{"_id":"29c5e09fd82462e80602a70738a5171a","slug":"the-peace-prayer-of-goddess-durga-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां दुर्गा से सुख-शांति की प्रार्थना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां दुर्गा से सुख-शांति की प्रार्थना
अमर उजाला ब्यूरो/राजोरी
Updated Sat, 28 Mar 2015 01:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुर्गा अष्टमी पर शुक्रवार को घर-घर कन्या पूजन किया गया।
इस अवसर पर पिछले सात दिनों से व्रत रख कर मां भगवती की पूजा करने वाले अधिकतर भक्तों ने अपने घरों में कन्याओं को बुला कर उनका पूजन किया।
भक्तों ने दान दक्षिणा देते हुए मां से आशीर्वाद मांगा। कन्या पूजन का यह क्रम दिन भर चलता रहा। वहीं देर शाम अपने घरों में नवरात्र की अखंड ज्योति जलाने वाले और खेती बोने वाले भक्त उन्हें विसर्जित करने के लिए पुलस्त नदी पहुंचे।
जहां खेती एवं ज्योति विसर्जित करते हुए मां दुर्गा से सुख शांति की प्रार्थना की। चैत्र नवरात्र में दुर्गा अष्टमी पर कई मंदिरों में यज्ञ एवं भंडारे का भी आयोजन किया गया।
मेंढर तहसील में अष्टमी पर कन्या पूजन किया गया। नवमी तिथि लगने से पहले घरों और मंदिरों में बीजी माता की खेती को जल विसर्जित कर दिया गया।
पूरे नवरात्र के दौरान हर मंदिर में पूजा पाठ चलता रहा। श्रीराम मंदिर में पूरे नवरात्र पाठ चलता रहा, जिसका भोग रामनवमी के दिन शनिवार को पड़ेगा।
विज्ञापन
इस अवसर पर पिछले सात दिनों से व्रत रख कर मां भगवती की पूजा करने वाले अधिकतर भक्तों ने अपने घरों में कन्याओं को बुला कर उनका पूजन किया।
भक्तों ने दान दक्षिणा देते हुए मां से आशीर्वाद मांगा। कन्या पूजन का यह क्रम दिन भर चलता रहा। वहीं देर शाम अपने घरों में नवरात्र की अखंड ज्योति जलाने वाले और खेती बोने वाले भक्त उन्हें विसर्जित करने के लिए पुलस्त नदी पहुंचे।
जहां खेती एवं ज्योति विसर्जित करते हुए मां दुर्गा से सुख शांति की प्रार्थना की। चैत्र नवरात्र में दुर्गा अष्टमी पर कई मंदिरों में यज्ञ एवं भंडारे का भी आयोजन किया गया।
विज्ञापन
मेंढर तहसील में अष्टमी पर कन्या पूजन किया गया। नवमी तिथि लगने से पहले घरों और मंदिरों में बीजी माता की खेती को जल विसर्जित कर दिया गया।
पूरे नवरात्र के दौरान हर मंदिर में पूजा पाठ चलता रहा। श्रीराम मंदिर में पूरे नवरात्र पाठ चलता रहा, जिसका भोग रामनवमी के दिन शनिवार को पड़ेगा।