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जोजिला दर्रा पहली बार मार्च के प्रथम सप्ताह में भी खुला रहा : बीआरओ
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खुला जोजिला मार्ग। स्रोत बीआरओ
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- यहां एवलांच और बर्फीली हवा के कारण काम करना मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
गांदरबल। जोजिला दर्रा एक बहुत ही स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण पास है। साथ ही यह बहुत चुनौतीपूर्ण भी है। यह लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर है। यहां अकसर एवलांच होते हैं और तेज बर्फीली हवाओं के कारण यहां काम करना बहुत मुश्किल हो जाता है। बीआरओ के मुताबिक जोजिला दर्रा पहली बार मार्च के प्रथम सप्ताह में भी खुला रहा
अधिकारियों ने बताया कि बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट बीकन के तहत हमारा पहला काम सेना की मदद से इस पास को ज्यादा से ज्यादा समय तक खुला रखना है। यह दर्रा लद्दाख के लिए लाइफलाइन का काम करता है। यह सेना के काफिलों की आवाजाही को आसान बनाने, सैनिकों को ताजा राशन सप्लाई करने और लद्दाख में रहने वाले लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है।
इस सर्दी में हमने खराब मौसम में भी पास को ज्यादा से ज्यादा समय तक खुला रखने के लिए खास कोशिशें कीं। इस कोशिश में हम काफी सफल रहे हैं। यह पक्का कोई आसान काम नहीं था लेकिन प्रोजेक्ट बीकन के जरिए बीआरओ सेना को सपोर्ट करने और देश की इस स्ट्रेटेजिक लाइफलाइन को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है।
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अधिकारी के मुताबिक हर सुबह हमारी टीम सूरज निकलने से पहले ही सब-जीरो तापमान में लगभग 5 बजे काम शुरू कर देती है। पहला स्टेप सड़क की कंडीशन का डिटेल्ड सर्वे करना है। सर्वे के आधार पर डोजर, स्नो कटर जैसी भारी मशीनरी और दूसरे उपकरण लगाए जाते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि हमारा मकसद है कि सड़क को सामान्य रूप से सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच ट्रैफिक के लिए खुला रखा जाए और एवलांच या भारी स्नोफॉल जैसी मुश्किल परिस्थितियों में हम कोशिश करते हैं कि सड़क दोपहर 12 बजे से एक बजे के बीच चालू रहे। सड़क का यह टाइम पर खुलना सेना की ऑपरेशनल तैयारियों के लिए बहुत जरूरी है।
बीआरओ के अधिकारी ने कहा कि ट्रैफिक मूवमेंट पूरा होने के बाद हमारी टीम सड़क को स्टेबिलाइज करने और बर्फ हटाने का काम जारी रखती है। टीम दिन का ऑपरेशन पूरा करने के बाद आमतौर पर शाम पांच बजे के बाद कैंप लौट आती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गांदरबल। जोजिला दर्रा एक बहुत ही स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण पास है। साथ ही यह बहुत चुनौतीपूर्ण भी है। यह लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर है। यहां अकसर एवलांच होते हैं और तेज बर्फीली हवाओं के कारण यहां काम करना बहुत मुश्किल हो जाता है। बीआरओ के मुताबिक जोजिला दर्रा पहली बार मार्च के प्रथम सप्ताह में भी खुला रहा
अधिकारियों ने बताया कि बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट बीकन के तहत हमारा पहला काम सेना की मदद से इस पास को ज्यादा से ज्यादा समय तक खुला रखना है। यह दर्रा लद्दाख के लिए लाइफलाइन का काम करता है। यह सेना के काफिलों की आवाजाही को आसान बनाने, सैनिकों को ताजा राशन सप्लाई करने और लद्दाख में रहने वाले लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है।
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इस सर्दी में हमने खराब मौसम में भी पास को ज्यादा से ज्यादा समय तक खुला रखने के लिए खास कोशिशें कीं। इस कोशिश में हम काफी सफल रहे हैं। यह पक्का कोई आसान काम नहीं था लेकिन प्रोजेक्ट बीकन के जरिए बीआरओ सेना को सपोर्ट करने और देश की इस स्ट्रेटेजिक लाइफलाइन को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है।
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अधिकारी के मुताबिक हर सुबह हमारी टीम सूरज निकलने से पहले ही सब-जीरो तापमान में लगभग 5 बजे काम शुरू कर देती है। पहला स्टेप सड़क की कंडीशन का डिटेल्ड सर्वे करना है। सर्वे के आधार पर डोजर, स्नो कटर जैसी भारी मशीनरी और दूसरे उपकरण लगाए जाते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि हमारा मकसद है कि सड़क को सामान्य रूप से सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच ट्रैफिक के लिए खुला रखा जाए और एवलांच या भारी स्नोफॉल जैसी मुश्किल परिस्थितियों में हम कोशिश करते हैं कि सड़क दोपहर 12 बजे से एक बजे के बीच चालू रहे। सड़क का यह टाइम पर खुलना सेना की ऑपरेशनल तैयारियों के लिए बहुत जरूरी है।
बीआरओ के अधिकारी ने कहा कि ट्रैफिक मूवमेंट पूरा होने के बाद हमारी टीम सड़क को स्टेबिलाइज करने और बर्फ हटाने का काम जारी रखती है। टीम दिन का ऑपरेशन पूरा करने के बाद आमतौर पर शाम पांच बजे के बाद कैंप लौट आती है।