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विधानसभा का सत्र लोगों को निराश करने वाला रहा, राजकीय दर्जे की राजनीति में दबे जनमुद्दे : अल्ताफ ठाकुर
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- आरक्षण, दिहाड़ी मजदूर, आशा कार्यकर्ता, व्यावसायिक प्रशिक्षक, बेरोजगार युवा जवाब का इंतजार करते रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। भाजपा जम्मू-कश्मीर प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र को विफल करार दिया। उन्होंने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर सदन को राजनीतिक मुद्दे के मंच में बदलने का आरोप लगाया, जबकि आम लोगों की गंभीर चिंताएं अनसुलझी रह गईं।
उन्होंने कहा कि हजारों युवा उम्मीदवार आरक्षण नीति पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। वर्षों से सरकार की सेवा कर रहे दिहाड़ी और संविदा कर्मचारी नौकरी की सुरक्षा और नियमितीकरण चाहते हैं। आशा कार्यकर्ता और व्यावसायिक प्रशिक्षक बेहतर पारिश्रमिक और रोजगार सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बेरोजगार युवा पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा इन मुद्दों को संबोधित करने के बजाय, सरकार ने पूरे सत्र को राजकीय दर्जे के प्रस्ताव की छाया में रहने दिया। सरकार को यह बताना चाहिए कि बेरोजगारी कम करने, भर्ती में तेजी लाने के लिए उसने क्या ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने विकास की धीमी गति, बिगड़ते नागरिक बुनियादी ढांचे, यातायात के दबाव, पर्यटन से संबंधित बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सुविधाओं और कर्मचारियों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर भी सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा लोगों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को जनादेश दिया है। वे निर्वाचित सरकार के पास उपलब्ध शक्तियों के भीतर काम की उम्मीद करते हैं। यदि संवैधानिक या प्रशासनिक सीमाएं हैं, तो सरकार को उन्हें स्थायी बहाने के रूप में उपयोग करने के बजाय लोगों को समझाना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। भाजपा जम्मू-कश्मीर प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र को विफल करार दिया। उन्होंने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर सदन को राजनीतिक मुद्दे के मंच में बदलने का आरोप लगाया, जबकि आम लोगों की गंभीर चिंताएं अनसुलझी रह गईं।
उन्होंने कहा कि हजारों युवा उम्मीदवार आरक्षण नीति पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। वर्षों से सरकार की सेवा कर रहे दिहाड़ी और संविदा कर्मचारी नौकरी की सुरक्षा और नियमितीकरण चाहते हैं। आशा कार्यकर्ता और व्यावसायिक प्रशिक्षक बेहतर पारिश्रमिक और रोजगार सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बेरोजगार युवा पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा इन मुद्दों को संबोधित करने के बजाय, सरकार ने पूरे सत्र को राजकीय दर्जे के प्रस्ताव की छाया में रहने दिया। सरकार को यह बताना चाहिए कि बेरोजगारी कम करने, भर्ती में तेजी लाने के लिए उसने क्या ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने विकास की धीमी गति, बिगड़ते नागरिक बुनियादी ढांचे, यातायात के दबाव, पर्यटन से संबंधित बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सुविधाओं और कर्मचारियों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर भी सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा लोगों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को जनादेश दिया है। वे निर्वाचित सरकार के पास उपलब्ध शक्तियों के भीतर काम की उम्मीद करते हैं। यदि संवैधानिक या प्रशासनिक सीमाएं हैं, तो सरकार को उन्हें स्थायी बहाने के रूप में उपयोग करने के बजाय लोगों को समझाना चाहिए।
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