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ईडी के आदेश को चुनौती देने वाली फारूक की याचिका पर सुनवाई आज
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श्रीनगर। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला की संपत्ति जब्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। यह याचिका पिछले सप्ताह डॉ. अब्दुल्ला ने दाखिल की थी।
याचिका 5 मार्च को न्यायमूर्ति अली मोहम्मद मागरे के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी परंतु उन्होंने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। इसके बाद इसे सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। ईडी ने दिसंबर में कश्मीर और जम्मू में 11.86 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी और उसने आरोप लगाया था कि जब्त संपत्ति जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन से संबंधित घोटाले में अपराध से अर्जित की गई है। जबकि डॉ. अब्दुल्ला का कहना है कि ईडी द्वारा जब्त संपत्ति या तो पैतृक थी या कथित जेकेसीए घोटाले से पहले ली गई थी। ईडी ने आरोप लगाया है कि फारूक ने वर्ष 2001-2011 तक जम्मू-कश्मीर क्त्रिस्केट एसोसिएशन (जेकेसीए) के अध्यक्ष के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से मिले पैसे को प्रायोजित तरीके से लूटने के लिए खेल निकाय में नियुक्तियां कीं। अब्दुल्ला ने ईडी के फैसले को उनके मौलिक अधिकारों का लगातार उल्लंघन बताया था। 85 वर्षीय नेकां अध्यक्ष से ईडी ने श्रीनगर में अंतिम बार अक्तूबर 2020 में पूछताछ की थी।
12 करोड़ की संपत्ति की गई थी जब्त
ईडी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में श्रीनगर के गुपकार रोड, टंगमर्ग के कटिपोरा तहसील और जम्मू के बठिंडी की आवासीय संपत्तियों के अलावा श्रीनगर की पॉश रेजीडेंसी रोड पर एक व्यावसायिक इमारत तथा प्रदेश में चार स्थानाों पर भूखंड भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इन संपत्तियों की बुक वैल्यू 11.86 करोड़ रुपये है, लेकिन उनके बाजार मूल्य का अनुमान लगभग 60-70 करोड़ रुपये है।
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याचिका 5 मार्च को न्यायमूर्ति अली मोहम्मद मागरे के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी परंतु उन्होंने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। इसके बाद इसे सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। ईडी ने दिसंबर में कश्मीर और जम्मू में 11.86 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी और उसने आरोप लगाया था कि जब्त संपत्ति जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन से संबंधित घोटाले में अपराध से अर्जित की गई है। जबकि डॉ. अब्दुल्ला का कहना है कि ईडी द्वारा जब्त संपत्ति या तो पैतृक थी या कथित जेकेसीए घोटाले से पहले ली गई थी। ईडी ने आरोप लगाया है कि फारूक ने वर्ष 2001-2011 तक जम्मू-कश्मीर क्त्रिस्केट एसोसिएशन (जेकेसीए) के अध्यक्ष के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से मिले पैसे को प्रायोजित तरीके से लूटने के लिए खेल निकाय में नियुक्तियां कीं। अब्दुल्ला ने ईडी के फैसले को उनके मौलिक अधिकारों का लगातार उल्लंघन बताया था। 85 वर्षीय नेकां अध्यक्ष से ईडी ने श्रीनगर में अंतिम बार अक्तूबर 2020 में पूछताछ की थी।
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12 करोड़ की संपत्ति की गई थी जब्त
ईडी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में श्रीनगर के गुपकार रोड, टंगमर्ग के कटिपोरा तहसील और जम्मू के बठिंडी की आवासीय संपत्तियों के अलावा श्रीनगर की पॉश रेजीडेंसी रोड पर एक व्यावसायिक इमारत तथा प्रदेश में चार स्थानाों पर भूखंड भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इन संपत्तियों की बुक वैल्यू 11.86 करोड़ रुपये है, लेकिन उनके बाजार मूल्य का अनुमान लगभग 60-70 करोड़ रुपये है।
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