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Kathua News: जिले की निकायों में गंदे पानी से मिलेगी निजात, नगरी और हीरानगर में कवायद शुरू, कठुआ के लिए मंजूरी का इंतजार
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- प्रयुक्त जल प्रबंधन परियोजना के तहत एसटीपी और पंपिंग स्टेशन होंगे तैयार
कठुआ। जिले की निकायों में इस्तेमाल हुए पानी के लिए प्रयुक्त जल प्रबंधन परियोजना (यूज्ड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट) पर काम शुरू हो गया है। पहले चरण में हीरानगर, नगरी परोल और कठुआ निकाय को शामिल किया है। नगरी और हीरानगर में कवायद शुरू हो चुकी है जबकि कठुआ नगर परिषद की बड़ी परियोजना को फिलहाल सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा है।
स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण के तहत संभाग की विभिन्न निकायों में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विजयपुर, भद्रवाह, कटरा, रियासी के अलावा हीरानगर और नगरी परोल निकाय में दस्तावेज पूरे किए जा रहे हैं। नगरी में परियोजना अलॉट करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है तो हीरानगर में परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
नगरी परोल और हीरानगर की निकायों में 1.50 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जाएगा। साथ ही इंटरसेप्शन और डायवर्जन स्ट्रक्चर और इंटरसेप्शन पंपिंग स्टेशन का निर्माण किया जाएगा। यानी गली मोहल्लों से निकलने वाले नालों को जोड़कर नेटवर्क तैयार किया जाएगा जहां से पंपिंग स्टेशन और फिर एसटीपी तक दूषित पानी पहुंचाया जाएगा। 12 माह के ट्रायल रन के बाद परियोजना का संचालन और रखरखाव पांच वर्षों तक सुनिश्चित किया जाएगा।
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नगरी परोल और हीरानगर की परियोजनाएं लगभग नौ करोड़ की हैं। जबकि कठुआ नगर परिषद में 8 से 9 एमएलडी की परियोजना के लिए लगभग 45 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना से न केवल नगर समितियों और निकाय में प्रयुक्त जल का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा, बल्कि गंदे पानी के कारण होने वाले प्रदूषण और बीमारियों पर भी अंकुश लगेगा।
नगरी परोल और हीरानगर निकाय के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कठुआ नगर परिषद के लिए सरकार को प्रोजेक्ट भेजा है। मंजूरी मिलने के साथ ही काम शुरू करवा दिया जाएगा। - राजीव कुमार, कार्यकारी अभियंता, यूईईडी विंग।
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कठुआ। जिले की निकायों में इस्तेमाल हुए पानी के लिए प्रयुक्त जल प्रबंधन परियोजना (यूज्ड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट) पर काम शुरू हो गया है। पहले चरण में हीरानगर, नगरी परोल और कठुआ निकाय को शामिल किया है। नगरी और हीरानगर में कवायद शुरू हो चुकी है जबकि कठुआ नगर परिषद की बड़ी परियोजना को फिलहाल सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा है।
स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण के तहत संभाग की विभिन्न निकायों में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विजयपुर, भद्रवाह, कटरा, रियासी के अलावा हीरानगर और नगरी परोल निकाय में दस्तावेज पूरे किए जा रहे हैं। नगरी में परियोजना अलॉट करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है तो हीरानगर में परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
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नगरी परोल और हीरानगर की निकायों में 1.50 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जाएगा। साथ ही इंटरसेप्शन और डायवर्जन स्ट्रक्चर और इंटरसेप्शन पंपिंग स्टेशन का निर्माण किया जाएगा। यानी गली मोहल्लों से निकलने वाले नालों को जोड़कर नेटवर्क तैयार किया जाएगा जहां से पंपिंग स्टेशन और फिर एसटीपी तक दूषित पानी पहुंचाया जाएगा। 12 माह के ट्रायल रन के बाद परियोजना का संचालन और रखरखाव पांच वर्षों तक सुनिश्चित किया जाएगा।
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नगरी परोल और हीरानगर की परियोजनाएं लगभग नौ करोड़ की हैं। जबकि कठुआ नगर परिषद में 8 से 9 एमएलडी की परियोजना के लिए लगभग 45 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना से न केवल नगर समितियों और निकाय में प्रयुक्त जल का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा, बल्कि गंदे पानी के कारण होने वाले प्रदूषण और बीमारियों पर भी अंकुश लगेगा।
नगरी परोल और हीरानगर निकाय के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कठुआ नगर परिषद के लिए सरकार को प्रोजेक्ट भेजा है। मंजूरी मिलने के साथ ही काम शुरू करवा दिया जाएगा। - राजीव कुमार, कार्यकारी अभियंता, यूईईडी विंग।