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Srinagar News: अच्छन में 361 करोड़ की कचरा प्रबंधन परियोजना का टेंडर रद्द, नया जारी
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- पुराने कचरे के खात्मे की डेडलाइन अब 2028 तक बढ़ी
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। शहर के अच्छन में प्रस्तावित 361 करोड़ की इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना को लेकर सरकार ने पुराना टेंडर रद्द कर नया टेंडर जारी किया है। इसके साथ ही, डंपिंग साइट पर जमा पुराने कचरे को पूरी तरह साफ करने की समय सीमा को भी मार्च 2027 से बढ़ाकर मार्च 2028 कर दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने इसी साल मई में अच्छन में 800 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता वाले इस आधुनिक प्लांट को मंजूरी दी थी। इसे श्रीनगर के कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल निपटारे के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा था। जम्मू-कश्मीर ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 800-टीपीडी क्षमता वाले इस प्लांट का पहला टेंडर रद्द कर दिया गया है। इसके बाद 361 करोड़ की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए दोबारा नया टेंडर निकाला गया है। इस प्रक्रिया में कई संशोधन और तारीखों में बदलाव किए गए हैं। अब बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 21 सितंबर तय की गई है, जबकि टेंडर 22 सितंबर को खोले जाएंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार अच्छन में वर्षों से जमा कचरे के ढेरों को हटाने की कोशिश कर रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि लिगेसी वेस्ट को हटाने की समयसीमा, जो पहले मार्च 2027 रखी गई थी, अब बढ़ाकर मार्च 2028 कर दी गई है। एनजीटी ने इस एक साल की देरी पर प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है।
11 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा है जमा
पर्यावरण रिकॉर्ड के मुताबिक, अच्छन में करीब 11 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है, जिसके वैज्ञानिक निस्तारण पर लगभग 60.50 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। इससे पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भी अच्छन में कचरा प्रबंधन की खामियों को उजागर किया था। सीएजी ने लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट (कचरे से निकलने वाले गंदे पानी के शोधन संयंत्र) की कार्यप्रणाली और प्रस्तावित प्रसंस्करण संयंत्रों में हो रही देरी पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। दूसरी तरफ, सरकार का कहना है कि डंपिंग साइट पर वैज्ञानिक तरीके से काम जारी है। जुलाई में वरिष्ठ अधिकारियों ने अच्छा का दौरा कर बायो-माइनिंग, लीचेट ट्रीटमेंट और पर्यावरण निगरानी कार्यों की समीक्षा की थी। पहला टेंडर रद्द होना, नई खरीद प्रक्रिया शुरू करना और पुराने कचरे को हटाने की समयसीमा का आगे बढ़ना यह दर्शाता है कि अच्छन की पुरानी कचरा समस्या के समाधान की रफ्तार धीमी है। सरकारी पोर्टल पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पहला टेंडर क्यों रद्द हुआ।
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अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। शहर के अच्छन में प्रस्तावित 361 करोड़ की इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना को लेकर सरकार ने पुराना टेंडर रद्द कर नया टेंडर जारी किया है। इसके साथ ही, डंपिंग साइट पर जमा पुराने कचरे को पूरी तरह साफ करने की समय सीमा को भी मार्च 2027 से बढ़ाकर मार्च 2028 कर दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने इसी साल मई में अच्छन में 800 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता वाले इस आधुनिक प्लांट को मंजूरी दी थी। इसे श्रीनगर के कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल निपटारे के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा था। जम्मू-कश्मीर ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 800-टीपीडी क्षमता वाले इस प्लांट का पहला टेंडर रद्द कर दिया गया है। इसके बाद 361 करोड़ की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए दोबारा नया टेंडर निकाला गया है। इस प्रक्रिया में कई संशोधन और तारीखों में बदलाव किए गए हैं। अब बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 21 सितंबर तय की गई है, जबकि टेंडर 22 सितंबर को खोले जाएंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार अच्छन में वर्षों से जमा कचरे के ढेरों को हटाने की कोशिश कर रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि लिगेसी वेस्ट को हटाने की समयसीमा, जो पहले मार्च 2027 रखी गई थी, अब बढ़ाकर मार्च 2028 कर दी गई है। एनजीटी ने इस एक साल की देरी पर प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है।
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11 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा है जमा
पर्यावरण रिकॉर्ड के मुताबिक, अच्छन में करीब 11 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है, जिसके वैज्ञानिक निस्तारण पर लगभग 60.50 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। इससे पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भी अच्छन में कचरा प्रबंधन की खामियों को उजागर किया था। सीएजी ने लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट (कचरे से निकलने वाले गंदे पानी के शोधन संयंत्र) की कार्यप्रणाली और प्रस्तावित प्रसंस्करण संयंत्रों में हो रही देरी पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। दूसरी तरफ, सरकार का कहना है कि डंपिंग साइट पर वैज्ञानिक तरीके से काम जारी है। जुलाई में वरिष्ठ अधिकारियों ने अच्छा का दौरा कर बायो-माइनिंग, लीचेट ट्रीटमेंट और पर्यावरण निगरानी कार्यों की समीक्षा की थी। पहला टेंडर रद्द होना, नई खरीद प्रक्रिया शुरू करना और पुराने कचरे को हटाने की समयसीमा का आगे बढ़ना यह दर्शाता है कि अच्छन की पुरानी कचरा समस्या के समाधान की रफ्तार धीमी है। सरकारी पोर्टल पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पहला टेंडर क्यों रद्द हुआ।
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