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Jammu Kashmir: घाटी में बीते पांच दशकों में 2024 सबसे सूखा साल रहा, बारिश में 29% कमी ने बढ़ाई चुनौती
Sun, 12 Jan 2025 11:57 AM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Sun, 12 Jan 2025 11:57 AM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में 2024 सबसे सूखा साल रहा, जिसमें बारिश में 29% की कमी दर्ज की गई और जल संकट गहरा गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच दशकों में वर्ष 2024 सबसे सूखा साल रहा। बीते साल 1232.3 मिलीमीटर के वार्षिक औसत की तुलना में बारिश में 29 (870.9 मिमी) प्रतिशत की कमी आई है। मौसम विशेषज्ञ फैजान आरिफ ने कहा, केंद्र शासित प्रदेश में यह लगातार पांचवां साल है, जब सामान्य से कम बारिश हुई है।
हाल के वर्षों में बारिश के रुझानों पर नजर डालें तो चिंताजनक पैटर्न सामने आता है। 2023 में 1146.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से सात प्रतिशत कम थी। 2022 में 1040.4 मिमी बारिश हुई, जिसमें 16 प्रतिशत की कमी थी। 2021 में वर्षा का स्तर गिरकर 892.5 मिमी हो गया, जो 28 प्रतिशत कम था। 2020 में 982.2 मिमी के साथ 20 प्रतिशत की कमी देखी गई।
2024 के आंकड़े 1974 में 802.5 मिमी के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब हैं। लंबे समय से जारी कमी ने नदियों, जलाशयों और भूजल स्रोतों के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। किसानों और निवासियों को पानी की उपलब्धता में कमी के कारण बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
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हाल के वर्षों में बारिश के रुझानों पर नजर डालें तो चिंताजनक पैटर्न सामने आता है। 2023 में 1146.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से सात प्रतिशत कम थी। 2022 में 1040.4 मिमी बारिश हुई, जिसमें 16 प्रतिशत की कमी थी। 2021 में वर्षा का स्तर गिरकर 892.5 मिमी हो गया, जो 28 प्रतिशत कम था। 2020 में 982.2 मिमी के साथ 20 प्रतिशत की कमी देखी गई।
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2024 के आंकड़े 1974 में 802.5 मिमी के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब हैं। लंबे समय से जारी कमी ने नदियों, जलाशयों और भूजल स्रोतों के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। किसानों और निवासियों को पानी की उपलब्धता में कमी के कारण बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
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