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ओपीडी में आने वाले मरीजों का किया जा रहा रैपिड टेस्ट
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के बीच घाटी में बड़ी संख्या में डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ भी महामारी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में कश्मीर स्वास्थ्य विभाग के निदेशक की ओर से कोविड-नॉन कोविड गतिविधियों के साथ साथ ओपीडी के सामान्य रूप से कार्यात्मक रहने के निर्देश ने डॉक्टरों की चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे में डॉक्टरों को संक्रमण से बचाने के लिए जीएमसी और उसके एसोसिएटेड अस्पतालों ने विशेष दिशा निर्देशों का पालन करना शुरू कर दिया है। ओपीडी में आने वाले मरीज का रैपिड टेस्ट किया जा रहा है।
श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल के एक सीनियर डॉक्टर ने बताया कि ओपीडी सामान्य रूप से चालू रखी गई है। डॉक्टरों को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जो भी मरीज ओपीडी के लिए आ रहे हैं पहले उनका रैपिड एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है। इसमें भी केवल उन मरीजों को देखा जा रहा है जो गंभीर हैं। 1 जनवरी से अभी तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो 275 से अधिक डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी संक्रमित हुए हैं।
डॉक्टरों का मानना है कि ओमिक्रॉन की प्रसार दर ज़्यादा होने के चलते ऐसा देखने को मिल रहा है। राहत की बात यह है कि डेल्टा और अन्य वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन इतना घातक नहीं हैं, क्योंकि इससे निमोनिया का अटैक बहुत कम होता है।
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श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल के एक सीनियर डॉक्टर ने बताया कि ओपीडी सामान्य रूप से चालू रखी गई है। डॉक्टरों को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जो भी मरीज ओपीडी के लिए आ रहे हैं पहले उनका रैपिड एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है। इसमें भी केवल उन मरीजों को देखा जा रहा है जो गंभीर हैं। 1 जनवरी से अभी तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो 275 से अधिक डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी संक्रमित हुए हैं।
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डॉक्टरों का मानना है कि ओमिक्रॉन की प्रसार दर ज़्यादा होने के चलते ऐसा देखने को मिल रहा है। राहत की बात यह है कि डेल्टा और अन्य वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन इतना घातक नहीं हैं, क्योंकि इससे निमोनिया का अटैक बहुत कम होता है।
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