{"_id":"6a8b5cd0cab59226dd0225a1","slug":"jammu-and-kashmir-news-srinagar-news-c-10-1-agr1010-994149-2026-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: आवारा जानकारों को अब नहीं दे सकेंगे बिजली के झटके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: आवारा जानकारों को अब नहीं दे सकेंगे बिजली के झटके
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- जम्मू-कश्मीर आवास एवं शहरी विकास विभाग ने डॉग स्टिक के इस्तेमाल पर लगाई रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। आवास एवं शहरी विकास विभाग ने कुत्तों और जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए प्रचारित किए जा रहे बिजली से चलने वाले शॉक डिवाइस के विज्ञापन और बिक्री का संज्ञान लिया है। यह डिवाइस मेसर्स गैम्ब्स एंटरप्राइजेज, ओल्ड बस स्टैंड, पुलवामा, जम्मू-कश्मीर की ओर से विज्ञापित की जा रही है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि आवारा जानवरों के लिए इलेक्ट्रिक शॉक गन, स्टन डिवाइस, इलेक्ट्रिक प्रॉड या इसी तरह के अन्य उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का उल्लंघन है। विभाग ने शस्त्र अधिनियम, 1959 और शस्त्र नियम, 2016 की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। शस्त्र अधिनियम की धारा 5 के तहत, आग्नेयास्त्रों या निर्धारित वर्गों के अन्य हथियारों की बिक्री, हस्तांतरण, प्रदर्शन या बिक्री के लिए प्रस्ताव, या बिक्री के लिए कब्जे के लिए आवश्यक लाइसेंस की आवश्यकता होती है। धारा 5 के उल्लंघन पर अधिनियम की धारा 25(1)(ए) लागू हो सकती है। शस्त्र नियम, 2016 विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक डिसेबलिंग डिवाइस को विनियमित करते हैं। इसके मुताबिक ऐसे उपकरण प्रतिबंधित या अनुमेय हथियार श्रेणियों में आ सकते हैं। नियम 89(3) में प्रावधान है कि ईडीडी केवल आवश्यक लाइसेंस रखने वाले अधिकृत हथियार और गोला-बारूद डीलरों के माध्यम से ही बेचे जाएंगे। विभाग इसके उपयोग का पता लगाने के लिए सक्षम अधिकारियों से मामले की जांच कर रहा है। सभी डॉग कैचर्स, एजेंसियों, ठेकेदारों, पशु कल्याण संगठनों, नगर निकायों और स्थानीय लोगों को भी सलाह दी जाती है कि वे आवारा कुत्तों को पकड़ने, रोकने या संभालने के लिए इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस न खरीदें और न ही उपयोग करे। एचयूडीडी जम्मू-कश्मीर आवारा कुत्तों की आबादी के मानवीय, वैज्ञानिक और वैध प्रबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और जानवरों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले क्रूर तरीकों के प्रति जीरो-टॉलरेंस दृष्टिकोण अपनाता है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। आवास एवं शहरी विकास विभाग ने कुत्तों और जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए प्रचारित किए जा रहे बिजली से चलने वाले शॉक डिवाइस के विज्ञापन और बिक्री का संज्ञान लिया है। यह डिवाइस मेसर्स गैम्ब्स एंटरप्राइजेज, ओल्ड बस स्टैंड, पुलवामा, जम्मू-कश्मीर की ओर से विज्ञापित की जा रही है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि आवारा जानवरों के लिए इलेक्ट्रिक शॉक गन, स्टन डिवाइस, इलेक्ट्रिक प्रॉड या इसी तरह के अन्य उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का उल्लंघन है। विभाग ने शस्त्र अधिनियम, 1959 और शस्त्र नियम, 2016 की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। शस्त्र अधिनियम की धारा 5 के तहत, आग्नेयास्त्रों या निर्धारित वर्गों के अन्य हथियारों की बिक्री, हस्तांतरण, प्रदर्शन या बिक्री के लिए प्रस्ताव, या बिक्री के लिए कब्जे के लिए आवश्यक लाइसेंस की आवश्यकता होती है। धारा 5 के उल्लंघन पर अधिनियम की धारा 25(1)(ए) लागू हो सकती है। शस्त्र नियम, 2016 विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक डिसेबलिंग डिवाइस को विनियमित करते हैं। इसके मुताबिक ऐसे उपकरण प्रतिबंधित या अनुमेय हथियार श्रेणियों में आ सकते हैं। नियम 89(3) में प्रावधान है कि ईडीडी केवल आवश्यक लाइसेंस रखने वाले अधिकृत हथियार और गोला-बारूद डीलरों के माध्यम से ही बेचे जाएंगे। विभाग इसके उपयोग का पता लगाने के लिए सक्षम अधिकारियों से मामले की जांच कर रहा है। सभी डॉग कैचर्स, एजेंसियों, ठेकेदारों, पशु कल्याण संगठनों, नगर निकायों और स्थानीय लोगों को भी सलाह दी जाती है कि वे आवारा कुत्तों को पकड़ने, रोकने या संभालने के लिए इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस न खरीदें और न ही उपयोग करे। एचयूडीडी जम्मू-कश्मीर आवारा कुत्तों की आबादी के मानवीय, वैज्ञानिक और वैध प्रबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और जानवरों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले क्रूर तरीकों के प्रति जीरो-टॉलरेंस दृष्टिकोण अपनाता है।
विज्ञापन