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Kathua News: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में वर्षों से मूलभूत सुविधाओं का अभाव
Wed, 26 Mar 2025 02:28 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 26 Mar 2025 02:28 AM IST
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तीन साल बाद भी नहीं मिला कोर्ट रूम, न स्वीकृत श्रम शक्ति
एक ही कमरे में आयोग सहित सदस्यों की बैठने की व्यवस्था
कठुआ। स्थापना के तीन साल बीतने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ है। वर्तमान में जिला उपायुक्त कार्यालय के पास खंडहर हुई रावी तवी कॉम्प्लेक्स के एक कमरे से आयोग की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाया जा रहा है।
हालांकि एक आयोग के स्टाफ के लिए एक अन्य छोटे से कमरे की व्यवस्था की गई है, लेकिन उसकी हालत दयनीय है। आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के अलावा कॉम्प्लेक्स में चल रहे अन्य दफ्तरों के लिए एक ही शौचालय की व्यवस्था है।
दरअसल, अप्रैल 2022 में तत्कालीन जिला उपायुक्त राहुल यादव ने आयोग के अध्यक्ष और दो अन्य सदस्यों को शपथ दिलाकर आयोग की कार्यप्रणाली को शुरू करवाया था। मगर तब तक न तो जिला प्रशासन ने और न ही सरकार की ओर से आयोग के दफ्तर की कोई व्यवस्था की थी। लगभग एक साल रावी तवी कॉम्प्लेक्स में एक छोटे से कमरे में आयोग के दफ्तर की स्थापना की गई। तब से लेकर आयोग एक कमरे से अपनी कार्यप्रणाली को चला रहा है। यहीं आयोग का कोर्टरूम है, और यहीं आयोग के अध्यक्ष सहित दो अन्य सदस्यों की बैठने की व्यवस्था है।
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आयोग की स्थापना के समय सरकार की ओर से 11 पदों को सरकार की ओर से स्वीकृत किया गया था। इसमें एक अध्यक्ष का और दो सदस्यों के पद थे। सरकार की ओर से स्थापना के समय सिर्फ तीन पदों को ही भरा गया था। इसमें एक सदस्य ने कुछ ही महीनों के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा आयोग के कानून के जानकार कुछ पेशेवर पदों में रजिस्ट्रार, रीडर और स्टेनोग्राफर की अभी तक नियुक्ति ही नहीं की गई है। वहीं, एक अकाउंटेट, दो जूनियर असिस्टेंट और एक अर्दली के पदों को भी भरा जाना है। आयोग की कार्यप्रणाली को चलाने के लिए सरकार की ओर से दो लोगों को अस्थायी तौर पर नियुक्त किया है, लेकिन वे किस पद पर काम कर रहे हैं, यह स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। आयोग के स्वीकृत पद न होने के चलते आयोग के अध्यक्ष और सदस्य को ही रजिस्ट्रार, रीडर और स्टेनोग्राफर का काम करना पड़ रहा है। जिसका असर मामलों के निपटान पर पढ़ना लाज़िम है।
जिला उपभोक्ता आयोग की वर्तमान स्थिति, मामलों के निपटान के लिए कोरम अधूरा
वर्तमान में सेवानिवृत जिला और सत्र न्यायाधीश मोहन सिंह परिहार जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हैं, जबकि नीलम बाला भारद्वाज आयोग के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। दूसरे सदस्य दुर्गा दास शर्मा कुछ महीनों बाद आयोग से इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि वर्तमान में अध्यक्ष और एक सदस्य से आयोग की कार्यप्रणाली बेहतर तरीके से चल रही है। मगर किसी मामले के निपटान को लेकर कहीं मामला फंस जाता है, तो बहुमत से फैसला लेने में मामला लटक सकता है। संवाद
आयोग की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाने के लिए कम से कम चार से पांच कमरों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में हमारे पास दो ही रूम उपलब्ध है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से जिला स्तर के आयोग सुचारु बनाने के लिए स्थापित दिशानिर्देश है। उम्मीद है कि सरकार जल्द स्थापित दिशा निर्देशों का पालन करते हुए जिला आयोग के लिए बेहतर ढांचागत सुविधा मुहैया करवाएगी।
-मोहन सिंह परिहार, अध्यक्ष जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग कठुआ।
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एक ही कमरे में आयोग सहित सदस्यों की बैठने की व्यवस्था
कठुआ। स्थापना के तीन साल बीतने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ है। वर्तमान में जिला उपायुक्त कार्यालय के पास खंडहर हुई रावी तवी कॉम्प्लेक्स के एक कमरे से आयोग की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाया जा रहा है।
हालांकि एक आयोग के स्टाफ के लिए एक अन्य छोटे से कमरे की व्यवस्था की गई है, लेकिन उसकी हालत दयनीय है। आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के अलावा कॉम्प्लेक्स में चल रहे अन्य दफ्तरों के लिए एक ही शौचालय की व्यवस्था है।
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दरअसल, अप्रैल 2022 में तत्कालीन जिला उपायुक्त राहुल यादव ने आयोग के अध्यक्ष और दो अन्य सदस्यों को शपथ दिलाकर आयोग की कार्यप्रणाली को शुरू करवाया था। मगर तब तक न तो जिला प्रशासन ने और न ही सरकार की ओर से आयोग के दफ्तर की कोई व्यवस्था की थी। लगभग एक साल रावी तवी कॉम्प्लेक्स में एक छोटे से कमरे में आयोग के दफ्तर की स्थापना की गई। तब से लेकर आयोग एक कमरे से अपनी कार्यप्रणाली को चला रहा है। यहीं आयोग का कोर्टरूम है, और यहीं आयोग के अध्यक्ष सहित दो अन्य सदस्यों की बैठने की व्यवस्था है।
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आयोग की स्थापना के समय सरकार की ओर से 11 पदों को सरकार की ओर से स्वीकृत किया गया था। इसमें एक अध्यक्ष का और दो सदस्यों के पद थे। सरकार की ओर से स्थापना के समय सिर्फ तीन पदों को ही भरा गया था। इसमें एक सदस्य ने कुछ ही महीनों के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा आयोग के कानून के जानकार कुछ पेशेवर पदों में रजिस्ट्रार, रीडर और स्टेनोग्राफर की अभी तक नियुक्ति ही नहीं की गई है। वहीं, एक अकाउंटेट, दो जूनियर असिस्टेंट और एक अर्दली के पदों को भी भरा जाना है। आयोग की कार्यप्रणाली को चलाने के लिए सरकार की ओर से दो लोगों को अस्थायी तौर पर नियुक्त किया है, लेकिन वे किस पद पर काम कर रहे हैं, यह स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। आयोग के स्वीकृत पद न होने के चलते आयोग के अध्यक्ष और सदस्य को ही रजिस्ट्रार, रीडर और स्टेनोग्राफर का काम करना पड़ रहा है। जिसका असर मामलों के निपटान पर पढ़ना लाज़िम है।
जिला उपभोक्ता आयोग की वर्तमान स्थिति, मामलों के निपटान के लिए कोरम अधूरा
वर्तमान में सेवानिवृत जिला और सत्र न्यायाधीश मोहन सिंह परिहार जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हैं, जबकि नीलम बाला भारद्वाज आयोग के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। दूसरे सदस्य दुर्गा दास शर्मा कुछ महीनों बाद आयोग से इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि वर्तमान में अध्यक्ष और एक सदस्य से आयोग की कार्यप्रणाली बेहतर तरीके से चल रही है। मगर किसी मामले के निपटान को लेकर कहीं मामला फंस जाता है, तो बहुमत से फैसला लेने में मामला लटक सकता है। संवाद
आयोग की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाने के लिए कम से कम चार से पांच कमरों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में हमारे पास दो ही रूम उपलब्ध है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से जिला स्तर के आयोग सुचारु बनाने के लिए स्थापित दिशानिर्देश है। उम्मीद है कि सरकार जल्द स्थापित दिशा निर्देशों का पालन करते हुए जिला आयोग के लिए बेहतर ढांचागत सुविधा मुहैया करवाएगी।
-मोहन सिंह परिहार, अध्यक्ष जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग कठुआ।