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Srinagar News: प्रदेश सरकार को खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड 2016 भर्ती प्रक्रिया पर फैसला लेने का निर्देश
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने सरकार को खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा 2016 में अकाउंट्स असिस्टेंट, जूनियर ऑडिटर, जूनियर असिस्टेंट और रिकॉर्ड कीपर सहित विभिन्न पदों के लिए शुरू की गई चयन प्रक्रिया के भविष्य पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
जस्टिस संजय धर की बेंच ने महबूब अली मीर और आठ अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने 28 जून 2019 के सरकारी आदेश को चुनौती दी थी। इसमें विज्ञापन के तहत की गई सभी चयन प्रक्रियाओं को रद्द कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि उन्होंने लिखित परीक्षा में भाग लिया था और संबंधित पदों के लिए शॉर्टलिस्ट हुए थे।
जूनियर असिस्टेंट/रिकॉर्ड कीपर पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार टाइप टेस्ट में भी शामिल हुए थे, जबकि सभी याचिकाकर्ता बाद में इंटरव्यू में भी शामिल हुए थे। हालांकि, कार्यकारी अधिकारी, प्रचार अधिकारी, सहायक कार्यकारी अधिकारी, फील्ड प्रचार अधिकारी और जूनियर सांख्यिकी सहायक सहित कई अन्य पदों के लिए चयन सूची जारी की गई थी लेकिन अकाउंट्स असिस्टेंट जूनियर ऑडिटर और जूनियर असिस्टेंट रिकॉर्ड कीपर पदों के लिए कोई चयन सूची जारी नहीं की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने पहले भी अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसने अधिकारियों को चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। हालांकि बाद में अवमानना कार्यवाही के दौरान सरकार ने विवादित आदेश के माध्यम से पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया।
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अदालत ने कहा कि 28 जून 2019 का रद्दीकरण आदेश पहले ही संबंधित मुकदमे में रद्द किया जा चुका है और यह फैसला अंतिम हो चुका है। एक खंडपीठ ने उन उम्मीदवारों की बहाली का भी आदेश दिया था जिनकी चयन प्रक्रिया नियुक्तियों में परिणत हुई थी, जबकि अधिकारियों को कानून के अनुसार नई जांच करने की अनुमति दी थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि वर्तमान याचिकाकर्ता अलग स्थिति में हैं क्योंकि जिन पदों के लिए उन्होंने आवेदन किया था, उनकी चयन प्रक्रिया चयन सूची या नियुक्ति आदेश जारी होने तक नहीं पहुंची थी। इसलिए अदालत ने कहा कि उनके चयन या नियुक्ति के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।
साथ ही अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया को रद्द करने वाले सरकारी आदेश को रद्द किए जाने के बाद अधिकारियों को इस प्रक्रिया को ऐसे आगे बढ़ाना होगा जैसे कि रद्दीकरण आदेश कभी जारी ही नहीं हुआ था। तदनुसार, अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 2016 के विज्ञापन के तहत शुरू की गई चयन प्रक्रिया के भविष्य पर फैसला लें। या तो इसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाएं या मामले की जांच करने के बाद कोई अन्य उचित कार्रवाई करें।
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जस्टिस संजय धर की बेंच ने महबूब अली मीर और आठ अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने 28 जून 2019 के सरकारी आदेश को चुनौती दी थी। इसमें विज्ञापन के तहत की गई सभी चयन प्रक्रियाओं को रद्द कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि उन्होंने लिखित परीक्षा में भाग लिया था और संबंधित पदों के लिए शॉर्टलिस्ट हुए थे।
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जूनियर असिस्टेंट/रिकॉर्ड कीपर पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार टाइप टेस्ट में भी शामिल हुए थे, जबकि सभी याचिकाकर्ता बाद में इंटरव्यू में भी शामिल हुए थे। हालांकि, कार्यकारी अधिकारी, प्रचार अधिकारी, सहायक कार्यकारी अधिकारी, फील्ड प्रचार अधिकारी और जूनियर सांख्यिकी सहायक सहित कई अन्य पदों के लिए चयन सूची जारी की गई थी लेकिन अकाउंट्स असिस्टेंट जूनियर ऑडिटर और जूनियर असिस्टेंट रिकॉर्ड कीपर पदों के लिए कोई चयन सूची जारी नहीं की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने पहले भी अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसने अधिकारियों को चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। हालांकि बाद में अवमानना कार्यवाही के दौरान सरकार ने विवादित आदेश के माध्यम से पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया।
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अदालत ने कहा कि 28 जून 2019 का रद्दीकरण आदेश पहले ही संबंधित मुकदमे में रद्द किया जा चुका है और यह फैसला अंतिम हो चुका है। एक खंडपीठ ने उन उम्मीदवारों की बहाली का भी आदेश दिया था जिनकी चयन प्रक्रिया नियुक्तियों में परिणत हुई थी, जबकि अधिकारियों को कानून के अनुसार नई जांच करने की अनुमति दी थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि वर्तमान याचिकाकर्ता अलग स्थिति में हैं क्योंकि जिन पदों के लिए उन्होंने आवेदन किया था, उनकी चयन प्रक्रिया चयन सूची या नियुक्ति आदेश जारी होने तक नहीं पहुंची थी। इसलिए अदालत ने कहा कि उनके चयन या नियुक्ति के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।
साथ ही अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया को रद्द करने वाले सरकारी आदेश को रद्द किए जाने के बाद अधिकारियों को इस प्रक्रिया को ऐसे आगे बढ़ाना होगा जैसे कि रद्दीकरण आदेश कभी जारी ही नहीं हुआ था। तदनुसार, अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 2016 के विज्ञापन के तहत शुरू की गई चयन प्रक्रिया के भविष्य पर फैसला लें। या तो इसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाएं या मामले की जांच करने के बाद कोई अन्य उचित कार्रवाई करें।