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शिक्षकों की हत्या पर उबाल, सड़कों पर उतरे लोग
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श्रीनगर में आतंकी हमले में मारी गई प्रिसिपल सुपिंदर कौर की अंतिम यात्रा में वीरवार को शामिल परि
- फोटो : SHRINAGAR
जम्मू/श्रीनगर। श्रीनगर के ईदगाह स्थित सरकारी स्कूल में वीरवार हो हुए आतंकी हमले में मारी गई प्रिंसिपल सुपिंदर कौर व शिक्षक दीपक चंद की हत्या के खिलाफ लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। लोगों ने शुक्रवार को जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर पाकिस्तान के पुतले भी फूंके गए। शिक्षक और प्रिंसिपल की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए और हत्यारों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। जम्मू के रिहाड़ी में दीपक चंद का शव पहुंचते ही पूरा परिवार और वहां मौजूद लोग बिलख पड़े। पत्नी बेसुध सी हो गई। लोगों ने शव को तिरंगे से ढंक दिया था। उधर श्रीनगर में सुपिंदर कौर की अंतिम यात्रा के दौरान सिखों में भी भारी आक्रोश देखा गया। पहली बार यात्रा में शामिल लोगों ने सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन कर हत्यारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। घर से सात किलोमीटर दूर श्मशान पैदल शव लेकर पहुंचे लोग। दोनों का अंतिम संस्कार गमगीन माहौल में कर दिया गया।
जम्मू के रिहाड़ी में दीपक का शव पहुंचते पत्नी अराधना तीन साल की बेटी उससे लिपट कर रोने लगी। दीपक की मां और भाई का भी बुरा हाल था। वहां मौजूद लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद और दीपक चंद मेहरा अमर रहे के नारे लगाए। शुक्रवार दोपहर 12 बजे दीपक का शक्ति नगर स्थित श्मशानघाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री रमन भल्ला, पूर्व विधायक सत शर्मा, पूर्व मंत्री मूला राम समेत कई गणमान्य लोग पहुंचे।
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श्रीनगर में सात किलोमीटर पैदल शव लेकर पहुंचे श्मशान घाट
दूसरी ओर श्रीनगर में प्राधानाचार्य सुपिंदर कौर की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में सिख समुदाय के लोग शामिल हुए। वर्षों बाद सिख समुदाय में आक्रोष दिखा शव के साथ लोग नागरिक सचिवालय पहुंचे और वहां सांकेतिक धरना देकर हत्याकांड में इंसाफ और हत्यारों की जल्द गिरफ्तार की मांग की गई। उच्चाधिकारियों के आश्वासन के बाद करण नगर श्मशान घाट में सुपिंदर कौर को अंतिम विदाई दी गई। उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। श्रीनगर के अलूचीबाग स्थित घर से शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे पार्थिव शरीर के साथ समुदाय के लोगों ने नागरिक सचिवालय की ओर पैदल मार्च शुरू किया। इसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। लोग इंसाफ और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे थे।
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पैदल मार्च अलूचीबाग से हफ चिनार, इकबाल पार्क, मगरमल बाग, जहांगीर चौक से होते हुए शहीद गंज स्थित नागरिक सचिवालय पहुंचा। लोग ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए आगे बढ़ते रहे। नागरिक सचिवालय के समक्ष करीब 20 मिनट तक सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया गया। अंतिम यात्रा में शामिल इंदुमीत सिंह ने कहा कि आतंकवाद के दौरान 90 के दशक में भी सिख घाटी में डटे रहे लेकिन आज तक ऐसी हरकत कभी नहीं हुई। अब कश्मीरी सिख चुप रहने वाला नहीं है। वह अपने हक और इंसाफ के लिए आवाज बुलंद करेगा। इंदुमीत सिंह ने कहा कि हत्याकांड में जल्द से जल्द इंसाफ मिले। अलूचीबाग से श्मशान घाट तक 7 किलोमीटर पैदल चल कर 12.40 बजे अंतिम संस्कार किया गया। सुपिंदर कौर को अंतिम विदाई देने के लिए भाजपा के पूर्व एमएलसी चरणजीत सिंह खालसा, नेकां के नासिर असलम वानी, कांग्रेस के सुरिंदर सिंह चन्नी, जम्मू कश्मीर बैंक के कई आला अधिकारी और स्टाफ के अलावा काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। सभी ने हत्या की निंदा की और कहा कि सरकार को गंभीरता से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के बारे में सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी में शुरू से हिन्दू-सिख-मुसलमान भाईचारा रहा है जिसे तोड़ने की कोशिश पाकिस्तान के इशारों पर काम करने वाले तत्वों द्वारा की जा रही है, लेकिन हम सबको इस कोशिश को नाकाम बनाना चाहिए और एकजुट होना चाहिए।
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दीपक की पत्नी को सरकारी नौकरी की मांग
दीपक के घर पहुंचे उनके रिश्तेदारों ने मांग की है कि उसकी पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए और उसकी बेटी के बारे भी सरकार की तरफ से कोई बड़ा एलान किया जाए, जिससे सारी जिंदगी उसकी परवरिश में कोई परेशानी न आए। रिश्तेदारों का कहना है कि इस तरह से कश्मीर में कोई भी हिंदु सिख सुरक्षित नहीं है। यदि किसी के पहचान पत्र देख उनको मारा जा रहा है तो यह एक बड़ा खतरा है, जिससे निपटने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
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आतंकियों को बख्शेंगे नहीं : रैना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना का कहना है कि जिस किसी ने दीपक की हत्या की है, उसको बख्शा नहीं जाएगा। सरकार कश्मीर में बड़े स्तर पर वहां से विस्थापित हुए लोगों को बसाना चाहती है, जो आतंकियों और पाकिस्तान को पच नहीं रहा। पाकिस्तान प्रदेश में लोगों को धर्म के नाम पर लड़ाना चाहता है। कश्मीर के गैर मुस्लिमों को वहां डराने की कोशिश की जा रही है।
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सरकार की नाकामी का नतीजा: भल्ला
वहीं कांग्रेस नेता रमण भल्ला ने कहा है कि सरकार की नाकामी का नतीजा है कि कश्मीर में इस तरह से साजिश के तहत हिंदु सिख और गैर कश्मीरी नागरिकों को मारा जा रहा है। आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दो साल से कश्मीर में इस तरह की वारदातें हो रही हैं। यह एक बड़ी चुनौती और खतरा है। इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इस दुख की घड़ी में हर किसी को परिवार के साथ खड़े रहना चाहिए।
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जम्मू के रिहाड़ी में दीपक का शव पहुंचते पत्नी अराधना तीन साल की बेटी उससे लिपट कर रोने लगी। दीपक की मां और भाई का भी बुरा हाल था। वहां मौजूद लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद और दीपक चंद मेहरा अमर रहे के नारे लगाए। शुक्रवार दोपहर 12 बजे दीपक का शक्ति नगर स्थित श्मशानघाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री रमन भल्ला, पूर्व विधायक सत शर्मा, पूर्व मंत्री मूला राम समेत कई गणमान्य लोग पहुंचे।
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श्रीनगर में सात किलोमीटर पैदल शव लेकर पहुंचे श्मशान घाट
दूसरी ओर श्रीनगर में प्राधानाचार्य सुपिंदर कौर की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में सिख समुदाय के लोग शामिल हुए। वर्षों बाद सिख समुदाय में आक्रोष दिखा शव के साथ लोग नागरिक सचिवालय पहुंचे और वहां सांकेतिक धरना देकर हत्याकांड में इंसाफ और हत्यारों की जल्द गिरफ्तार की मांग की गई। उच्चाधिकारियों के आश्वासन के बाद करण नगर श्मशान घाट में सुपिंदर कौर को अंतिम विदाई दी गई। उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। श्रीनगर के अलूचीबाग स्थित घर से शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे पार्थिव शरीर के साथ समुदाय के लोगों ने नागरिक सचिवालय की ओर पैदल मार्च शुरू किया। इसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। लोग इंसाफ और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे थे।
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पैदल मार्च अलूचीबाग से हफ चिनार, इकबाल पार्क, मगरमल बाग, जहांगीर चौक से होते हुए शहीद गंज स्थित नागरिक सचिवालय पहुंचा। लोग ‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए आगे बढ़ते रहे। नागरिक सचिवालय के समक्ष करीब 20 मिनट तक सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया गया। अंतिम यात्रा में शामिल इंदुमीत सिंह ने कहा कि आतंकवाद के दौरान 90 के दशक में भी सिख घाटी में डटे रहे लेकिन आज तक ऐसी हरकत कभी नहीं हुई। अब कश्मीरी सिख चुप रहने वाला नहीं है। वह अपने हक और इंसाफ के लिए आवाज बुलंद करेगा। इंदुमीत सिंह ने कहा कि हत्याकांड में जल्द से जल्द इंसाफ मिले। अलूचीबाग से श्मशान घाट तक 7 किलोमीटर पैदल चल कर 12.40 बजे अंतिम संस्कार किया गया। सुपिंदर कौर को अंतिम विदाई देने के लिए भाजपा के पूर्व एमएलसी चरणजीत सिंह खालसा, नेकां के नासिर असलम वानी, कांग्रेस के सुरिंदर सिंह चन्नी, जम्मू कश्मीर बैंक के कई आला अधिकारी और स्टाफ के अलावा काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। सभी ने हत्या की निंदा की और कहा कि सरकार को गंभीरता से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के बारे में सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी में शुरू से हिन्दू-सिख-मुसलमान भाईचारा रहा है जिसे तोड़ने की कोशिश पाकिस्तान के इशारों पर काम करने वाले तत्वों द्वारा की जा रही है, लेकिन हम सबको इस कोशिश को नाकाम बनाना चाहिए और एकजुट होना चाहिए।
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दीपक की पत्नी को सरकारी नौकरी की मांग
दीपक के घर पहुंचे उनके रिश्तेदारों ने मांग की है कि उसकी पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए और उसकी बेटी के बारे भी सरकार की तरफ से कोई बड़ा एलान किया जाए, जिससे सारी जिंदगी उसकी परवरिश में कोई परेशानी न आए। रिश्तेदारों का कहना है कि इस तरह से कश्मीर में कोई भी हिंदु सिख सुरक्षित नहीं है। यदि किसी के पहचान पत्र देख उनको मारा जा रहा है तो यह एक बड़ा खतरा है, जिससे निपटने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
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आतंकियों को बख्शेंगे नहीं : रैना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना का कहना है कि जिस किसी ने दीपक की हत्या की है, उसको बख्शा नहीं जाएगा। सरकार कश्मीर में बड़े स्तर पर वहां से विस्थापित हुए लोगों को बसाना चाहती है, जो आतंकियों और पाकिस्तान को पच नहीं रहा। पाकिस्तान प्रदेश में लोगों को धर्म के नाम पर लड़ाना चाहता है। कश्मीर के गैर मुस्लिमों को वहां डराने की कोशिश की जा रही है।
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सरकार की नाकामी का नतीजा: भल्ला
वहीं कांग्रेस नेता रमण भल्ला ने कहा है कि सरकार की नाकामी का नतीजा है कि कश्मीर में इस तरह से साजिश के तहत हिंदु सिख और गैर कश्मीरी नागरिकों को मारा जा रहा है। आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। दो साल से कश्मीर में इस तरह की वारदातें हो रही हैं। यह एक बड़ी चुनौती और खतरा है। इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इस दुख की घड़ी में हर किसी को परिवार के साथ खड़े रहना चाहिए।