{"_id":"29-37955","slug":"Punch-37955-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"दहशत से किरनी, मंधार और शाहपुर में ठंडे रहे चूल्हे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दहशत से किरनी, मंधार और शाहपुर में ठंडे रहे चूल्हे
Punch
Updated Thu, 05 Sep 2013 05:36 AM IST
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पुंछ। पाकिस्तान की तरफ से की जाने वाली गोलाबारी से देश भर में आक्रोश है। भारतीय फौज पड़ोसी मुल्क की नापाक हरकत का माकूल जवाब भी दे रही। लेकिन इन सबके बीच अगर कोई ज्यादा दर्द झेल रहा, तो बेशक वह सीमांत लोग हैं। उनकी जिंदगी का एक-एक लमहा कष्ट में गुजर रहा। अगली सुबह कौन जिंदा रह पाएगा यह पाकिस्तान की तरह से की जा रही गोलाबारी पर निर्भर होकर रह गया है। बीते मंगलवार को दहशत इस कदर रही कि गांव किरनी, मंधार और शाहपुर में चूल्हे ठंडे पडे़ रहे।
पाक सेना द्वारा मंगलवार को सुबह सबेरे की गई गोलाबारी के चलते अधिकतर लोग नाश्ते के बाद घरों में दुबक गए, जो देर शाम अंधेरा होने तक घरों के अंदर ही बंद रहे। दिन भर चूल्हे ठंडे पडे़ रहने के बारे में माशूक अहमद, मोहम्मद इस्माइल, सकीना बेगम, नजीरा का कहना है कि इन दिनों रसोई घरों के बाहर चलती है। मंगलवार की सुबह हम लोग अभी चाय नाश्ते से ही निपटे थे कि पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी शुरू कर दी।
हम बरतन भी समेट नहीं पाए। जान बचाने के लिए सभी लोग घरों के अंधर घुस गए। दिन बढ़ने के साथ पाकिस्तान की तरफ से गोलाबारी बढ़ती गई। आवाज सुनकर बच्चे सहम गए। ऐसा लग रहा था जैसे दोनों देश के बीच युद्ध छिड़ गया हो। सभी डरे-सहमें थे। घरों में कैद रहने के कारण लोग खाना भी नहीं बना सके। बच्चों को दूध और बिस्कुट खिलाकर गोलाबारी बंद होने तक समय काटते रहे।
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पाक सेना द्वारा मंगलवार को सुबह सबेरे की गई गोलाबारी के चलते अधिकतर लोग नाश्ते के बाद घरों में दुबक गए, जो देर शाम अंधेरा होने तक घरों के अंदर ही बंद रहे। दिन भर चूल्हे ठंडे पडे़ रहने के बारे में माशूक अहमद, मोहम्मद इस्माइल, सकीना बेगम, नजीरा का कहना है कि इन दिनों रसोई घरों के बाहर चलती है। मंगलवार की सुबह हम लोग अभी चाय नाश्ते से ही निपटे थे कि पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी शुरू कर दी।
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हम बरतन भी समेट नहीं पाए। जान बचाने के लिए सभी लोग घरों के अंधर घुस गए। दिन बढ़ने के साथ पाकिस्तान की तरफ से गोलाबारी बढ़ती गई। आवाज सुनकर बच्चे सहम गए। ऐसा लग रहा था जैसे दोनों देश के बीच युद्ध छिड़ गया हो। सभी डरे-सहमें थे। घरों में कैद रहने के कारण लोग खाना भी नहीं बना सके। बच्चों को दूध और बिस्कुट खिलाकर गोलाबारी बंद होने तक समय काटते रहे।
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