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लोक निर्माण विभाग के अस्थायी कर्मियों ने तीन दिन और बढ़ाई हड़ताल
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कठुआ। पिछले 12 दिन से नियमितीकरणकी मांग को लेकर हड़ताल पर बैठे लोक निर्माण विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने एक बार फिर हड़ताल को तीन दिन के लिए बढ़ा दिया है। शुक्रवार को कठुआ स्थित विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय में हड़ताली कर्मचारियों ने सरकार पर उनकी अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए कैजुअल लेबर यूनाइटेड फ्रंट के जिला प्रधान प्रवीण कुमार, गणेश कुमार, जिम्मी बलगोत्रा, मेजर सिंह, विशाल कजोत्रा, भूपिंदर सिंह आदि ने कहा कि सरकार से अपने हक को लेने के लिए वह लोग पिछले 12 दिनों से हड़ताल पर हैं। लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। इसके चलते उन्हें मजबूर होकर संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले सिर्फ तीन दिन के लिए काम छोड़ हड़ताल पर जाने की योजना थी, ताकि दो दशकों से अस्थायी कर्मचारियों की अनदेखी कर रही सरकार की आंखें खुल सकें। लेकिन इसके बावजूद सरकार नींद से नहीं जाग रही है। मजबूरन उन्हें बार-बार हड़ताल को बढ़ाना पड़ रहा है।
सरकार के इसी रवैये के चलते जम्मू-कश्मीर के विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे 60 हजार अस्थाई कर्मचारी नियमितीकरण के साथ बकाया वेतन व केंद्र शासित प्रदेश में सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग कर रहे हैं। सरकार अगर अब भी इन 60 हजार कर्मचारियों की समस्या का समाधान नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में यह सभी कर्मचारी उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। ऐसी स्थिति से बचने के लिए सरकार को अस्थायी कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान करना चाहिए।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए कैजुअल लेबर यूनाइटेड फ्रंट के जिला प्रधान प्रवीण कुमार, गणेश कुमार, जिम्मी बलगोत्रा, मेजर सिंह, विशाल कजोत्रा, भूपिंदर सिंह आदि ने कहा कि सरकार से अपने हक को लेने के लिए वह लोग पिछले 12 दिनों से हड़ताल पर हैं। लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। इसके चलते उन्हें मजबूर होकर संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले सिर्फ तीन दिन के लिए काम छोड़ हड़ताल पर जाने की योजना थी, ताकि दो दशकों से अस्थायी कर्मचारियों की अनदेखी कर रही सरकार की आंखें खुल सकें। लेकिन इसके बावजूद सरकार नींद से नहीं जाग रही है। मजबूरन उन्हें बार-बार हड़ताल को बढ़ाना पड़ रहा है।
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सरकार के इसी रवैये के चलते जम्मू-कश्मीर के विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे 60 हजार अस्थाई कर्मचारी नियमितीकरण के साथ बकाया वेतन व केंद्र शासित प्रदेश में सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग कर रहे हैं। सरकार अगर अब भी इन 60 हजार कर्मचारियों की समस्या का समाधान नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में यह सभी कर्मचारी उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। ऐसी स्थिति से बचने के लिए सरकार को अस्थायी कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान करना चाहिए।
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