{"_id":"6aac4c62163d268e500d8bb7","slug":"jammu-and-kashmir-news-srinagar-news-c-10-1-agr1010-1015310-2026-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: विधायक आगा होकरसर सीमांकन का मुद्दा विधानसभा में उठाएंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: विधायक आगा होकरसर सीमांकन का मुद्दा विधानसभा में उठाएंगे
विज्ञापन
श्रीनगर। होकरसर वेटलैंड के सीमांकन को लेकर चल रहा विवाद अब जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उठने जा रहा है। बडगाम से विधायक आगा सैयद मुंतजिर मेहदी ने स्पष्ट किया है कि वह आगामी विधानसभा सत्र में इस ज्वलंत मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के इस विषय पर चर्चा के उनके प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के बाद अब यह मामला विधायी पटल पर औपचारिक बहस का हिस्सा बनेगा।
बडगाम स्थित पीडीपी कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विधायक आगा मुंतजिर मेहदी ने कहा कि सोइबुग, धरमुणा और हाजीबाग समेत कई प्रभावित इलाकों में सीमांकन का मसला प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीमांकन प्रक्रिया के दौरान वेटलैंड की सीमाओं को जानबूझकर निजी संपत्तियों तक खींच दिया गया है, जिसके चलते वैध राजस्व रिकॉर्ड रखने वाले भू-स्वामियों में अपनी जमीन के दर्जे को लेकर भारी अनिश्चितता और रोष का माहौल बना हुआ है। उन्होंने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि अक्सर वाटर स्पिल गेट बंद रखे जाते हैं, जिसकी वजह से अतिरिक्त पानी धान के खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने वेटलैंड और आसपास के इलाकों में जल स्तर के प्रबंधन को लेकर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
विधायक मेहदी ने जोर देकर कहा कि इस मसले को महज पर्यावरण संरक्षण बनाम निजी स्वामित्व के टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक स्पष्ट, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सटीक सीमांकन के जरिए जमीन के वास्तविक दर्जे का निपटारा किया जाना बेहद जरूरी है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि यह मामला पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन रहा है। फरवरी 2026 में बडगाम जिला प्रशासन ने होकरसर सीमांकन की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जियो-रेफरेंस्ड मैपिंग और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सटीक और विवाद-मुक्त सीमांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इससे पूर्व अगस्त महीने में भी विधायक ने कश्मीर के संभागीय आयुक्त के समक्ष धरमुणा, सोइबुग, गोरीपोरा, गोतपोरा, चूरपोरा, सोज़ैथ और हाजीबाग जैसे गांवों के लोगों की चिंताओं को रखा था, जिस पर प्रशासन ने पारदर्शी प्रक्रिया और प्रभावितों के वैध हितों की रक्षा का आश्वासन दिया था। होकरसर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर वेटलैंड होने के साथ-साथ लाखों प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना है, जिसके चलते राष्ट्रीय हरित अधिकरण में भी यहां अतिक्रमण और मिट्टी भराई के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े मामले दर्ज रहे हैं। संवाद
विज्ञापन
बडगाम स्थित पीडीपी कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विधायक आगा मुंतजिर मेहदी ने कहा कि सोइबुग, धरमुणा और हाजीबाग समेत कई प्रभावित इलाकों में सीमांकन का मसला प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीमांकन प्रक्रिया के दौरान वेटलैंड की सीमाओं को जानबूझकर निजी संपत्तियों तक खींच दिया गया है, जिसके चलते वैध राजस्व रिकॉर्ड रखने वाले भू-स्वामियों में अपनी जमीन के दर्जे को लेकर भारी अनिश्चितता और रोष का माहौल बना हुआ है। उन्होंने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि अक्सर वाटर स्पिल गेट बंद रखे जाते हैं, जिसकी वजह से अतिरिक्त पानी धान के खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने वेटलैंड और आसपास के इलाकों में जल स्तर के प्रबंधन को लेकर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
विज्ञापन
विधायक मेहदी ने जोर देकर कहा कि इस मसले को महज पर्यावरण संरक्षण बनाम निजी स्वामित्व के टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक स्पष्ट, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सटीक सीमांकन के जरिए जमीन के वास्तविक दर्जे का निपटारा किया जाना बेहद जरूरी है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि यह मामला पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन रहा है। फरवरी 2026 में बडगाम जिला प्रशासन ने होकरसर सीमांकन की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जियो-रेफरेंस्ड मैपिंग और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सटीक और विवाद-मुक्त सीमांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इससे पूर्व अगस्त महीने में भी विधायक ने कश्मीर के संभागीय आयुक्त के समक्ष धरमुणा, सोइबुग, गोरीपोरा, गोतपोरा, चूरपोरा, सोज़ैथ और हाजीबाग जैसे गांवों के लोगों की चिंताओं को रखा था, जिस पर प्रशासन ने पारदर्शी प्रक्रिया और प्रभावितों के वैध हितों की रक्षा का आश्वासन दिया था। होकरसर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर वेटलैंड होने के साथ-साथ लाखों प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना है, जिसके चलते राष्ट्रीय हरित अधिकरण में भी यहां अतिक्रमण और मिट्टी भराई के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े मामले दर्ज रहे हैं। संवाद