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जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारी 72 घंटे तक नहीं करेंगे काम

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Temporary employees of Jal Shakti Department will not work for 72 hours
अपनी लंबित मांगों को लेकर कठुआ स्थित कार्यकारी अभियंता कार्यालय के समक्ष नारेबाजी करते जलशक्ति - फोटो : KATHUA
कठुआ। वर्षों से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से गौर न किए जाने पर जल शक्ति विभाग के अस्थाई कर्मचारियों ने 72 घंटों की काम छोड़ो हड़ताल शुरू कर दी है। वीरवार को आल जे एंड के पीएचई आईटीआई ट्रेन्ड, सीपी वर्कर्स एंड लैंड डोनर्स एसोसिएशन के बैनर तले अस्थाई कर्मचारियों ने विभाग के कठुआ स्थित कार्यकारी अभियंता कार्यालय के समक्ष जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार से उनकी मांगों को पूरा किए जाने की मांग की। अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल से जिले में पानी संकट गहरा सकता है।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे एसोसिएशन के जिला प्रधान शिव नारायण सिंह ने कहा कि विभाग में वर्षों से सेवा दे रहे अस्थाई कर्मचारियों की सरकार की ओर से अनदेखी की जा रही है। जिसके कारण जम्मू कश्मीर में अपनी सेवाएं देने वाले करीब 60 हजार अस्थाई कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। आवश्यक सेवा के दायरे में आने वाली जल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए विभाग उनकी सेवाएं तो लेता है, लेकिन बकाया वेतन समय से नहीं दिया जा रहा है। जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद उन्हें केंद्र शासित प्रदेश की तर्ज पर न्यूनतम मजदूरी दी जा रही है।
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इसी को देखते हुए उनकी एसोसिएशन ने काम छोड़ हड़ताल के बारे में सरकार को सूचित करते हुए मांगे पूरी करने के लिए आवाज उठाई, लेकिन इसके बाद भी सरकार नहीं जागी। पिछले 60 महीनों का वेतन बकाया होने के कारण अस्थाई कर्मचारियों के घरों की आर्थिक दशा दिनों दिन खराब होती ही जा रही है। अब स्कूलों के खुलने के बाद से उन्हें अपने बच्चों की शिक्षा के लिए पैसों की आवश्यकता है। जिसपर सरकार की ओर से कोई गौर नही किया जा रहा है। इससे एसोसिएशन को एक बार फिर 72 घंटों की कामछोड़ हड़ताल को शुरू करना पड़ा है। अस्थाई कर्मचारियों के बकाया वेतन को जारी करने, केंद्र शासित प्रदेश के अनुसार न्यूनतम मजदूरी तय करने के साथ अस्थाई कर्मचारियों को नियमित किए जाने की मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन किया। अस्थायी कर्मचारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी उनकी एसोसिएशन ने सिर्फ 72 घंटों के लिए हड़ताल घोषित की है। अगर सरकार उनकी इन मांगों पर गौर नहीं करती है तो पूरे जम्मू कश्मीर के अस्थाई कर्मचारियों की यह लड़ाई आंदोलन का स्वरूप भी ला सकती है। प्रदर्शन में नरिंदर सिंह, राम गोपाल, धर्मपाल, राज कुमार, मोहम्मद साबिर, जितेंद्र शर्मा, रोमी शर्मा, सुरजीत सिंह, जगदीश सिंह, पूर्ण चंद, वीरेंद्र सिंह, बलबीर कुमार, बिट्टू कुमार आदि कर्मचारी नेता उपस्थित रहे।
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जलशक्ति कर्मियों की हड़ताल, गहराएगा पेयजल संकट
कठुआ। जिले भर में जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों की हड़ताल ने लोगों को पेयजल संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 15 सौ अस्थायी कर्मियों के एकसाथ हड़ताल पर जाने से विभाग के भी होश उड़ गए हैं। विभाग के पास 450 के लगभग ही स्थायी कर्मचारी हैं ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर इंतजाम वीरवार को ही शुरू कर दिए गए हैं। प्राथमिकता के आधार पर शहर और कस्बों की पेयजल सप्लाई को शुक्रवार को जारी रखने को लेकर खाका तैयार किया गया है। वहीं ग्रामीण इलाकों में एक दिन छोड़ या फिर कम समय के लिए पेयजल आपूर्ति से वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश की जाएगी। लेकिन कर्मचारियों ने विभाग की दिक्कतों को तो बढ़ाया ही है आम लोगों को भी पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा।

कर्मचारियों की हड़ताल का असर सबसे अधिक मैदानी और कंडी इलाकों में पड़ने वाला है। ऐसे विभाग ने ऐसे इलाकों को चिह्नित कर लिया है जहां व्यवस्था की अधिक जरूरत है। विभाग के कार्यकारी अभियंता विक्रम डोगरा ने बताया कि कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की जानकारी मिली है। मानदेय संभवत शुक्रवार को जारी कर दिया जाएगा। यदि हड़ताल फिर भी जारी रहती है तो वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा। कहा कि हड़ताल का असर लिफ्ट स्कीमें, ट्यूबवेल और डगवेल से पानी सप्लाई वाले इलाकों में पड़ सकता है। ऐसे में इसी तरह से व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
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