फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   jammu kashmir news

भीतरी शांति का पाठ नहीं पढ़ाती आधुनिक शिक्षा : दलाईलामा

विज्ञापन
jammu kashmir news
लेह/जम्मू। तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि आधुनिक शिक्षा हमें भीतरी शांति का पाठ नहीं पढ़ाती। शिक्षा में यह बड़ी खामी है, जिसे दूर करने के लिए प्राचीन और पारंपरिक मूल्यों को समाहित करना होगा। वे जल्द ही जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के शिक्षकों से इस पर चर्चा कर अपने सुझाव देंगे। दलाईलामा मंगलवार को लेह के शे गांव में स्थित शाह-ए-हमदान मस्जिद शरीफ में मुस्लिम समुदाय के लोगों को संबोधित कर रहे थे।
विज्ञापन

लेह में मुस्लिम समन्वय समिति के निमंत्रण पर कार्यक्रम में पहुंचे दलाईलामा ने मुस्लिम टोपी पहनकर संबोधन किया। धर्मगुरु ने कहा कि भारतीय परंपरा में करुणा का बड़ा महत्व है। करुणा किसी धर्म से जुड़ा शब्द नहीं है। यह पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है। उन्होंने - मेरा निष्कर्ष है कि सात अरब की पूरी दुनिया जीवन में शांति और प्रेम चाहती है, लेकिन भीतर से मन अशांत है। इसी मन से टकराव और विवाद की शुरुआत होती है। लद्दाख दौरे पर आए धर्मगुरु ने पिछले एक माह में दूसरी बार मस्जिद में जाकर मुस्लिम समुदाय को संबोधित किया।
विज्ञापन

---
क्रूर है साम्यवादी चीन, इस
पर मैं क्रोधित नहीं चिंतित हूं
धर्मगुरु ने कहा कि हमारे भीतर शांति है तो बाहरी हालात प्रभावित नहीं करते। उन्होंने कहा कि साम्यवादी चीन क्रूर है, लेकिन चीन पर मैं क्रोधित नहीं बल्कि उसके प्रति मैं चिंतित जरूर हूं। इस तरह से देखा जाए तो हमारे दुश्मन भी हमें बेहतर बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

---
तिब्बती मुस्लिमों से मिलता
था महात्मा गांधी का संदेश
दलाईलामा ने कहा - मेरा बचपन पूर्वोत्तर तिब्बत में गुजरा। वहां मुस्लिम परिवार भी थे। उनकी प्रार्थनाएं सुनने को मिलती रहीं। ल्हासा में गए तो वहां भी मुस्लिम कारोबारी कुनबे रहते थे। वे अकसर कुछ सामान लेने भारत जाया करते थे। भारत में महात्मा गांधी के अहिंसा से प्रेरित आंदोलन की खबरें इन्हीं मुस्लिम लोगाें से मिलती थी। तिब्बत में बैठकर हमें शांति का पैगाम मिलता रहा। हमें महात्मा गांधी की गतिविधियों के बारे में जानने की उत्सुकता रहती थी। दलाईलामा ने कहा कि तिब्बती मुस्लिम हमेशा से शांति प्रिय ही रहे। हिमालय क्षेत्र में बौद्धों और मुस्लिमों ने धार्मिक सौहार्द की इस परंपरा को आज भी संजोकर रखा है।

---
ध्यान के साथ अध्ययन भी जरूरी
संवाद सत्र के दौरान निर्वाण प्राप्ति से संबंधित सवाल पर धर्मगुरु ने कहा कि सिर्फ ध्यान से निर्वाण नहीं मिलता। इसके लिए बहुत सारा अध्ययन जरूरी है। अध्ययन हमारे विचारों को प्रभावित करता है। अध्ययन और ध्यान करने से निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है, फिर चाहे वह सांसारिक जीवन में हो या एकांतवास में।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed