{"_id":"6a612cb7f764fd0dfa05d31e","slug":"jammu-and-kashmir-news-srinagar-news-c-264-1-udh1007-113788-2026-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना संवैधानिक दायित्व है: शौकत अहमद मीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना संवैधानिक दायित्व है: शौकत अहमद मीर
विज्ञापन
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष शौकत अहमद मीर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना एक संवैधानिक दायित्व है। इसमें हो रही देरी से लोगों में निराशा बढ़ी है और लोगों ने शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग तेज करने का संकल्प लिया है। मीर ने कहा कि नेकां ने करीब 2 साल तक धैर्य रखा और केंद्र सरकार द्वारा संसद, सुप्रीम कोर्ट और लोगों के सामने किए गए वादों पर भरोसा किया कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। उन्होंने कहा हर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को जिम्मेदारी और संयम के साथ निभाने के बाद अब हमारे पास लोगों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
उन्होंने बताया कि यह अभियान 11 जुलाई को हजरतबल में ऐतिहासिक जन सम्मेलन से शुरू हुआ और नई दिल्ली में बड़े सार्वजनिक प्रदर्शन के साथ और तेज हुआ। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और सिविल सोसायटी के लोग राज्य का दर्जा और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग को लेकर एकजुट हुए। मीर ने कहा राज्य का दर्जा सुविधा के अनुसार दिया जाने वाला एहसान नहीं है। यह संवैधानिक प्रतिबद्धता और जम्मू-कश्मीर के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है। यह वादा संसद में किया गया, लोगों के सामने दोहराया गया और सुप्रीम कोर्ट में पुष्टि की गई। अब समय आ गया है कि इसे अक्षरश और भावना से सम्मान दिया जाए। उन्होंने दोहराया कि नेकां जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार राज्य का दर्जा बहाल होना लोकतांत्रिक संस्थाओं को फिर से खड़ा करने और लोगों के अधिकारों को मजबूत करने की पहली जरूरी सीढ़ी है। नई दिल्ली प्रदर्शन में शामिल न होने वाली पार्टियों का जिक्र करते हुए मीर ने कहा कि बीजेपी की ए, बी और सी टीमों ने फिर से सामूहिक लोकतांत्रिक पहल से दूरी बनाई है। उन्होंने कहा कि पीडीपी, अपनी पार्टी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का विरोध से दूर रहना लोगों के बीच अहम राजनीतिक सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब राज्य का दर्जा और संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट आवाज की जरूरत थी। मीर ने कहा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन से इन दलों की गैरहाजिरी के बाद ये पार्टियां लोगों के सामने बेनकाब हो गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए बिना देरी राज्य का दर्जा बहाल करे और जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की वापसी के लिए सार्थक कदम उठाए।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि यह अभियान 11 जुलाई को हजरतबल में ऐतिहासिक जन सम्मेलन से शुरू हुआ और नई दिल्ली में बड़े सार्वजनिक प्रदर्शन के साथ और तेज हुआ। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और सिविल सोसायटी के लोग राज्य का दर्जा और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग को लेकर एकजुट हुए। मीर ने कहा राज्य का दर्जा सुविधा के अनुसार दिया जाने वाला एहसान नहीं है। यह संवैधानिक प्रतिबद्धता और जम्मू-कश्मीर के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार है। यह वादा संसद में किया गया, लोगों के सामने दोहराया गया और सुप्रीम कोर्ट में पुष्टि की गई। अब समय आ गया है कि इसे अक्षरश और भावना से सम्मान दिया जाए। उन्होंने दोहराया कि नेकां जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार राज्य का दर्जा बहाल होना लोकतांत्रिक संस्थाओं को फिर से खड़ा करने और लोगों के अधिकारों को मजबूत करने की पहली जरूरी सीढ़ी है। नई दिल्ली प्रदर्शन में शामिल न होने वाली पार्टियों का जिक्र करते हुए मीर ने कहा कि बीजेपी की ए, बी और सी टीमों ने फिर से सामूहिक लोकतांत्रिक पहल से दूरी बनाई है। उन्होंने कहा कि पीडीपी, अपनी पार्टी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का विरोध से दूर रहना लोगों के बीच अहम राजनीतिक सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब राज्य का दर्जा और संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट आवाज की जरूरत थी। मीर ने कहा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन से इन दलों की गैरहाजिरी के बाद ये पार्टियां लोगों के सामने बेनकाब हो गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए बिना देरी राज्य का दर्जा बहाल करे और जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की वापसी के लिए सार्थक कदम उठाए।
विज्ञापन