{"_id":"6793ec8765a2459a7f0c9a3d","slug":"two-day-seminar-on-honeybee-production-kathua-news-c-201-1-knt1008-116837-2025-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: उत्पादक वैज्ञानिक तरीके से करें मधुमक्खी पालन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: उत्पादक वैज्ञानिक तरीके से करें मधुमक्खी पालन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-दो दिवसीय जिला स्तरीय संगोष्ठी सह जागरूकता कार्यक्रम कठुआ में शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पर दो दिवसीय जिला स्तरीय संगोष्ठी और जागरूकता कार्यक्रम का शुक्रवार को मुख्य कृषि अधिकारी कार्यालय में शुभारंभ हुआ। जिले भर से आए मधुमक्खी पालक और इच्छुक मधु मक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से इसका पालन करने के टिप्स दिए गए।
कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय गुप्ता और जिला कृषि अधिकारी विस्तार, मुरारी लाल ने किया। कार्यक्रम में मधुमक्खी पालन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। शुरूआत में क्षेत्र विकास अधिकारी (सब्जी) अशोक सरमल ने संगोष्ठी में जिले के सभी इच्छुक किसानों, उद्यमियों और मधुमक्खी पालकों को प्रोत्साहित किया। मुख्य कृषि अधिकारी ने जिले में मधुमक्खी पालन, बुनियादी ढांचे के विकास और शहद के उत्पादन में सुधार में हुई प्रगति पर चर्चा की। बताया कि वर्तमान में जिले में शहद उत्पादन पिछले तीन वर्षों में लगभग दोगुना होकर 2021-22 में 395 क्विंटल से 758 क्विंटल हो गया है, जिससे वर्ष 2024-25 में 2.45 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा।
बताया कि अधिक से अधिक युवा उद्यमी और मधुमक्खी पालक शहद मिशन से जुड़ रहे हैं। वर्तमान में 32 मधुमक्खी पालन इकाइयां, 6549 मधुमक्खी कॉलोनियों में कार्यात्मक हैं, जो शहद उत्पादन में 227 मधुमक्खी पालकों को रोजगार दे रही हैं। यह केवल कुछ बुनियादी संरचनात्मक परिवर्तनों, किसानों, मधुमक्खी पालकों की प्रेरणा और विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को दिए जाने वाले सब्सिडी लाभ के कारण ही संभव हुआ है। मधु क्रांति पोर्टल पर 114 मधुमक्खी पालक पंजीकृत हैं। यह पोर्टल व्यापार की सुविधा प्रदान करता है और शहद विक्रेताओं और व्यापारियों के बीच सेतु का काम करता है।
विज्ञापन
कहा कि विभाग ने समग्र कृषि विकास कार्यक्रम के तहत मधुमक्खी पालकों को सब्सिडी वाली मधुमक्खी कालोनियों, शहद संग्रह और भंडारण केंद्रों, सुविधा केंद्रों, प्रवास सुविधाओं, विनिर्माण और शहद निष्कर्षण इकाइयों की सुविधा देकर भी लाभ दिया है। जिले में दो प्रदर्शनी सह प्रशिक्षण केंद्र, बगियाल और सरथल मधुमक्खी पालकों की मदद कर रहे हैं और उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं।
विषय वस्तु विशेषज्ञ अमित कुमार और मधुमक्खी पालन विकास सहायक, कठुआ पंकज जसरोटिया ने शहद की बिक्री से मधुमक्खी पालन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। प्रगतिशील मधुमक्खी पालक ठंगर के सुरेश कुमार और लाखड़ी से आईं रेवा रानी ने भी मधुमक्खी पालन, प्रवास तकनीकों, शहद निष्कर्षण, मूल्य संवर्धन और शहद के विपणन पर अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा की। प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों को सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पर दो दिवसीय जिला स्तरीय संगोष्ठी और जागरूकता कार्यक्रम का शुक्रवार को मुख्य कृषि अधिकारी कार्यालय में शुभारंभ हुआ। जिले भर से आए मधुमक्खी पालक और इच्छुक मधु मक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से इसका पालन करने के टिप्स दिए गए।
कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय गुप्ता और जिला कृषि अधिकारी विस्तार, मुरारी लाल ने किया। कार्यक्रम में मधुमक्खी पालन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। शुरूआत में क्षेत्र विकास अधिकारी (सब्जी) अशोक सरमल ने संगोष्ठी में जिले के सभी इच्छुक किसानों, उद्यमियों और मधुमक्खी पालकों को प्रोत्साहित किया। मुख्य कृषि अधिकारी ने जिले में मधुमक्खी पालन, बुनियादी ढांचे के विकास और शहद के उत्पादन में सुधार में हुई प्रगति पर चर्चा की। बताया कि वर्तमान में जिले में शहद उत्पादन पिछले तीन वर्षों में लगभग दोगुना होकर 2021-22 में 395 क्विंटल से 758 क्विंटल हो गया है, जिससे वर्ष 2024-25 में 2.45 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा।
विज्ञापन
बताया कि अधिक से अधिक युवा उद्यमी और मधुमक्खी पालक शहद मिशन से जुड़ रहे हैं। वर्तमान में 32 मधुमक्खी पालन इकाइयां, 6549 मधुमक्खी कॉलोनियों में कार्यात्मक हैं, जो शहद उत्पादन में 227 मधुमक्खी पालकों को रोजगार दे रही हैं। यह केवल कुछ बुनियादी संरचनात्मक परिवर्तनों, किसानों, मधुमक्खी पालकों की प्रेरणा और विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को दिए जाने वाले सब्सिडी लाभ के कारण ही संभव हुआ है। मधु क्रांति पोर्टल पर 114 मधुमक्खी पालक पंजीकृत हैं। यह पोर्टल व्यापार की सुविधा प्रदान करता है और शहद विक्रेताओं और व्यापारियों के बीच सेतु का काम करता है।
विज्ञापन
कहा कि विभाग ने समग्र कृषि विकास कार्यक्रम के तहत मधुमक्खी पालकों को सब्सिडी वाली मधुमक्खी कालोनियों, शहद संग्रह और भंडारण केंद्रों, सुविधा केंद्रों, प्रवास सुविधाओं, विनिर्माण और शहद निष्कर्षण इकाइयों की सुविधा देकर भी लाभ दिया है। जिले में दो प्रदर्शनी सह प्रशिक्षण केंद्र, बगियाल और सरथल मधुमक्खी पालकों की मदद कर रहे हैं और उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं।
विषय वस्तु विशेषज्ञ अमित कुमार और मधुमक्खी पालन विकास सहायक, कठुआ पंकज जसरोटिया ने शहद की बिक्री से मधुमक्खी पालन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। प्रगतिशील मधुमक्खी पालक ठंगर के सुरेश कुमार और लाखड़ी से आईं रेवा रानी ने भी मधुमक्खी पालन, प्रवास तकनीकों, शहद निष्कर्षण, मूल्य संवर्धन और शहद के विपणन पर अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा की। प्रगतिशील मधुमक्खी पालकों को सम्मानित किया गया।