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दवा घोटाले पर सिविल सोसायटी एकजुट हुई
Sri nagar
Updated Wed, 08 May 2013 05:30 AM IST
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श्रीनगर। सरकारी अस्पतालों में नकली दवाईयों की आपूर्ति का मामले को लेकर अब श्रीनगर में जोरदार तरीके से उठने लगा है। श्रीनगर में सचिवालय के खुलते ही अलग-अलग बंटे सिविल सोसायटी के सदस्य अब इस पर एकजुट होकर बवाल करने लगे हैं। सोमवार को नागरिक सचिवालय के खुलने पर इस मामले के विरोध में रखे गए कश्मीर बंद का मिला जुला असर भी देखा जा चुका है।
लगभग एक माह पूर्व राज्य के कुछ सरकारी अस्पतालों में घटिया दवाईयों की आपूर्ति का पता चलते ही राज्यभर में बवाल खड़ा हो गया था। लेकिन जम्मू के मुकाबले कश्मीर संभाग में इसको लेकर काफी विवाद हो चुका है। दो बार कश्मीर में सफल बंद रखा जा चुका है और बडे़ पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी आयोजित हुए हैं। लेकिन अब फिर नकली दवाईयों का जिन्न बोतल से बाहर आने लगा है। सिविल सोसायटी के लोग फिर से सक्रिय होने लगे हैं और इस मामले में कुछ-कुछ राजनीति भी दिखाई देने लगी है। सरकारी कार्यालय जम्मू में होने के कारण सरकार कश्मीर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के असर से बचती रही है लेकिन अब उसको इसका सामना करना पड़ रहा है। नकली दवाईयों की सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति की जांच कई स्तरों पर जारी है।
लेकिन अभी तक किसी भी व्यक्ति को कसूरवार न ठहराने के कारण कश्मीर के लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी पैदा होने लगी है। यह लोग अलग-अलग धड़ों में बंटी सिविल सोसायटी से भी नाराज हैं। उनका मानना है कि लोगों के जीवन के साथ जुडे़ इस अहम मसले के दोषियों को सजा दिलवाने के स्थान पर कुछ लोग इस पर राजनीति ज्यादा करने लगे हैं, जिससे यह आंदोलन राह भटकने लगा है। दवाई घोटाले के प्रकाश में आने के बाद से इस पर शुरू हुआ आंदोलन गत एक महीने से विभिन्न समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहा है। केंद्र सरकार भी इस घोटाले से अछूती नहीं रही है। लोगों के गुस्से का ही असर था कि केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग कोएक दल दवाईयों के सैंपल एकत्रित करने के लिए राज्य के दौरे पर भेजना पड़ा। इसके अलावा भी राज्य स्तर पर इस मामले की जांच की जा रही है।
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लगभग एक माह पूर्व राज्य के कुछ सरकारी अस्पतालों में घटिया दवाईयों की आपूर्ति का पता चलते ही राज्यभर में बवाल खड़ा हो गया था। लेकिन जम्मू के मुकाबले कश्मीर संभाग में इसको लेकर काफी विवाद हो चुका है। दो बार कश्मीर में सफल बंद रखा जा चुका है और बडे़ पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी आयोजित हुए हैं। लेकिन अब फिर नकली दवाईयों का जिन्न बोतल से बाहर आने लगा है। सिविल सोसायटी के लोग फिर से सक्रिय होने लगे हैं और इस मामले में कुछ-कुछ राजनीति भी दिखाई देने लगी है। सरकारी कार्यालय जम्मू में होने के कारण सरकार कश्मीर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के असर से बचती रही है लेकिन अब उसको इसका सामना करना पड़ रहा है। नकली दवाईयों की सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति की जांच कई स्तरों पर जारी है।
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लेकिन अभी तक किसी भी व्यक्ति को कसूरवार न ठहराने के कारण कश्मीर के लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी पैदा होने लगी है। यह लोग अलग-अलग धड़ों में बंटी सिविल सोसायटी से भी नाराज हैं। उनका मानना है कि लोगों के जीवन के साथ जुडे़ इस अहम मसले के दोषियों को सजा दिलवाने के स्थान पर कुछ लोग इस पर राजनीति ज्यादा करने लगे हैं, जिससे यह आंदोलन राह भटकने लगा है। दवाई घोटाले के प्रकाश में आने के बाद से इस पर शुरू हुआ आंदोलन गत एक महीने से विभिन्न समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहा है। केंद्र सरकार भी इस घोटाले से अछूती नहीं रही है। लोगों के गुस्से का ही असर था कि केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग कोएक दल दवाईयों के सैंपल एकत्रित करने के लिए राज्य के दौरे पर भेजना पड़ा। इसके अलावा भी राज्य स्तर पर इस मामले की जांच की जा रही है।
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