लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए, समय पर मेडिकल जांच करवानी चाहिए और जीवन शैली में बदलाव करने चाहिए। जल्दी पता चलने से बचने और इलाज के नतीजों में काफी सुधार होता है। बढ़ते केस लोड के बावजूद डिपार्टमेंट अभी कई तरह की मॉडर्न रेडिएशन थेरेपी देता है जिनमें शामिल इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी (आईएमआरटी), इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी (आईजीआरटी), स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी (एसबीआरटी), वॉल्यूमेट्रिक मॉड्यूलेटेड आर्क थेरेपी (वीएमएटी), ब्रैकीथेरेपी और सीटी सिमुलेशन सर्विस शामिल हैं। अस्पताल में समर्पित डेडिकेटेड इनपेशेंट वार्ड, डे-केयर कीमोथेरेपी फैसिलिटी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन यूनिट और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए स्पेशल केयर भी है। ऑन्कोलॉजिस्ट ने कहा कि यहां बड़ों और बच्चों में सभी तरह के ट्यूमर का अच्छे से इलाज किया जा रहा है।
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आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि पिछले नौ सालों में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017 में 491 मामले पंजीकृत हुए, उसके बाद 2018 में 1032, 2019 में 801, 2020 में 650, 2021 में 1010, 2022 में 1,169, 2023 में 1,640, 2024 में 1,659 और 2025 में 1,558 मामले पंजीकृत हुए। अधिकारियों ने कहा कि अस्पताल में हर दिन औसतन चार से पांच नए कैंसर मरीज़ पंजीकृत हो रहे हैं जो ऑन्कोलॉजी सर्विसेज पर बढ़ते दबाव को दिखाता है। श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह (एसएमएचएस) अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के एक ऑन्कोलॉजिस्ट ने स्थिति को बहुत चिंताजनक बताया।
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उन्होंने कहा कि पूरे जम्मू-कश्मीर में कैंसर के नए मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। पुरुषों में सबसे आम ट्यूमर लंग कैंसर है जबकि महिलाओं में यह ब्रेस्ट कैंसर है।
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डॉक्टर ने चेतावनी दी कि लंग कैंसर के ज्यादा मामले सीधे तौर पर तंबाकू के इस्तेमाल से जुड़े हैं। हमें इसके खतरों के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने की कितनी जरूरत है। ब्रेस्ट कैंसर पर डॉक्टर ने जीवन शैली से जुड़े कारणों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता मोटापा इसके मुख्य कारणों में से हैं।
डॉक्टरों ने लोगों को शुरुआती चेतावनी के संकेतों और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी देने की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को कैंसर के लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए, समय पर मेडिकल जांच करवानी चाहिए और जीवन शैली में बदलाव करने चाहिए। जल्दी पता चलने से बचने और इलाज के नतीजों में काफी सुधार होता है। बढ़ते केस लोड के बावजूद डिपार्टमेंट अभी कई तरह की मॉडर्न रेडिएशन थेरेपी देता है जिनमें शामिल इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी (आईएमआरटी), इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी (आईजीआरटी), स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी (एसबीआरटी), वॉल्यूमेट्रिक मॉड्यूलेटेड आर्क थेरेपी (वीएमएटी), ब्रैकीथेरेपी और सीटी सिमुलेशन सर्विस शामिल हैं। अस्पताल में समर्पित डेडिकेटेड इनपेशेंट वार्ड, डे-केयर कीमोथेरेपी फैसिलिटी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन यूनिट और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए स्पेशल केयर भी है। ऑन्कोलॉजिस्ट ने कहा कि यहां बड़ों और बच्चों में सभी तरह के ट्यूमर का अच्छे से इलाज किया जा रहा है।