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J&K: गेट फांदकर सीएम उमर ने पढ़ी फातिहा, पुलिस पर लगाया हाथापाई का आरोप, कहा- वर्दी पहनकर कानून भूल जाते हैं
Mon, 14 Jul 2025 02:56 PM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर
अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Mon, 14 Jul 2025 02:56 PM IST
सार
सीएम उमर अब्दुल्ला ने पुलिस की रोक के बावजूद नक्शबंद साहब की दरगाह का गेट फांदकर शहीदों की मजार पर फातिहा पढ़ी और पुलिस पर हाथापाई का आरोप लगाया। वहीं एनसी नेता सकीना इटू स्कूटी से सुरक्षा को चकमा देकर मजार पहुंचीं और पूरी कयादत ने श्रद्धांजलि दी।
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गेट फांदकर उमर अब्दुल्ला ने पढ़ी फातिहा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पुलिस के बीच उस समय तनातनी हो गई जब पुलिस ने उन्हें शहीदों के कब्रिस्तान में जाने से रोकने की कोशिश की। उमर अब्दुल्ला ने पुलिस के रोकने के बावजूद चार दीवारी फांद कर कब्रिस्तान में प्रवेश किया और 13 जुलाई 1931 के मृतकों को श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने कहा, हमें कल शहीदों के कब्रिस्तान जाकर फातिहा पढ़ने की इजाजत नहीं दी गई। सुबह से ही हमें अपने-अपने घरों में बंद रखा गया। मैंने कंट्रोल रूम को सूचित किया कि मैं वहां जाकर फातिहा पढ़ना चाहता हूं, लेकिन कुछ ही मिनटों में मेरे घर के बाहर बंकर लगा दिया गया।
उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा कि आज भी उन्हें वहां जाने से रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने पूछा, आख़िर किस कानून के तहत हमें वहां जाने से रोका गया है? क्या शहीदों को याद करना अब गुनाह हो गया है?
यह खबर भी पढ़ें: उमर अब्दुल्ला बोले: हम किसी के गुलाम नहीं, जब मर्जी होगी... हम शहीदों को श्रद्धांजलि देने यहां आएंगे
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया है कि उन्हें और अन्य लोगों को शहीदों के कब्रिस्तान जाकर फातिहा पढ़ने से रोका गया। उन्होंने इस घटना को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, हमें कल शहीदों के कब्रिस्तान जाकर फातिहा पढ़ने की इजाजत नहीं दी गई। सुबह से ही हमें अपने-अपने घरों में बंद रखा गया। मैंने कंट्रोल रूम को सूचित किया कि मैं वहां जाकर फातिहा पढ़ना चाहता हूं, लेकिन कुछ ही मिनटों में मेरे घर के बाहर बंकर लगा दिया गया।
उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा कि आज भी उन्हें वहां जाने से रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने पूछा, आख़िर किस कानून के तहत हमें वहां जाने से रोका गया है? क्या शहीदों को याद करना अब गुनाह हो गया है?
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