Leh: श्योक टनल समेत पांच हजार करोड़ की 125 सीमा परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित, रक्षामंत्री ने किया लोकार्पण
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख के श्योक क्षेत्र में बनी 920 मीटर लंबी टनल सहित 5,000 करोड़ रुपये की 125 सीमा विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जिनमें 41 लद्दाख और 22 जम्मू-कश्मीर की परियोजनाएं शामिल हैं। बीआरओ द्वारा निर्मित ये सड़कें, पुल और रणनीतिक ढांचे दुर्गम इलाकों में हर मौसम में भरोसेमंद कनेक्टिविटी और सेना की त्वरित तैनाती क्षमता को मजबूत करेंगे।
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विस्तार
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह रविवार को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब श्योक टनल समेत देश के सात राज्यों व दो केंद्र शासित प्रदेशों में बनी 125 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। यह पहली बार है कि जब सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की इतनी बड़ी संख्या में परियोजनाएं एक साथ देश को समर्पित की गई हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले की सात परियाेजनाएं समेत कुल 22 और लद्दाख की 41 परियोजनाएं शामिल हैं।
लेह के रिंचेन ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में वर्चुअल माध्यम से रक्षा मंत्री ने जिन राज्यों में परियोजनाएं समर्पित की हैं उनमें केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर तथा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम हैं। इन परियोजनाओं में 28 सड़कें, 93 पुल और चार अन्य निर्माण कार्य हैं। इन परियोजनाओं पर 5,000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा गलवन युद्ध स्मारक का भी उद्घाटन किया गया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीकी नवाचार में बीआरओ ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्नत इंजीनियरिंग के बल पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत के तहत बीआरओ ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के साथ साझेदारी में स्वदेशी रूप से विकसित क्लास-70 मॉड्यूलर पुलों को तैयार किया है। उन्होंने कहा, पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित ये पुल देश की इंजीनियरिंग आत्मनिर्भरता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं।
बेजोड़ बीआरओ: बीआरओ के एक अधिकारी ने बीआरओ ने विविध और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में इन परियोजनाओं को पूरा किया है। उच्च ऊंचाई वाले, बर्फीले, रेगिस्तानी, बाढ़ एवं घने वन क्षेत्रों में बीआरओ की बेजोड़ क्षमता का एक जीवंत उदाहरण है। इसी क्षमताओं को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए 2025-26 में बीआरओ का बजट 6,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7,146 करोड़ रुपये कर दिया है।
श्योक टनल : भरोसमंद इंजीनियरिंग का बड़ा कमाल
लेह जिले के श्योक में बनी टनल 920 मीटर लंबी है। इसे दुरबुक-श्योक-दाैलत बेग ओल्डी मार्ग पर बनाया गया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि ये श्योक टनल इंजीनियरिंग का कमाल है और ये हर मौसम में भरोसेमंद कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। इससे सर्दियों में सीमा पर तेजी से तैनाती की क्षमता बढ़ेगी। रणनीतिक व सामरिक दृष्टि से भरोसेमंद ये टनल दुनिया के सबसे मुश्किल व चुनौतीपूर्ण इलाकों में से बनी है। भारी बर्फबारी, एवलांच और बहुत ज्यादा तापमान वाले इस इलाके में यह टनल सुरक्षा, मोबिलिटी और खासकर कड़ाके की सर्दियों में तेजी से तैनाती की क्षमता को भी कई गुना बढ़ा देगी।
दो वर्षों में बीआरओ ने 356 परियोजनाएं देश को साैंपी: रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में बीआरओ ने 16,690 करोड़ रुपये खर्च किए हैं जो अब तक का सबसे अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 18,700 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। एक अधिकारी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में बीआरओ ने 356 बुनियादी ढांचा परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित की हैं। रणनीतिक बुनियादी ढांचे के विकास में ये एक बड़ी उपलब्धि है।
लद्दाख को 28 पुल और आठ सड़कें मिलीं: देश को समर्पित की गईं परियोजनाओं में अकेले लद्दाख की 41 परियोजनाएं हैं। इनमें 28 पुल और आठ सड़कें शामिल हैं। इसके अलावा श्योक टनल भी है। अधिकतर परियोजनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास हैं और इसे सीधे जोड़ती हैं। सामरिक महत्व के साथ-साथ बीआरओ की इन परियोजनाओं से स्थानीय समुदायों के जीवन में व्यापक परिवर्तन आने की उम्मीद है। बेहतर सड़क और पुल संपर्क से उन गांवों तक वर्ष भर पहुंच संभव हो सकेगी जो सर्दी के मौसम में कई महीनों तक कटे रहते थे। इन परियोजनाओं से स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
51 लाख करोड़ रुपये पहुंचा घरेलू रक्षा उत्पादन, 24,000 करोड़ का निर्यात
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन 2014 में 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है। भारत रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन का गवाह बन रहा है। भारत पहले आयात पर निर्भर देश था अब एक उभरता हुआ उत्पादक-निर्यातक देश बन गया है। उन्होंने कहा कि देश में पहले घरेलू स्तर पर हथियारों और उपकरणों के निर्माण के लिए एक मजबूत प्रणाली का अभाव था लेकिन पिछले एक दशक के निरंतर प्रयासों ने इस स्थिति को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि हमारा रक्षा निर्यात जो 10 साल पहले 1,000 करोड़ रुपये से कम था अब लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
आम यातायात प्रवाह को सुगम बनाएगा उड़ी का नंद सिंह ब्रिज
राजनाथ सिंह ने लद्दाख से उड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नंद सिंह ब्रिज का भी ऑनलाइन उद्घाटन किया। उड़ी में इस मौके पर 12 इन्फ्रैंट्री बिग्रेड उड़ी के कमांडर मनीष पहुंचल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उनके साथ कमांडिंग ऑफिसर 9 जाट कर्नल पार्श्वन भारद्वाज व 53 आरसीसी के सेकेंड-इन-कमांड लेफ्टिनेंट कर्नल अरविंद सिंह भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में अधिकारियों ने कहा कि यह पुल सीमा क्षेत्र में नागरिक और सैन्य आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण संपर्क है। उम्मीद है कि यह यातायात प्रवाह को सुगम बनाएगा और कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा। यह पुल क्षेत्र में रहने वाले लोगों और सुरक्षा बलों दोनों को लाभ पहुंचाएगा।
हमारे सैनिक दुर्गम इलाकों में मजबूती से डटे
रक्षा मंत्री ने कहा, आज हमारे सैनिक दुर्गम इलाकों में मजबूती से डटे हुए हैं क्योंकि उनके पास सड़कें, रीयल-टाइम संचार प्रणालियां, उपग्रह सहायता, निगरानी नेटवर्क और रसद संपर्क उपलब्ध हैं। सीमा पर तैनात एक सैनिक का हर मिनट, हर सेकेंड बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए संपर्क को केवल नेटवर्क, ऑप्टिकल फाइबर, ड्रोन और रडार तक सीमित नहीं बल्कि सुरक्षा की रीढ़ माना जाना चाहिए।
दूसरी तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि 8.2 प्रतिशत की बात कही
2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि को 8.2 प्रतिशत तक पहुंचने का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी और कम्युनिकेशन न सिर्फ सुरक्षा, बल्कि आर्थिक समृद्धि में भी अहम भूमिका निभाते हैं। यह ग्रोथ सरकार की ग्रोथ-समर्थक नीतियों और सुधारों के साथ-साथ हर भारतीय की कड़ी मेहनत का नतीजा है। आज हम कई युद्ध और संघर्ष देख रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद हमने एक बड़ा संघर्ष भी देखा लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद, हमारी अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है, हम आगे बढ़ते जा रहे हैं।
गलवां में बहादुरों के बलिदान की याद दिलाएगा युद्ध स्मारक
बीआरओ की 125 परियोजनाओं के अलावा रक्षा मंत्री ने गलवां में युद्ध स्मारक का भी लोकार्पण किया। भारतीय सेना ने इसे वर्ष 2020 में चीनी सैनिकों के साथ हुए गलवां घाटी संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान हुए वीर सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है।
त्रिशूल और डमरू के प्रतीकात्मक आकार में डिजाइन किया गया यह युद्ध स्मारक लाल व काले ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है।
ये समुद्र तल से करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसे विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध स्मारक बताया जा रहा है।
स्मारक परिसर में 20 बलिदानियों की कांस्य प्रतिमाएं, एक संग्रहालय, डिजिटल गैलरी तथा गलवां और पूर्वी लद्दाख के सैन्य इतिहास को दर्शाने वाली स्थायी प्रदर्शनियां हैं। बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रक्षा मंत्री ने इस स्मारक को भारत की संप्रभुता की रक्षा के संकल्प और सर्वोच्च बलिदान के सम्मान का प्रतीक बताया।
कैफे व सेल्फी प्वाइंट
सीमावर्ती विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में दुरबुक–गलवां मार्ग पर कैफे, विश्राम स्थल, सेल्फी प्वाइंट, स्मारिका दुकानें और व्याख्यात्मक रेत मॉडल जैसी पर्यटन सुविधाएं विकसित की गई हैं। इन सुविधाओं का संचालन स्थानीय लोगों को सौंपा जाएगा। इससे वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को बल मिलेगा और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
रक्षामंत्री ने बीआरओ की इस तरह थपथपाई पीठ
- रक्षामंत्री ने कहा, ये परियोजनाएं बीआरओ और केंद्र के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के पक्के इरादे के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मुझे देश को इतनी बड़ी संख्या में परियोजनाएं और एक वॉर मेमोरियल राष्ट्र को समर्पित करते हुए खुशी हो रही है। हमारे सैनिकों की बहादुरी हमारे लिए प्रेरणा है।
- ये प्रोजेक्ट्स हमारे हीरो को श्रद्धांजलि हैं। हमारी सेना के बहादुर सैनिक और संगठन के कर्मचारी देश के लिए बिना थके काम करते हैं। उसी जज्बे का नतीजा है कि आज हमारा देश लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
- बीआरओ की 125 परियोजनाएं अब तक की सबसे ज्यादा कीमत वाले प्रोजेक्ट का उद्घाटन है। इतनी बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट का उद्घाटन एक साथ पहले कभी नहीं हुआ। यह उपलब्धि एक तरफ विकसित भारत के संकल्प का सबूत है तो दूसरी तरफ ये प्रोजेक्ट्स हमारी सरकार के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के पक्के इरादे का एक जीता-जागता उदाहरण हैं।
- मुझे याद है इसी साल मई के महीने में हमने देश को 50 प्रोजेक्ट्स समर्पित किए थे। तब भी मुझे बहुत खुशी हुई थी। आज इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ मेरी खुशी गई गुना बढ़ गई है।
- बीआरओ आज कम्युनिकेशन और कनेक्टिविटी का दूसरा नाम बन गया है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी और कुशलता से संगठन ने सीमावर्ती इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है उससे देश के विकास को भी काफी बढ़ावा मिला है।
सहायता में भी आगे
इस साल बीआरओ की कोशिशों से उत्तराखंड में हिमस्खलन में फंसे 46 मजदूरों को बचाया गया। उत्तरी सिक्किम में 1,600 से अधिक फंसे पर्यटकों को निकाला गया। चिशोती में बादल फटने की घटना के बाद 5,000 तीर्थयात्रियों को निकाला गया।
सीमा पर मजबूत संपर्क सुविधाओं से मिली ऐतिहासिक सफलता
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर रक्षा मंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी कार्रवाई मजबूत संपर्क सुविधाओं की वजह से ही संभव हो पाई। हमारे सशस्त्र बल समय पर रसद पहुंचाने में सक्षम रहे। सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर संपर्क कई तरह से सुरक्षा में बदलाव ला रहा है और सैनिकों को दुर्गम इलाकों में ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम बना रहा है। इस सब के चलते ऑपरेशन सिंदूर को ऐतिहासिक सफलता मिली।
बीआरओ के प्रयास राष्ट्र प्रथम का सशक्त उदाहरण
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में कार्य करने वाले बीआरओ के इंजीनियरों और श्रमिकों की सराहना करते हुए उनके प्रयासों को राष्ट्र प्रथम भावना का सशक्त उदाहरण बताया। उन्होंने देशवासियों से लद्दाख आने का आह्वान करते हुए कहा कि यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की साहस, शक्ति और आत्मबल को भी अनुभव किया जाना चाहिए।