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जम्मू-कश्मीर दौरे के 15 दिन बाद मसौदा रिपोर्ट तैयार करने में जुटा परिसीमन आयोग
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर अपने पहले दौरे के लगभग 15 दिन बाद परिसीमन आयोग ने विधानसभा क्षेत्रों के प्रस्तावित नए आकार पर एक मसौदा रिपोर्ट पर काम शुरू कर दिया है। इसे सार्वजनिक करने से पहले आयोग अपने सहयोगी सदस्यों के साथ साझा भी करेगा। इन सदस्यों में नेकां के तीन लोकसभा सदस्यों डॉ. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी और अकबर लोन तथा भाजपा के डॉ. जितेंद्र सिंह और जुगल किशोर शर्मा शामिल हैं। हालांकि, नेकां ने आयोग की पहली बैठक का बहिष्कार किया था।
सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग ने 6 से 9 जुलाई तक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था। आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा पदेन सदस्य और जम्मू-कश्मीर निर्वाचन अधिकारी भी शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि आयोग अपनी यात्रा के दौरान उपायुक्तों और लगभग 290 प्रतिनिधिमंडलों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित करेगा। इन प्रतिनिधि मंडलों में राजनीतिक दलों के 800 प्रतिनिधि और समाज के अन्य क्षेत्रों के लोग शामिल हैं। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि मसौदा रिपोर्ट साझा करने के बाद, परिसीमन आयोग सीमाओं के पुनर्निर्धारण पर सार्वजनिक टिप्पणियों और चुनौतियों के लिए अंतिम मसौदा तैयार करने से पहले उनके विचार प्राप्त करने के लिए सहयोगी सदस्यों के साथ बैठक करेगा। उन्होंने कहा कि आयोग कुछ जिलों पर भी विचार कर रहा है जहां क्षेत्राधिकार की सीमाओं को फिर से संगठित किया जा सकता है क्योंकि चुनावी क्षेत्र में दो जिलों में शामिल हैं। केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराने के संकेतों के बीच परिसीमन की कवायद तेज हो गई है। ऐसी अटकलें हैं कि अगले छह से नौ महीनों में चुनाव हो सकते हैं। आयोग के पास सीमाओं को फिर से बनाने और नए निर्वाचन क्षेत्र बनाने के लिए अगले साल 6 मार्च तक का समय है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ एक बैठक की थी, जहां उन्होंने जोर देकर कहा था कि परिसीमन की कवायद जल्दी होनी चाहिए ताकि इस केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव हो सकें।
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विस की सात सीटें बढ़ जाएंगी
एक बार परिसीमन की कवायद पूरी हो जाने के बाद, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएगी। विधानसभा की चौबीस सीटें खाली रहती हैं क्योंकि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के अंतर्गत आती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग ने 6 से 9 जुलाई तक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था। आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा पदेन सदस्य और जम्मू-कश्मीर निर्वाचन अधिकारी भी शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि आयोग अपनी यात्रा के दौरान उपायुक्तों और लगभग 290 प्रतिनिधिमंडलों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित करेगा। इन प्रतिनिधि मंडलों में राजनीतिक दलों के 800 प्रतिनिधि और समाज के अन्य क्षेत्रों के लोग शामिल हैं। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि मसौदा रिपोर्ट साझा करने के बाद, परिसीमन आयोग सीमाओं के पुनर्निर्धारण पर सार्वजनिक टिप्पणियों और चुनौतियों के लिए अंतिम मसौदा तैयार करने से पहले उनके विचार प्राप्त करने के लिए सहयोगी सदस्यों के साथ बैठक करेगा। उन्होंने कहा कि आयोग कुछ जिलों पर भी विचार कर रहा है जहां क्षेत्राधिकार की सीमाओं को फिर से संगठित किया जा सकता है क्योंकि चुनावी क्षेत्र में दो जिलों में शामिल हैं। केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराने के संकेतों के बीच परिसीमन की कवायद तेज हो गई है। ऐसी अटकलें हैं कि अगले छह से नौ महीनों में चुनाव हो सकते हैं। आयोग के पास सीमाओं को फिर से बनाने और नए निर्वाचन क्षेत्र बनाने के लिए अगले साल 6 मार्च तक का समय है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ एक बैठक की थी, जहां उन्होंने जोर देकर कहा था कि परिसीमन की कवायद जल्दी होनी चाहिए ताकि इस केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव हो सकें।
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विस की सात सीटें बढ़ जाएंगी
एक बार परिसीमन की कवायद पूरी हो जाने के बाद, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएगी। विधानसभा की चौबीस सीटें खाली रहती हैं क्योंकि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के अंतर्गत आती हैं।
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