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Srinagar News: वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारियों की निगरानी तेज
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स्वास्थ्य सेवा निदेशालय कश्मीर ने शुरू किया विशेष अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में वैक्सीन से रोकी जाने वाली बीमारियों पर अंकुश लगाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तंत्र को बेहद कड़ा कर दिया है। इस पहल के तहत श्रीनगर में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य बीमारियों की जल्द पहचान, केस ट्रैकिंग, डेटा संग्रह और टीकाकरण कवरेज में सुधार करना है।
स्वास्थ्य सेवा निदेशक कश्मीर डॉ. निघत यासमीन ने बताया कि इस विशेष निगरानी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बीमारियों के उभरते पैटर्न की पहचान करना, डेटा का विश्लेषण करना और टीकाकरण कवरेज में रह गई कमियों को दूर करना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम खसरा, रुबेला और टिटनेस सहित छह प्रमुख वैक्सीन-रोकथाम बीमारियों को कवर करता है, ताकि संवेदनशील आबादी और उन क्षेत्रों की पहचान की जा सके जहां लक्षित हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है।
इस अभियान का एक बड़ा और महत्वपूर्ण पहलू इसका आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी प्रणाली में बदलाव है। डॉ. यासमीन ने जानकारी दी कि पहले यह निगरानी तंत्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के तकनीकी सहयोग से चलाया जाता था, जिसे अब चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली में परिवर्तित किया जा रहा है। यह प्रक्रिया राज्य स्तर से शुरू होकर अस्पतालों और स्वास्थ्य प्रणाली के अन्य स्तरों तक पहुंचेगी और मार्च 2027 तक इसके पूरी तरह संपन्न होने की उम्मीद है।
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कार्यशाला में स्वास्थ्य अधिकारियों को बीमारी निगरानी के प्रमुख पहलुओं में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिसमें संदिग्ध मामलों की पहचान, नमूना संग्रह, प्रयोगशाला प्रक्रियाएं, डेटा विश्लेषण और एकीककृत पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना शामिल है। डॉ. यासमीन ने इस पहल को एक बड़ा और महत्वपूर्ण दायित्व बताते हुए कहा कि भारत सरकार इस विषय को लेकर बेहद गंभीर है और स्वास्थ्य विभाग इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में वैक्सीन से रोकी जाने वाली बीमारियों पर अंकुश लगाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तंत्र को बेहद कड़ा कर दिया है। इस पहल के तहत श्रीनगर में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य बीमारियों की जल्द पहचान, केस ट्रैकिंग, डेटा संग्रह और टीकाकरण कवरेज में सुधार करना है।
स्वास्थ्य सेवा निदेशक कश्मीर डॉ. निघत यासमीन ने बताया कि इस विशेष निगरानी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बीमारियों के उभरते पैटर्न की पहचान करना, डेटा का विश्लेषण करना और टीकाकरण कवरेज में रह गई कमियों को दूर करना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम खसरा, रुबेला और टिटनेस सहित छह प्रमुख वैक्सीन-रोकथाम बीमारियों को कवर करता है, ताकि संवेदनशील आबादी और उन क्षेत्रों की पहचान की जा सके जहां लक्षित हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है।
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इस अभियान का एक बड़ा और महत्वपूर्ण पहलू इसका आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी प्रणाली में बदलाव है। डॉ. यासमीन ने जानकारी दी कि पहले यह निगरानी तंत्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के तकनीकी सहयोग से चलाया जाता था, जिसे अब चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली में परिवर्तित किया जा रहा है। यह प्रक्रिया राज्य स्तर से शुरू होकर अस्पतालों और स्वास्थ्य प्रणाली के अन्य स्तरों तक पहुंचेगी और मार्च 2027 तक इसके पूरी तरह संपन्न होने की उम्मीद है।
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कार्यशाला में स्वास्थ्य अधिकारियों को बीमारी निगरानी के प्रमुख पहलुओं में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिसमें संदिग्ध मामलों की पहचान, नमूना संग्रह, प्रयोगशाला प्रक्रियाएं, डेटा विश्लेषण और एकीककृत पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना शामिल है। डॉ. यासमीन ने इस पहल को एक बड़ा और महत्वपूर्ण दायित्व बताते हुए कहा कि भारत सरकार इस विषय को लेकर बेहद गंभीर है और स्वास्थ्य विभाग इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।