{"_id":"6aaafa797b1aeb39970de351","slug":"jammu-and-kashmir-news-srinagar-news-c-10-1-jam1027-1014576-2026-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला मरीजों की मांग : ईसीजी सेवाओं के लिए तैनात हों महिला कर्मचारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला मरीजों की मांग : ईसीजी सेवाओं के लिए तैनात हों महिला कर्मचारी
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग से ईसीजी कक्षों में प्रशिक्षित महिला तकनीशियन उपलब्ध कराने की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आ रही महिला मरीजों ने ईसीजी कक्षों में महिला कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर चिंता व्यक्त की है। मरीजों का कहना है कि पुरुष तकनीशियनों की मौजूदगी में ईसीजी जांच कराने से वे असहज महसूस करती है।
महिला मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या दिल से जुड़ी अन्य आपात स्थिति में ईसीजी एक बेहद महत्वपूर्ण जांच है। हालांकि, जो महिलाएं पुरुष कर्मचारियों के सामने इस जांच को कराने में झिझकती हैं। दक्षिण कश्मीर के जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंची एक महिला मरीज बिस्मा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि पुरुष तकनीशियन होने के कारण उन्होंने अपनी जांच रोक दी। इसी तरह एक अन्य महिला मरीज फातिमा जान ने बताया कि ईसीजी जांच के दौरान निजता एक बड़ी चिंता बन जाती है। यदि अस्पताल में प्रशिक्षित महिला कर्मचारी उपलब्ध हों, तो महिलाएं बिना किसी झिझक के समय पर जांच करा सकती हैं।
पुलवामा के एक अस्पताल में आई एक तीमारदार सुफिया मजीद ने सुझाव दिया कि ड्यूटी रोस्टर के जरिए महिला कर्मचारियों की तैनाती की जा सकती है। एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ईसीजी एक त्वरित और अत्यंत महत्वपूर्ण जांच है। अगर मरीज झिझक के कारण जांच में देरी करता है, तो इससे इलाज और निदान में देरी हो सकती है जो जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने माना कि पुरुष तकनीशियन पेशेवर रूप से प्रशिक्षित होते हैं, फिर भी अस्पतालों को महिलाओं की निजता संबंधी चिंताओं का सम्मान करना चाहिए। मरीजों ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू से इस मामले में हस्तक्षेप करने और राज्य भर के सरकारी अस्पतालों को उचित दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आ रही महिला मरीजों ने ईसीजी कक्षों में महिला कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर चिंता व्यक्त की है। मरीजों का कहना है कि पुरुष तकनीशियनों की मौजूदगी में ईसीजी जांच कराने से वे असहज महसूस करती है।
महिला मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या दिल से जुड़ी अन्य आपात स्थिति में ईसीजी एक बेहद महत्वपूर्ण जांच है। हालांकि, जो महिलाएं पुरुष कर्मचारियों के सामने इस जांच को कराने में झिझकती हैं। दक्षिण कश्मीर के जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंची एक महिला मरीज बिस्मा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि पुरुष तकनीशियन होने के कारण उन्होंने अपनी जांच रोक दी। इसी तरह एक अन्य महिला मरीज फातिमा जान ने बताया कि ईसीजी जांच के दौरान निजता एक बड़ी चिंता बन जाती है। यदि अस्पताल में प्रशिक्षित महिला कर्मचारी उपलब्ध हों, तो महिलाएं बिना किसी झिझक के समय पर जांच करा सकती हैं।
विज्ञापन
पुलवामा के एक अस्पताल में आई एक तीमारदार सुफिया मजीद ने सुझाव दिया कि ड्यूटी रोस्टर के जरिए महिला कर्मचारियों की तैनाती की जा सकती है। एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ईसीजी एक त्वरित और अत्यंत महत्वपूर्ण जांच है। अगर मरीज झिझक के कारण जांच में देरी करता है, तो इससे इलाज और निदान में देरी हो सकती है जो जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने माना कि पुरुष तकनीशियन पेशेवर रूप से प्रशिक्षित होते हैं, फिर भी अस्पतालों को महिलाओं की निजता संबंधी चिंताओं का सम्मान करना चाहिए। मरीजों ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू से इस मामले में हस्तक्षेप करने और राज्य भर के सरकारी अस्पतालों को उचित दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है।
विज्ञापन