{"_id":"69c38c9a28c6bcbce805a49e","slug":"focus-on-increasing-credit-in-backward-sectors-new-roadmap-ready-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu Kashmir: पिछड़े सेक्टरों में कर्ज बढ़ाने पर फोकस, नया रोडमैप तैयार, अधिकारी फील्ड में करेंगे सुधार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu Kashmir: पिछड़े सेक्टरों में कर्ज बढ़ाने पर फोकस, नया रोडमैप तैयार, अधिकारी फील्ड में करेंगे सुधार
Wed, 25 Mar 2026 12:50 PM IST
Nikita Gupta
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: Nikita Gupta
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:50 PM IST
सार
जम्मू में आरबीआई की कार्यशाला में जिला अधिकारियों के लिए नया रोडमैप तैयार किया गया, जिसमें कृषि, एमएसएमई, शिक्षा और आवास जैसे पिछड़े सेक्टरों में कर्ज बढ़ाने और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
विज्ञापन
आरबीआई की लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर के लिए वर्कशॉप
- फोटो : संवाद
विस्तार
कर्ज वितरण में पीछे चल रहे सेक्टरों को सुधारने के लिए जिला स्तर पर नई रणनीति तैयार की गई। इसमें कृषि, एमएसएमई के साथ शिक्षा और आवास जैसे क्षेत्रों में कर्ज बढ़ाने, योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और बैंकों व सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
विज्ञापन
इसी उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जम्मू ने मंगलवार को लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम), जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) और अग्रणी जिला अधिकारी (एलडीओ) के लिए जम्मू में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
विज्ञापन
इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विभिन्न जिलों के अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्य सचिव अटल डुल्लू और विशिष्ट अतिथि वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार मौजूद रहे। आरबीआई जम्मू के कार्यशाला में जिला ऋण योजना (पीएलपी) तैयार करने और उसे वार्षिक ऋण योजना (एसीपी) में बदलने की प्रक्रिया, यूटीएलबीसी की भूमिका और सरकारी योजनाओं के जरिए ज्यादा लोगों तक कर्ज पहुंचाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विज्ञापन
साथ ही फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर भी बात की गई। अधिकारियों ने बताया कि बिना गारंटी के कृषि ऋण की सीमा बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है, जबकि एमएसएमई के लिए यह सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की जा रही है, जो एक अप्रैल, 2026 से लागू होगी। इसका उद्देश्य छोटे किसानों और उद्यमियों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति 2025-2030 के तहत भी इसी दिशा में काम किया जा रहा है। कार्यशाला में संचार कौशल, नेतृत्व और तनाव प्रबंधन पर भी सत्र आयोजित किए गए, ताकि अधिकारी फील्ड स्तर पर बेहतर तरीके से काम कर सकें। साथ ही विभिन्न जिलों के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और सफल प्रयासों की जानकारी दी।
मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश बढ़ाने के लिए टर्म लोन पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य का 75.74 प्रतिशत हासिल किया गया है लेकिन यह अभी पूरी तरह लक्ष्य तक नहीं पहुंचा है और शिक्षा व आवास जैसे क्षेत्रों में कर्ज बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। कार्यशाला में आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक चंद्रशेखर आजाद भी मौजूद रहे।