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Kathua News: उज्ज बहुउद्देश्यीय परियोजना का होगा पुनरोद्धार
Sun, 15 Jun 2025 02:25 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 15 Jun 2025 02:25 AM IST
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह।
कठुआ। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में लंबे समय से लंबित उज्ज बहुउद्देश्यीय परियोजना को पुनर्जीवित कर रही है। इस परियोजना का पुनरोद्धार कार्य सुनिश्चित करेगा कि अतिरिक्त जल पाकिस्तान की सीमा में प्रवाहित न हो, बल्कि इसका उपयोग जम्मू-कश्मीर समेत पंजाब और हरियाणा आदि आसपास के राज्यों तक किया जाए।
मंत्री डॉ. जितेंद्र ने बताया कि यह परियोजना कई दशकों से लंबित थी, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय के सहयोग से परियोजना का संशोधित योजना प्रारूप तैयार करेगा, क्योंकि इस कई सुरक्षा पहलू भी हैं।
उज्ज परियोजना पर पहली जांच करीब एक सदी पहले शुरू हुई थी और स्वतंत्रता के बाद वर्ष 2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। इसके बावजूद कोई खास प्रगति नहीं हुई। वर्ष 2014 में सांसद चुने जाने के बाद डॉ. जितेंद्र ने इस मुद्दे को फिर से उठाकर इसकी प्रगति की निगरानी नियमित रूप से की।
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हाल ही में सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद गृह मंत्रालय भी इस परियोजना को प्राथमिकता दे रहा है, क्योंकि यह आतंकियों की घुसपैठ रोकने, बिलावर और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने में भी सहायक होगी। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी तेजी आई है, जिससे यह परियोजना और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
मंत्री डॉ. जितेंद्र ने कहा कि इस परियोजना से सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और पर्यटन को बढ़ावा मिलने से आर्थिक संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसकी नई डीपीआर तैयार होने की संभावना है, जिसमें सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए सिंचाई और ऊर्जा उत्पादन की नई रणनीति बनाई जाएगी। पहले 7,6269 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई का अनुमान था, लेकिन नई डीपीआर में यह क्षेत्र और भी बढ़ सकता है।
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मंत्री डॉ. जितेंद्र ने बताया कि यह परियोजना कई दशकों से लंबित थी, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय के सहयोग से परियोजना का संशोधित योजना प्रारूप तैयार करेगा, क्योंकि इस कई सुरक्षा पहलू भी हैं।
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उज्ज परियोजना पर पहली जांच करीब एक सदी पहले शुरू हुई थी और स्वतंत्रता के बाद वर्ष 2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। इसके बावजूद कोई खास प्रगति नहीं हुई। वर्ष 2014 में सांसद चुने जाने के बाद डॉ. जितेंद्र ने इस मुद्दे को फिर से उठाकर इसकी प्रगति की निगरानी नियमित रूप से की।
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हाल ही में सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद गृह मंत्रालय भी इस परियोजना को प्राथमिकता दे रहा है, क्योंकि यह आतंकियों की घुसपैठ रोकने, बिलावर और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने में भी सहायक होगी। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी तेजी आई है, जिससे यह परियोजना और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
मंत्री डॉ. जितेंद्र ने कहा कि इस परियोजना से सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और पर्यटन को बढ़ावा मिलने से आर्थिक संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसकी नई डीपीआर तैयार होने की संभावना है, जिसमें सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए सिंचाई और ऊर्जा उत्पादन की नई रणनीति बनाई जाएगी। पहले 7,6269 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई का अनुमान था, लेकिन नई डीपीआर में यह क्षेत्र और भी बढ़ सकता है।