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Poonch News: नियंत्रण रेखा के उस पार लांचिंग पैड्स पर 160 एवं जम्मू-कश्मीर में 300 के करीब आतंकी मौजूद
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पुंछ लिंकअप दिवस के अवसर पर शहीदों को श्रदांजली अर्पित करते सेना के उत्तरी कमांडर एंव लोगों से मि
- फोटो : POONCH
पुंछ। हमारी जानकारी के अनुसार नियंत्रण रेखा के उस पार लांचिंग पैड्स पर करीब 160 आतंकी मौजूद हैं। इनमें से पीर पंजाल के उत्तर में 160 आतंकी मौजूद हैं, जबकि दक्षिण अर्थात राजोरी-पुंछ के उस पार 30 आतंकी मौजूद हैं। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में करीब 82 विदेशी पाकिस्तानी आतंकी मौजूद हैं। 53 स्थानिय आतंकी हैं।
यह कहना है सेना की उत्तरी कमान के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी का, जो पुंछ में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमारे सुरक्षाबलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती जम्मू-कश्मीर में मौजूद करीब 170 आपराधिक मानसिकता के लोग हैं। जो आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं, जिनका कोई आतंकी रिकार्ड नहीं है। ऐसे में कुल मिलाकर केंद्र शासित में करीब 300 आतंकी मौजूद हैं, परंतु आप इस बात का भरोसा रखिए कि हम इनको किसी प्रकार की घटना को अंजाम नहीं देनेे देंगे। उनके नापाक मनसूबों को कभी पूरा नहीं होने देंगे।
नियंत्रण रेखा एवं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन के मामलों के बारे में द्विवेदी का कहना था कि ड्रोन के मामलों में और बढ़ोतरी होगी, क्याेंकि यह एक नई तकनीक है। वह ड्रोन भेजते रहेंगे, हम रोकने के उपकरण लगाते रहेंगे। इसके साथ ही हमने उन क्षेत्रों को भी चिह्नित करने का काम किया है। जहां ड्रोन से हथियार एवं ड्रग्स गिराई जाती है। हम वहां पर भी कार्रवाई कर रहे हैं, और हमारा प्रयास ड्रोन से गिराए जाने वाले हथियारों को आतंकियों के पास नहीं पहुंचने देना है। हम उसमें सफल भी हो रहे हैं। आतंकी यहां मौजूद हैं और वह अपनी कोई गतिविधि नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि उनके पास हथियारों की कमी है।
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जहां तक कश्मीर की बात है वहां आम लोगों को निशाना बनाने की बात है। तो हमारा पड़ोसी मुल्क उस पार से यहां पिस्टल भेज रहा है, ग्रेनेड भेज रहा है, और यहां मौजूद आतंकी जब कोई बड़ी घटना नहीं कर पा रहे हैं तो वह जम्मू-कश्मीर में रोजी रोटी कमाने आए निहत्थे एवं गरीब पर अथवा जो कश्मीर की सेवा करने आए हैं, उनको अपना निशाना बना रहे हैं। इसके साथ ही आपको तो पता है जो लोग ऐसा कर रहे हैं। उनको उनके अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की अर्थ व्यवस्था में सेना दे रही है योगदान
पुंछ। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की अर्थ व्यवस्था में सेना योगदान दे रही है। लद्दाख में जहां सेना तैनात है, वहां हर वर्ष करीब 500 से 600 करोड़ रुपये की अर्थ व्यवस्था में योगदान दे रही है। हम जम्मू-कश्मीर की अर्थ व्यवस्था में 1500 से 2000 करोड़ रुपये का योगदान देते हैं। हमारा एक ही लक्ष है आपका विकास करना। आपकी सुविधाओं का विकास करना है।
मैं कश्मीर के युवाओं को यह कहना चाहता हूं कि जो यहां पर है वो सब आपके लिए है। वह हमेशा आपके उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास कर रहा है। उसके लिए तत्पर तैयार है। बस आपको हमारे साथ आना है, और यह बताना है कि तीस-चालीस साल ने हमारे लोगों ने जो गलतियां की हैं, उससे कुछ नहीं मिलने वाला है। आप सरहद के उस पार देखिए वहां की क्या हालत है। वहां किसी प्रकार का कोई विकास नहीं हुआ है, जबकि हमारा भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। आज हमारा देश जी-5 का प्रमुख है। दुनिया में बड़ी इज्जत पा रहा है। अगर आपको उस इज्जत का हकदार बनना है तो आई उस ब्यार में बहिये उसके साथ चलिए। वरना बाद में एक ही बात आएगी कि कारवां तो गुजर गया गुबार ही उठता रहा। इसलिए मेरा आग्रह है आगे आइए और विकास की राह पर कदम बढ़ाइये।
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यह कहना है सेना की उत्तरी कमान के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी का, जो पुंछ में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमारे सुरक्षाबलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती जम्मू-कश्मीर में मौजूद करीब 170 आपराधिक मानसिकता के लोग हैं। जो आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं, जिनका कोई आतंकी रिकार्ड नहीं है। ऐसे में कुल मिलाकर केंद्र शासित में करीब 300 आतंकी मौजूद हैं, परंतु आप इस बात का भरोसा रखिए कि हम इनको किसी प्रकार की घटना को अंजाम नहीं देनेे देंगे। उनके नापाक मनसूबों को कभी पूरा नहीं होने देंगे।
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नियंत्रण रेखा एवं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोन के मामलों के बारे में द्विवेदी का कहना था कि ड्रोन के मामलों में और बढ़ोतरी होगी, क्याेंकि यह एक नई तकनीक है। वह ड्रोन भेजते रहेंगे, हम रोकने के उपकरण लगाते रहेंगे। इसके साथ ही हमने उन क्षेत्रों को भी चिह्नित करने का काम किया है। जहां ड्रोन से हथियार एवं ड्रग्स गिराई जाती है। हम वहां पर भी कार्रवाई कर रहे हैं, और हमारा प्रयास ड्रोन से गिराए जाने वाले हथियारों को आतंकियों के पास नहीं पहुंचने देना है। हम उसमें सफल भी हो रहे हैं। आतंकी यहां मौजूद हैं और वह अपनी कोई गतिविधि नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि उनके पास हथियारों की कमी है।
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जहां तक कश्मीर की बात है वहां आम लोगों को निशाना बनाने की बात है। तो हमारा पड़ोसी मुल्क उस पार से यहां पिस्टल भेज रहा है, ग्रेनेड भेज रहा है, और यहां मौजूद आतंकी जब कोई बड़ी घटना नहीं कर पा रहे हैं तो वह जम्मू-कश्मीर में रोजी रोटी कमाने आए निहत्थे एवं गरीब पर अथवा जो कश्मीर की सेवा करने आए हैं, उनको अपना निशाना बना रहे हैं। इसके साथ ही आपको तो पता है जो लोग ऐसा कर रहे हैं। उनको उनके अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की अर्थ व्यवस्था में सेना दे रही है योगदान
पुंछ। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की अर्थ व्यवस्था में सेना योगदान दे रही है। लद्दाख में जहां सेना तैनात है, वहां हर वर्ष करीब 500 से 600 करोड़ रुपये की अर्थ व्यवस्था में योगदान दे रही है। हम जम्मू-कश्मीर की अर्थ व्यवस्था में 1500 से 2000 करोड़ रुपये का योगदान देते हैं। हमारा एक ही लक्ष है आपका विकास करना। आपकी सुविधाओं का विकास करना है।
मैं कश्मीर के युवाओं को यह कहना चाहता हूं कि जो यहां पर है वो सब आपके लिए है। वह हमेशा आपके उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास कर रहा है। उसके लिए तत्पर तैयार है। बस आपको हमारे साथ आना है, और यह बताना है कि तीस-चालीस साल ने हमारे लोगों ने जो गलतियां की हैं, उससे कुछ नहीं मिलने वाला है। आप सरहद के उस पार देखिए वहां की क्या हालत है। वहां किसी प्रकार का कोई विकास नहीं हुआ है, जबकि हमारा भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। आज हमारा देश जी-5 का प्रमुख है। दुनिया में बड़ी इज्जत पा रहा है। अगर आपको उस इज्जत का हकदार बनना है तो आई उस ब्यार में बहिये उसके साथ चलिए। वरना बाद में एक ही बात आएगी कि कारवां तो गुजर गया गुबार ही उठता रहा। इसलिए मेरा आग्रह है आगे आइए और विकास की राह पर कदम बढ़ाइये।