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Srinagar News: पंजाबी भाषा की बहाली को लेकर किया प्रदर्शन
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा की बहाली की मांग को लेकर सिख समुदाय के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। ऑल पार्टीज सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी, पंजाबी साहित सभा, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों, अकाली दल और अन्य संगठनों से जुड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने बगात बरजुल्ला स्थित गुरुद्वारा शहीद बुंगा साहिब में प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
प्रदर्शन का नेतृत्व जगमोहन सिंह रैना, अजीत सिंह मस्ताना, दारा सिंह, डीपी सिंह, डॉ. रेखी, मंगत सिंह जुगनू सहित कई नेताओं ने किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सिख समुदाय के भाषाई, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाबी इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है और जम्मू-कश्मीर में पीढ़ियों से बोली और संजोई जाती रही है। प्रदर्शनकारियों ने पंजाबी भाषा की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की और अधिकारियों से इसके प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि हर भाषा को समान सम्मान मिलना चाहिए और पंजाबी को क्षेत्र के सांस्कृतिक और शैक्षिक परिदृश्य में अपना स्थान खोने नहीं देना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत शुरू करने की अपील की।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा की बहाली की मांग को लेकर सिख समुदाय के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। ऑल पार्टीज सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी, पंजाबी साहित सभा, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों, अकाली दल और अन्य संगठनों से जुड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने बगात बरजुल्ला स्थित गुरुद्वारा शहीद बुंगा साहिब में प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
प्रदर्शन का नेतृत्व जगमोहन सिंह रैना, अजीत सिंह मस्ताना, दारा सिंह, डीपी सिंह, डॉ. रेखी, मंगत सिंह जुगनू सहित कई नेताओं ने किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सिख समुदाय के भाषाई, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाबी इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है और जम्मू-कश्मीर में पीढ़ियों से बोली और संजोई जाती रही है। प्रदर्शनकारियों ने पंजाबी भाषा की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की और अधिकारियों से इसके प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि हर भाषा को समान सम्मान मिलना चाहिए और पंजाबी को क्षेत्र के सांस्कृतिक और शैक्षिक परिदृश्य में अपना स्थान खोने नहीं देना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत शुरू करने की अपील की।