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अपने भाषणों से लोगों को देश के खिलाफ लामबंद कर रहे थे फारुक, पूर्व मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप
Fri, 20 Sep 2019 01:43 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Trainee Trainee
Updated Fri, 20 Sep 2019 01:43 AM IST
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डॉ. फारुक अब्दुल्ला
- फोटो : अमर उजाला
देश के खिलाफ लोगों को लामबंद करने और घाटी में सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा करने की ‘जबरदस्त क्षमता’ वाले बयान उन सूचीबद्ध आरोपों में शामिल हैं। जिनके तहत जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारुक अब्दुल्ला को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) में गिरफ्तार किया गया है।
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श्रीनगर के 81 वर्षीय लोकसभा सांसद पर अपने भाषणों में आतंकवादियों व अलगाववादियों के महिमा मंडन का भी आरोप लगाया गया है। वह पांच अगस्त को राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले के बाद से गुपकार रोड स्थित अपने घर में नजरबंद हैं।
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फारुक के खिलाफ की गई पीएसए की कार्रवाई में वर्ष 2016 से अब तक के सात मौकों का हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस और आतंकी समूहों के हित में बात की। वह राज्य के पहले पूर्व मुख्यमंत्री हैं जिन्हें सोमवार को पीएसए के तहत गिरफ्तार किया गया और उनके गुपकार रोड स्थित आवास को जेल घोषित कर दिया गया।
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नेशनल कांफ्रेंस के चेयरमैन व तीन बार के मुख्यमंत्री रह चुके फारुक अब्दुल्ला को पीएसए के प्रावधानों के अनुरूप तीन से छह महीने तक जेल में रखा जा सकता है। आरोप है कि फारुक 370 व 35ए का सहारा लेकर लोगों को भड़का सकते थे। वह देश की अखंडता को खतरे में डाल कर उग्रवाद का महिमामंडन कर सकते थे। उनकी विचारधार अलगाववाद का समर्थन करते हुए आम लोगों के जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा कर रही थी।
पीएसए आदेश में कहा गया है कि फारुक के पास श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा करने की ‘जबरदस्त क्षमता’ है। इसे देश के खिलाफ भड़काने की कार्रवाई से जोड़ कर देखा जाता है। उन पर राज्य प्रशासन द्वारा कानून के विरोध में बयान जारी करने का भी आरोप लगाया गया है, जो सार्वजनिक व्यवस्था को परेशान करने के उद्देश्य से थे।
पीएसए में दो खंड
पीएसए में दो खंड हैं, एक है सार्वजनिक व्यवस्था जबकि दूसरा है राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा। ये पहले तीन से छह महीने के लिए परीक्षण और बाद में दो साल के लिए हिरासत में रखने की अनुमति देता है। पीएसए सिर्फ जम्मू और कश्मीर में लागू है। देश में अन्य हिस्सों में समान कानून राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लागू है।